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    Tuesday, December 6, 2016

    रसूखदारों का फरमान। 300 रुपये का तमगा लो और देश भक्ति का परिचय दो


    कही-अनकही 
                                   "देख तेरे संसार की हालत क्या हो गई भगवान कितना बदल गया इंसान"। बड़ा मनमोहक संगीत है भियां जो रसूखदारों की करनी बयां कर रिया है। सच में भिंयां बदल रिया है इंसान,  भियां इन दिनों रसूखदार व्यापारियों की टोली की नुरा कुश्ती देख ऊपर बैठे भगवान भी देख कर अपने आप को शर्मिदा महसुस कर रिये होंगे।  भियां इस नूरा कुश्ती देख ऐसा लग रिया है कि इनकी बुद्धी घास चरने गई है।
    भियां कल घर बैठ काम कर रिया था कि अचानक जोर जोर से देश भक्ति गाने सुनाई देने लगे। तो लगा भियां मेरे देश प्रेमी भाई लोग आजादी के पर्व को मनाने के लिए बड़ी  जोरशोर से तैयारी कर रिये हैं। मगर भियां अचंभा तो तब हुआ अचानक से गीत बजते बजते एक फरमान जारी हो गया। अमुख जगह पर  झंडावंदन कार्यक्रम आयोजित किया जा रिया है। कार्यक्रम में जरूर आवे और अपनी देश भक्ति का परिचय दें। तो भियां ऐसा लगा जैसे मैं कोई आतंकवादी काॅलोनी या आतंकवादियों के शहर में रह रिया हुं। अब भियां देशभक्ति का परिचय भी देना होगा, मैं तो अपने देश को दिलों जान से प्रेम करता आ रिया हुं और करता रहूंगा। अब शहर में ऐसे कौन है जो देश द्रोह है और अपने प्यारे भारत देश से प्रेम नही कर रिया होे। और भियां मैं ये भी बता दे रिया हूँ कि यहां कोई ऐसा व्यक्ति नही है जो अपने देश ने प्रेम न करता हो। छोटे से हमारे इस झाबुआ शहर में सभी एक दुसरे से बडे प्रेम से रहते है। ये तो कुछ रसूखदार व्यापारियों की टोली हैं जो अपना उल्लु सीधा करने के लिए इस तरह के फरमान जारी कर रिये है। 
    भियां इनकी ये बात हजम नही हो रही थी कि  इस तरह के फरमान आखिर क्यों? तो भियां मैं इस बात की तह तक गया और सुत्रों से पता चला कि रसूखदार व्यापारियों की टोली नुरा कुश्ती में लगी हुई है और उन्होने छोटे  से बड़े तबके के व्यापारियों के लिए यह फरमान जारी कर दिया है जो भी हमारी टोली का सदस्य नही बन रिया है। उसे हम किसी भी प्रकार का सहयोग नही करेंगे। चाहे चोरी हो या फिर प्रशासन का डंडा। किसी भी तरह से साथ नहीं देंगे।अगर साथ चाह रिये हो तो हमारा तमगा पहनो ये तमगा है 300 रुपए का । भियां ये भी बता दुं की इस टोली ने हर व्यापारी को तमगा खरीदना अनिवार्य कर दिया। जो इसे नही लेगा वो इस टोली में शामिल नही होगा। मतलब बहिष्कार। तो पता चला भियां जो भोपू के माध्यम से रसूखदार व्यापारियों की टोली जो फरमान जारी किया था। तमगा धारको के लिए था, जिनके पास तमगा नहीं है उन्हें ये देशद्रोही बना दे रिये है।
    तो भियां ये बता दुं तुम रसूखदार व्यापारियों की टोली में कितने सदस्य है एक एक की बाल की खाल निकलने लगी। तो भियां अपने ही कपडों में सब नंगे दिखाई दोगे। अगर भियां छोटे और बडे व्यापारी एक हो गए तो तुम्हारी ईंट से ईंट बजा देंगे। छुपने की जगह तक नही मिलेगी। इनकी चुप्पी को गलत न समझों जिस दिन इनके अंदर का ज्वालामुखी फुटा उस दिन तहस नहस हो जाओगे। भियां अंधो में काना राजा की तर्ज पर अपना उल्लु सिधा न करे। भियां तुम्हारी नुरा कुश्ती में दुसरों का नुकसान क्यों करते हो। अगर  तुम्हारी टोली इतनी ईमानदार है तो गुमाश्ता कानुन का पालन करने की कभी कोशिश की या फिर उसे जानने की। 
    भियां तुम कहते हो तुम्हारी टोली समाज के लिए तरह तरह के कार्य कर रही है तो तुम गरीबों को सहयोग करों, छोटे तबके के व्यापारियों अपना व्यापार बढ़ाने में मदद करों, स्कूल बनवाओ, गरीबो को भोजन करवाओ, नगर के विकास में शासन प्रशासन की मदद करो। पर भियां मुक्ति मार्ग में जाने वालों को क्यों मजाक बना रिये। इस नश्वर शरीर को त्यागने के बाद आत्मा की परमात्मा से भेंट होती है ऐसे में लोगों के पार्थिव शरीर को बड़े सम्मान के साथ मुक्तिधाम ले जाया जाता है। लेकिन भियां तुमने तो इस सम्मान को भी मजाक बना डाला। चार कंधों पर मुक्तिधाम जाने वाली इस अंमित यात्रा में सभी लोग बड़े सम्मान के साथ शामिल होते है। राह पर चलने वाले इस यात्रा के अंतिम दर्शन कर इस संसार को छोडने वाले की आत्मा शांति के लिए प्रार्थना करते है। लेकिन भियां तुमने जो वाह वाही लुटने के लिए कारनामा किया है वो तो जाने वाले के लिए अपमान सा प्रतीत हो रिया है। मुक्तिधाम की चंद मीटर की दुरी में अब लोग दुख, संवेदना व्यक्त करने की बजाय अपने वाहनों पर ठहाके लगाते नजर आ रहे है और जो सम्मान शव यात्रा को मिलना चाहिए वो तो मिल ही नही पाता है। भियां खुद ही देख लो चार कंधो पर जाने वाली शव यात्रा को कितना गाड़ी वाली यात्रा की कितना सम्मान मिल रिया हैं।
    तो भियां मैं तो ठहरा लिखड़ बाल की खाल तो निकालूँगा ही। मगर ये जरूर कहुंगा कि ये ऊँच नीच की दिवार अपने बीच से हटा दो। कुछ ऐसा करों की सच में छोटे से बड़ा व्यक्ति तुम्हारी सराहना करें। अभिमान की चकाचोंध में अंधे न बनो। अंधो में काना राजा के पात्र मत बनो।

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