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    Friday, December 2, 2016

    नगरपालिका परिषद का कश्मीर में हनीमून, वो भी गठबंधन के 4 साल बाद !




    कही-अनकही

    कहावतें और उनका मतलब हमेशा ही सटीक होता है। नगर पालिका के चुनाव के बाद ऐसी ही कहावते अंधो में काना राजाअधजल गगरी छलकत जायेतेरा तुझको अर्पणचारों अंगुलिया घी में और सर कड़ाई में ऐसी कई कहावतें नगर पालिका परिषद पर चरितार्थ होती है। जैसे हाथी के दाँत खाने के और दिखाने के कुछ और होते है । यह कहावत परिषद् के लिए बिल्कुल सही भी है । चुनाव के बाद कमीशन की चाह में कॉग्रेसी पार्षद उपाध्यक्ष का विरोध ही नहीं कर पाए । जहां गुड़ वहां पर मक्खी । उसी तरह जब उपाध्यक्ष के चुनाव होने थे, ज्यादा मीठे गुड़ पर ऐसे लोग दिखे, सेठ की गोद में कुछ तथाकथित जा बैठे और खूब गुड़ चाटते चाटते उपाध्यक्ष को निर्विरोध जीत दिलवा दी । यही से प्रारंभ हुआ कांग्रेस और भाजपा का गठजोड़ जो कश्मीर तक पहुच गया । बेशक ये गठबंधन 4 साल पहले हुए था, जनता की उम्मीदों का मंडप था, नगरपालिका अध्यक्ष और पार्षदों के वादों के सात फेरे हुए थे, लेकिन हनीमुन अब जाकर मना वो भी कश्मीर में । 

     चौराहों की चर्चा अनुसार भाजपा और कांग्रेस का गठजोड़ कश्मीर की यात्रा पर विगत दिनों गया था। सोशल मीडिया पर भी माननीयों ने खूब तस्वीरें डाली । कई लोग तो पार्षद भी नहीं थे, लेकिन पार्षद पति होने का पूरा लाभ उठाया । ये यात्रा स्वयं के नहीं जनता के खर्च पर की गई। जब इस बात की चर्चा चौराहो पर होने लगी तो सब सफाई देने लगे हम तो खुद के खर्च पर गए थे। अरे भाई लोगो खुद के खर्च पर गए थे तो सफाई क्यों देते हो । पार्षदों कश्मीर यात्रा  की सफाई देंना इन दिनों नगर की चर्चा का विषय है । बात तो यह भी सुनने में आई है की सामान्य दिनों में जो पार्षद सस्ते टिकट के चक्कर में रिजर्वेशन डिब्बे का मुंह तक नहीं देखते, वो हवाई यात्रा कर रहे हैं । आपकी सफाई अफनी जगह पर बाबु ये पब्लिक है जो सब जानती है । उसे सब पता है की कश्मीर की बर्फ का आनंद कैसे लिया जाता है ।  अब सवाल ये उठता है कि यात्रा का पैसा कहां से आया । तो भैया नगरपालिका में कमीशनखोरी के चर्चे आम हैं,7 लाख का टेंट बिना टेंडर के 15 लाख में होने की खबरें भी अखबारों में आई  हैं । तो क्या नगरपालिका परिषद लोगों को मामू बना रही है । जनता की उम्मीदों और वादों का क्या हुआ ।

    कश्मीर का मजा लेने के बजाय नगरपालिका अध्यक्ष और पार्षद अपने वार्डों का भ्रमण ही कर लेते तो लोगों की नाराजगी कुछ हद तक कम होती और वार्डों में क्या समस्याएं हैं ये भी पता चल जाता है । हालांकि कश्मीर जैसा आनंद तो वार्ड भ्रमण में नहीं मिल पाता लेकिन आप अपने जनप्रतिनिधी होने का सच्चा धर्म निभा रहे होते । खैर अगले साल चुनाव है, जनता सब देख समझ रही है, मेरी आप सभी को शुभकामना, ऐसे ही गठजोड़ कर जनता की उम्मीदों का मजाक उड़ाते रहिए, जनता अगली बार कश्मीर तो क्या घर से बाहर निकलने लायक भी आपको नहीं छोड़ेगी ।

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