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    Saturday, December 3, 2016

    न जन,न जनाधार, भाजपा में चरण-नंदनों की जय-जयकार ।





    अंधा क्या जाने बसंत की बहार कहावत की तर्ज पर भाजपा ने अपनी कार्यकारिणी की घोषणा कर दी ।  जिस कार्यकारणी की घोषणा का भाजपा के दिग्गजों को लंबे समय से इंतजार था। उस कार्यकारणी की सूची देखते ही दिग्गजों के मंह से निकल पडा खोदा पहाड और निकली चुहियां । भैया हम तो ठहरे लिखड हमारे सामने जो सच्चाई आई उसे मोतियों में पिरों कर आपके सामने प्रस्तुत कर डाला । सच्चाई लिखते हैं और लिखते रहेगें हमें किसका भय। सोचने वाली बात है भिया भाजपा ने ऐसी कार्यकारिणी बना दी जिनके साथ न जन है और न ही उनका आधार है ।

    इसलिए लिख रहा हुं जी हां कुछ इसी तरह की चर्चा न सिर्फ चैराहे पर बल्कि जिले भर के कार्यकर्ताओं में चल रही है। दबी-छुपी जुंबां से यह बात कहा पहुंचेगी और ये बिना जनाधार वाली कार्यकारणी कहां तक पहुंचेगी ये तो आने वाला वक्त ही बतायेगा। मगर भिया सवाल तो यह है कि यह कार्यकारिणी कितनी सफल रहेगी। 

    न जन न जनाधार वाले नेता अधिकारियों और प्रशासन को अपना पद और रूतबा बताने के लिए पोस्टरवार छेड रहे है ताकि प्रशासन के कानों में यह बात पहुंच सके, कि महाशय बडे दिनों के वनवास के बाद एक बार फिर विक्रम की कृपा से भाजपा में अजय हो गए है । 

    भाजपाईयों की आम चर्चा है कि दौलत भावसार की यह अजय भाजपा ने एक बार फिर सुरेन्द्रसिंह मोटापाला की याद ताजा कर दी। जब वे जिलाध्यक्ष थे । उनके समय भी ऐसी कार्यकारिणी सामने आयी थी और भाजपा का बंटाधार हो गया था । अब इस कार्यकारिणी का देख कुछ ऐसा ही लग रहा है। अरे भाई सिर्फ विक्रम के आर्शीवाद से कुछ नही होता,अपनी स्वयं की भी कुछ साख होनी चाहिए। सिर्फ चरण वंदना से कुछ नही होता। 

    सपना रह गई जिला महामंत्री की कुर्सी 

    पोस्टर वार करने वाले महाशय लम्बे समय से जिला महामंत्री बनने के सपने देख रहे थे। इन्होनें मोटापाला की कार्यकारिणी में भी काफी दम लगाया और अपने झाबुआई आकाओं की मदद से जिला महामंत्री बनने का पुरा प्रयास किया था लेकिन वहां भी इस बार की तरह इनकी दाल नही गली। एक बार फिर मौसम बदल गया और महाशय को भाजपा से लम्बी दूर फेंक दिया। 
    एक बार फिर मौसम को अनुकुल देख कर बताते है महाशय में मन में जिलाध्यक्ष बनने के ख्वाब बनने लगे लेकिन जब ये ख्वाब पूरे नही हुए तो एक बार फिर जिला कार्यकारिणी में महामंत्री बनने के लिए धार से लेकर भोपाली आकाओं को अपनी कागजी कुर्बानी से प्रभावित करने का प्रयास भी किया लेकिन सारी कोशिशें नाकाम हो गई ।

    भाई लोगों प्रकृति में भी परिवर्तन होने लगा है अब मौसम भी एक सा नही है। विक्रम बेताल की तरह नई नई कहानियां बनाकर सुनाई गई और विक्रम इन नई नई कहानियों से इतना प्रभावित हुआ कि भाजपा कार्यकारिणी को अजय होने का वरदान दे दिया गया। अब न तो भाजपा और न ही कार्यकर्ताओं को ये वरदान हजम नही हो पा रहा है। सूत्रो की माने तो इस वरदान के बाद भाजपा का माहौल इतना गर्माया हुआ है कि आने वाली दीपावली तक ये लावा बन कर ज्वालामुखी के रूप में भाजपा में इस प्रकार विस्फोट करेगा कि  इसकी लपटे भोपाली भाजपा को भी प्रभावित करेगी हालांकि इसके लिए अभी इंतजार है लेकिन वर्तमान में जिले के भाजपा को जहां अजय भाजपा हजम नहीं हो रही। वही राजा विक्रम के वरदान देने वाली गोपनियता सामने आने के बाद विक्रम के इस अंध भक्ति से दिये गये वरदान की परते भी खंगालना प्रारंभ हो चुकी है। अब देखिए आने वाले दिनों मे इस अजय भाजपा से जिले को क्या क्या मिलने वाला है। 

    कहते हैं ना कि दुल्हन वहीं जो पिया मन भाये, हम कहते हैं कि नेता वही जो जन-जन को भाये, बिना जनाधार के नेताओं का क्या वजूद । ये पदाधिकारी तो बन गए लेकिन जिम्मेदारी कैसे उठाएंगे, यही सवाल आमजन के मन में उठ रहा है । आगे और भी कई बातें हैं  जिसे आप कहीं-अनकहीं की आने वाली कडियों में पढ़ेंगे,  जिसमें होंगी जनता के मन की बात और कई खुलासे ।

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