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    Wednesday, December 14, 2016

    हेलो साहब मैं भुरा बोल रिया हुं........... मेरी पोती कब अपहरणकर्ता के चंगुल से छुटेगी



    भियां 14 वर्ष की नाबालिग बच्ची के अपहरण होने पर बच्ची के मां बाप और दादा को आज न्याय के लिए दर-दर भटकना पड रहा है। 6 माह पूर्व मासुम बालिका का अपहरण हो जाता है और भ्रष्ट तंत्र मासुम की अस्मत पर नोटो का खेल खेल रहे है। रोते विलाप करते परिजनों ने पिटोल चैकी पर भी मामला दर्ज करवाया लेकिन भियां पुलिस को मासुम पर जरा भी दया नही आई नोटो के सामने नतमस्तक होकर बिना परिजनों को बुलाए झुठे बयानों की रिपोर्ट बना डाली। फिर भी मासुम के दादा ने हार नही मानी। 
    हेलो साहब में भूरा बोल रहा हुं, मेरी पोती कब अपहरणकर्ताओं के चंगुल से कब बचेगी। इस तरह के फोन मासुम के दादा ने उपर से लेकर नीचे तक शिकायत की। सीएम, आईजी, डीआईजी, कलेक्टर, एसपी, एसडीओपी सभी शिकायती आवेदन दिए लेकिन सभी जगह उसे निराशा ही हासिल हुई। मासुम का किसी को खयाल तक नही आया। 
    अब भियां कलेक्टर साहब, सरपंचों को फोन लगाकर के रिये है है कि हैलो सरपंच साहब में कलेक्टर बोल रहा हुं, आपके गांव में क्या समस्या है तो साहब ऐसे सरपंचों से क्या समस्याओं के बारे में पूछ रहे हो जिन पर धारा 40 भी लग चुकी है। पूर्व कलेक्टर चंद्रशेखर बोरकर ने सपरंचों द्वारा किए जा रहे भ्रष्टाचार को लेकर कईयों पर मामले दर्ज करवाए थे। ऐसे में साहब सरपंचों से बात करने की बजाय ग्रामीणों से चर्चा करे आखिर उन्हे क्या समस्या है। साहब आपकी जनसुनवाई में भूरा का शिकायती आवेदन 4 माह से पडा है, उस पर ही जरा निराकरण कर लो। ताकि मासुम के परिजनों को दर-दर भटकना न पडे। साहब धरातल पर एक बार निकल कर देखिए तब पता चलेगा कि कितनी मासुम की अस्मतों से भ्रष्ट तंत्र द्वारा नोटो का खेल खेला जा रहा है। 
    14 साल की मासुम पोती की तलाश में दादा कहां नही गया। भियां भूरा ने अपनी पोती के लिए हाथ जोडकर पुलिस कप्तान कार्यालय में शिकायती आवेदन दिया था। मगर वहां भी कुछ नही मिला। नोटो के सामने नतमस्तक पिटोल पुलिस ने पुलिस कप्तान की आंखों में भी धुल झोंक डाली। पुलिस कप्तान जी अगर वो लडकी बालिग भी होती तो उसे एक बार परिजनों के सामने तो लाया जाता, घटना के दिन ही परिजनों द्वारा पिटोल पुलिस चैकी में शिकायत की थी। क्या गरीब की जोरू सबकी भाभी की तर्ज पर पुलिस काम करती है। 
    भियां परिजनों ने शिकायत करते वक्त आरोपियों के नाम भी बताया था और जिस जगह पर नाबालिग थी वो जगह भी लेकिन चैकी प्रभारी ने कुछ नही किया। 
    भियां जो गलत है वो गलत है मेरा काम है सच्चाई को सामने लाना। पर मेरे मन मे कुछ सवाल  आ रिये है। भियां क्या नोटों के लिए मासुम की जान से खेला जा सकता है? भियां अगर भूरा की जगह भ्रष्ट तंत्र की बहु, बेटी होती तो क्या? 
    भियां ये भी बता दुं उपर वाले की लाठी में आवाज नही होती है। मैं बता दे रिया हुं लोगों को रूलाने की बजाय उनके आंसु पोछो कितनी खुशी मिलती है। एक बार आजमा के देखों। एक बार इस मामले पर गौर करों की अगर परिजनों को रूपए ही लेने होते तो वो शिकायत करने दर दर नही भटकता। रूपए वाला मामला तो पंचायत में ही निपट जाता। तो भियां अब में जा रिया हुं जय भारत, जय हिन्द। 

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