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    Sunday, December 4, 2016

    पोस्टर छाप नेता करने लगे अटल जी की बराबरी


    कही-अनकही

    '' जननी-जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी’ अर्थात् जननी (माता) और जन्मभूमि का स्थान स्वर्ग से भी श्रेष्ठ एवं महान है । हमारे वेद पुराण तथा धर्मग्रंथ सदियों से दोनों की महिमा का बखान करते रहे हैं ।
    आम मान्यता है कि माता का प्यार, दुलार व वात्सल्य अतुलनीय है। इसी प्रकार जन्मभूमि की महत्ता हमारे समस्त भौतिक सुखों से कहीं अधिक है । लेकिन भौतिक सुखों के खातिर पोस्टर छाप नेता जननी जिसने की कठोर तपस्या से भाजपा को सींचा है उसी काे गुमराह कर पोस्टर छाप नेता बन  सरकारी दफ्तरों के दरवाजे खटखटाते और अवैध वसूली का गोरख धंधा करते है यह कितना सच है हम नही जानते लेकिन पान की दुकान पर तो ऐसी चर्चा गरमा गरम है। 
    लो भियां अब आ गिया मुख्य बिंदु पर प्रकाश डालने पर उसके पहले भियां ये बता दू। कलम किसी की मोहताज नहीं होती । तो एक बात बता दू जो काम में कर रिया होता हूं बो पूरा कर के ही छोड़ता हु। अब जिम्मा उठा लिया है भियां तो जननी के नाम का इन पोस्टर छाप नेताओ का काला चेहरा जनता के सामने  लाकर ही रहेगे। अब भियां घुमा फिरा कर नहीं सीधे मुद्दे पर आता हूं...............।
    ....... अटल बिहारी वाजपेयी जी भाजपा के नहीं बल्कि पूरे देश के सम्मानीय नेता है। उनके जैसा नेता न हुआ है और न ही होगा। उनकी महिमा का जितना बखान किया जाये वो भी कम होगा.........।
    लेकिन भियां इन दिनों कुछ पोस्टर छाप नेता चिंदिचोरों को टुकड़े डाल अपने आप को आलेखों के माध्यम से अटल जी के समकक्ष स्थापित करने का प्रयास कर रहे है और यह दर्शा ने का प्रयास का रिये है कि बदनावर की भाजपा को इन्होंने अपने खून से सींचा है....।
    भियां लेकिन आलेख छापने वाले को ये भी पता नी रिया कि जिसका महिमा मंडन कर अटल जी से जो तुलना कर रिया है उस बदनावर से अटल जी का कुछ लेना देना ही नहीं है। बल्कि उनका लेनादेना बड़नगर से है।
    भियां रोज चौराहे पर अंदर की खबर रखने वाले इस आलेख  के बुद्धिमान लेखक और पोस्टर छाप नेता की अक्ल पर चटकारे लेकर मजे ले रहे है। विक्रम कृपा से सिंचित पोस्टर छाप नेता इन दिनों पद प्राप्ति के साथ ही अपने आप को भियां अटलजी की गिनती में खड़ा करना चाहते है। भियां ये सब इस लिए कर रिये हैं कि भाजपा के आम से लेकर ख़ास कार्यकर्ता न उसे शिर्फ़ सम्मान दे बल्कि उसे पार्टी का कर्णधार माने।
    भियां आखिर हमें भी बताओ क्या हुआ उन तीन लाख का
    विक्रम बेताल की कहानियों की तरह इन दिनों लोकसभा के उपचुनाव की यादें भी लोगो के जहन में ताजा हो गई। भियां चौराहो के सूत्र बताते हैं इसी उपचुनाव में एक वरिष्ठ पदाधिकारी के  इशारे पर उपचुनाव में पानी के तरह पैसा बहा रही भाजपा ने इन पोस्टर छाप को दबाव प्रभाव लगा कर 3 लाख रुपए दिलवाये थे ताकि भाजपा को विजय प्राप्ति हो सके । लेकिन पोस्टर छाप नेता 3 लाख रुपए चुनाव के नाम पर हजम कर गए। वरिष्ठों का इशारा होने के कारण किसी भी नेता में इतना साहस नहीं था कि वे पोस्टर छाप नेता की पूरी पड़ताल इशारा करने वाले को बता सके और इस ही का फायदा उठाते हुवे उन 3 लाख रुपयों का हिसाब तक नहीं दिया।  भियां अगर खर्च भी किये है तो ये पोस्टर छाप नेता अपनी जिम्मेदारी क्यों नहीं निभा सके।  अब जब की विक्रम बेताल की ये कहानियां चौराहे पर चर्चा बनी हुई है तो कई राज की परतें प्याज के छिलके की तरह उतर रही है। अब दिखना ये है कि आने वाले दिनों में और किन किन राजों से पर्दा उठता है।
    भियां एक बात और जब से कार्यकारणी बनी है। तब से दो गुटों में बट री है। दोनों गुट पोस्टर छाप नेता है भियां। एक चंदाखोर तो दूसरा सप्लायर। कोण किसकी गोद में जा बैठा है ये नगर तो क्या पुरे जिले के चौराहो की चर्चा का विषय बना हुआ है। अब दोनों गुटों में सरकारी दफ्तरों में उगाही करने की होड़ लगी है। अब अधिकारी ही अपनी आपबीती सुनाएंगे।
    तो भियां आज के लिए बस इतना ही। जाइयेगा नहीं पिक्चर अभी बाकि है मेरे दोस्त.......। भियां अभी तो बस ट्रेलर था कार्यकारणी , सप्लायरों और पोस्टरछाप नेताओ की कही-अनकही।  तो भियां पढ़ना न भूले कही-अनकही…….........................।

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