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    Monday, December 5, 2016

    गुलाबी भवन की प्रेम कहानी




    तू प्यार है किसी और का तुझे चाहता कोई और है तू पसन्द है किसी और की तुझे मांगता कोई और है। भियां ये तो बड़ा प्यारा गीत है जो गुलाबी भवन के एक वरिष्ठ अधिकारी और  गामड़ साहब इन दिनों गुनगुना रहे है। भियां में बता रिया हूं कि वो कहावत है न एक गोबी के फूल और दो मालियों में काफी नूराकुश्ती चल रह है।
    भियां गुलाबी भवन में पदस्थ गामड़ साहब के चर्चे इन दिनों काफी सुर्खियों में है। भियां साहब को बड़ा गुस्सा आता है और ये अपने आप को गुलाबी भवन के निर्माता को सर्वेसर्वा समझ रिये है। मगर भियां उन्हें ये नहीं  पता की जिस गुलाबी भवन की जरा सी कोठारी में साहब नोकरशाह है। वो आम जनता की गाढ़ी कमाई से बनी है भियां उनकी पुश्तेनी जायदात नहीं है। भियां गामड़ साहब तो गामड़ साहब ही है। 
    भियां चर्चा साहब के कारनामो की बता रिया हूं।
    ....….......भियां साहब के कारनामो की चर्चा गुलाबी भवन नहीं बल्कि मेघनगर, राणापुर और झाबुआ में भी कर रिये हैं। में बता रिया हु की साहब को बड़ी देर तक मोबाईल के लंबी देर की बाते की किया करते है और इस लंबी देर की बातों का हर्जाना मताहातो को भरना पड़ता है।  मताहातो का कहना कि साहब रात हो या दिन सुबह हो या शाम कभी भी अपने अधीनस्थों को फ़ोन कर नंबर दे दिया करते है और साफ कहते है ज़रा अर्जेन्ट है रिचार्ज करवा देना।
    भियां.....साहब के इस हर्जाने के शिकार 4 से 5 होते ही है। अब साहब तो साहब है। अगर मताहत साहब का आदेश का उल्लघन करें तो साहब की नजर टेढ़ी और मताहत का राशन पानी बंद इस कारण भियां बेचारे दबी जुबान साहब के आदेशों को सर आँखों पर रख रात बेरात बेलेन्स डलवाने के चक्कर में दौड़ते रहते हैं.........।
    साहब को खबर नवीस पर गुस्सा क्यों आया
    भियां ..... साहब को हरियाली अमावस्या एक खबर नवीश पर क्रोध उमड़ पड़ा। भियां खबर नवीश ने साहब की दुखती रग पर हाथ रख दिया था। क्योंकि भियां साहब का कार्यालय दुधारू गाय है। 
    ...... और भियां यहाँ बड़ी संख्या मे ग्रामीणों का आना जाना लगा रहता है। जब तक ग्रामीणों का दूध नहीं निकल जाता।  तब तक ईमानदार गामड़ साहब के कार्यालय से नहीं होता और इस ही दूध देने वाले ग्रामीण की शिकायत  खबर नवीश ने एक दिन पहले बड़े साहब को बताया। मगर भियां राम कृपा कुछ ऐसी हुई की गामड़ साहब की हितैषी महिला को फटकार लगा दी। तो भियां राम कृपा ये रही की गामड़ साहब पसंद नहीं आया और वे मन ही मन जल भून गए।
    दूसरे दिन जब हरियाली अमावस्या थी को खबर नवीश ने देखा की यहाँ भीड़ क्यों लग रही है। तो भियां उसे पता चला कि इन दूध देने वाले ग्रामीणों से जमकर छोटे से लेकर बड़े तक का खून चूस रहे है।
    ......... गामड़ साहब की नजर जैसे ही खबर नवीश पर पड़ी गामड़ साहब दूध दुहने पर विराम लगता दिखाई दिया और महिला कर्मी को लगी फटकार का कर्ज भी चुकाने का वक्त दिखाई दिया और शुरू हो गए मेरे कार्यालय में क्या कर रहे हो साहब का गुस्सा सातवे आसमान पर  पहुच गया हलाकि खबर नवीश ने भी गामड़ साहब को दिन में तारे दिखाते हुवे कहा सरकार का कार्यालय है भियां आपका पैतृक निवास नहीं। तो गामड़ साहब को कुछ समझ में आया। सूत्रों की माने तो साहब को कल से खुमार चढ़ रहा था कि आखिर महिला कर्मी की शिकायत करने की हिम्मत कैसे हुई। भियां गामड़ साहब हम यहाँ बता दे की पोल खोल प्रारंभ की तो मेघनगर, थांदला, झाबुआ और राणापुर में जो आपने किया है वो सब निकलना प्रारंभ हो गया तो गुस्से के साथ और भी बहुत कुछ निकल सकता है। 
    भियां गामड़ साहब आप को यह बात समझ में नहीं आ सकती। सूत्रों की माने तो महिला कर्मी को लगी फटकार साहब को रास नहीं आई और कही बड़े साहब से एक बार फिर फटकार न लग जाये। सूत्र बताते है महिला कर्मी कर बड़े और छोटे साहब बहुत मेहरबान है। मेडम को साहब का वाहन उस के निवास से लाता लेजाता है। भियां महिला कर्मी सरकारी नहीं टेम्प्रेरी को नोकरी करती है लेकिन बड़े और छोटे साहब एक फूल दो माली की तरह महिला कर्मी की हिफाजत करते है। इस लिए भियां कहता हूं नम सो तो जम सो । अकड़ सो तो रखड़ सो।

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