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    Thursday, December 15, 2016

    विजय माल्या की तर्ज पर कागजी गरबा आयोजक लगाएगा प्रशासन और पॉलिटिक्स को चुना




    लो..........भियां मै फिर आ गया कुछ कही-अनकही बातें ले कर.. . .   भियां कहते है ना.........  रेत पर बने घर कभी भी ढह सकते है.....  तो मैं बता रिया हुं कि  इन दिनो जिले मे एक गरबा महोत्सव का  आयोजक कागजी दुनिया में  प्रदेश ही नही...... बल्कि अंतराष्ट्रीय गरबा महोत्सव बताने के लिए वे सब प्रयास कर रिया है जो नामुमकिन  है.....
    भियां पैसो के बल पर विजय माल्या ने जो कारगुज़ारी की  और फिर बैंको  को चूना लगा कर भारत से भाग खडा हुआ.....  हलांकि इस आयोजन के आयोजनकर्ता कब विजय माल्या  बनेगे यह तो नही कहा जा सकता लेकिन रेत की ढ़ेलो की तरह सपनीली दुनिया मे बना रिया ये प्रदेश  स्तरीय गरबा मण्डल न तो जन सहयोग से चल रिया है और ना ही आस्था या श्रद्धा से चलता आ रिया है। 
    ..... भियां ये कार्यक्रम पैसे के बल पर इसलिए चलाया जा रिया है, ताकि प्रशासन और राजनिती को प्रभावित ठिक उसी तरह से प्रभावित किया जा सके जैसे विजय माल्या अपने नये साल के कलेण्डर की लालच दिखा कर रिया था। 

    सब टेकते है माथा यहां पर 
    भियां आप सभी को मालुम हो रिया होगा कि भारत से बैंकों  को चूना लगा कर फरार हो लिया..... विजय मल्या भी आम से लेकर खास तक को इसी प्रकार से  स्वपनिली दुनिया के सेर करवाता और इसी कारण से बैक वालो से लेकर राजनेता और प्रशासन के अधिकारी उसके यहां पर डेरी पर माथा रगडते नजर आ रिये है।
    भियां इसी तर्ज पर इस जिले के इस गरबा मण्डल मे भी क्या भाजपा, क्या कांग्रेस, क्या कलेक्टर, क्या प्रषासन के अदने से लेकर बडा अधिकारी सब के सब इस दरबार मे या तो स्वेच्छा से या फिर हरहरी दुनिया बसाने के चक्कर मे माथा टेकते नजर आ रिये है।  प्रशासन और राजनिती से बनी यही नजदिकीयां आयोजनकर्ता के लिए ठिक वैसी ही फायदे मंद नजर आ री है। जैसी की विजय मल्या को चूना लगाने के लिए आवश्यकता  थी। यहां पर आने वाला हर वह व्यक्ति आयोजनकर्ता की इस स्वप्नीली  दुनिया से इस तरह से प्रभावित होता रिये  है कि वह आयोजनकर्ता के हर काम को हरीयाली की दुनिया से निहारते नजर आ रिये हैं..... 
    दल्ले देगे प्रमाण पत्र 
    सही बात बता रिया हुं भियां जिले ही नही बल्कि इस आयोजन को कागजी प्रदेश स्तरीय बताने के लिए अयोजनकर्ता ओर उसके आस पास पहरेदारी करने वाले दल्ले नुमा विभीषणों ने आयोजन के पूर्व एक बैठक का आयोजन कर प्रदेश स्तरीय आयोजन के लिए मीडिया के लिए भी सीमा रेखा तय की।  कौन किस प्रकार से कवरेज करेगा और पूरे नौ दिन तक उसकी माॅनिटरगी आयेाजनकर्ता के दल्ले करेगे। उनके सर्टीफिकेट के बाद तय किया जायेगा की कागजी दुनिया मे किसने इस आयोजन को जादू की छड़ी से आगे बढाने का प्रयास किया है। उसी पर आयोजन कर्ता की कृपा बरसेगी नही तो वह आयोजनकर्ता की कृपा से वंचित रह  जायेगा। 
    भियां अब मैं चलता हुं पर एक बात आयोजनकर्ता को और बता रिया हुं कि भियां नोटो की हरियाली, सोने चांदी के लालच में और नृतगनियों का नाच देखने तो कोई भी आते जाते होंगे..... माता रानी की सच्ची श्रद्धा और भक्ति उसी में है जहां बिना लालच के माता रानी की भक्ति में लीन हो  जाए वह ही सच्ची भक्ति है। 
                          जय माता दी।

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