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    Thursday, December 15, 2016

    दाहोद के फाईनेंसर ने किस्त नही भरने पर चमकाया जिले के विजय माल्या को



    भियां दसेरे का राम राम........   वैसे तो मेरा कुछ नही जा रिया  की कोई पाप कर रिया या पूण्य....लेकिन  इस पाप और पुण्य के चक्कर मे बेचारे भक्तो का शोषण करे तो मैं चुप नही रह सकता....... तो भिया एक विजय माल्या तो बैको को चुना लगा कर भगा गया........झाबुआ जिले मे भी विजय मल्या है वो भागा नही.....  मगर  अंदर ही अंदर खोखला हो गया लेकिन भियां इस विजय माल्या की दाद देनी पडेगी की मुछ पर चावला लगा कर बासमती खाने का अहसास दिलाने मे कोई कसर नही छोड रिया।

    भिया अब मैं आता हॅू असली बात पर....... झाबुआ जिले का यह विजय माल्या भी गरबों को आयोजन कर माता रानी की भक्ति करने के लिए बहार से नाचने वालो को बुलाता और इन नचाते वालो को दिखाने के लिए कभी कांतीलाल को बुलाता... तो कभी चुन्नु भैया की मालीस  करता.... तो कभी शैलेष को चूना लगा रिया है...... भिया बात अजब पर गजब है।
    .... ये विजय मल्या महज कलावती बेन से डरता है और कलावती बेन की जड मे मठठा डालने का पूरा प्रयास भी कर रिया।। लेकिन कलावती बेन भी कम नही इस फर्जी विजय माल्या का नस को जानती है...... इस कारण भियां बेन पर इस फर्जी तुलवाटी माल्या का दाव नही चल रिया है। 
    भिया मैं ऐसे ही नही कह रिया कि गरबा की आड़ मे स्वहित आयोजन क्यों? तो अंदर की बात बताते है.... विगत दिनों दाहोद गुजरात के एक फायनेंसर बता रिया था कि किस्त समय पर जमा नही होने के कारण फर्जी विजय मल्या की जबरदस्त लू उतारी......... इतना नही बल्कि उक्त फायनेंसर ने इस विजय माल्य को अपने दरबार मे तलब किया और गुजराती भाषा मे इस तरह से समझा दिया कि दो दिन में किस्त का इंतजाम नही होगा......तो परिणाम ठिक नही होगा........ फायनेंसर की इस धमकी ने फर्जी माल्या को जमीनी हकीकत बता दी....क्योकि की बैक को चूना लाया जा सकता हैं.....निजी फायनेंसर को नही.......इसके बाद माल्या ने सेटीग कर बडी मिन्नतों के साथ फायनेंसर को समझाया और मामला कुछ दिनो के लिए ठंडा किया। 
    बात खरी औैर सटीक है भियां.......विजय माल्या ने इस बार का आयोजन अपने ही नगर के गरबा मंडलो को समाप्त करने के लिए किया था..... मगर वो कहावत है ना माता रानी का कृपा और कोप का निषाना कौन कब बन जाय पता नही........ विजय माल्या ने पत्रकारो से पर्दे के पिछे रह कर आयोजन का बहिष्कार भी करवाया......लेकिन यहां पर माल्य का दाल नही गली.... बल्कि इस आयोजन से यह साफ हो गया कि..... पैसे से ज्यादा माता का विष्वास भारी पडता हैं और जिस गरबा मण्डल का बहिष्कार किया जा रहा था...... वहां जिले भर के अतिथि मां ता कृपा पाने पहुचे...... बल्कि विजय मल्या की यहां पहुचने वाले अतिथी या तो चंदे के चक्कर मे या फिर माल्या को चुतिया बनाने के चक्कर मे पहुचे थे.... अब भिया आगे और भी है कौन सी बैक को कितने का चूना लगेगा और कैसे लगेगा.........सब समय के साथ आपके सामने लाता रहुंगा.... अभी तो मैं भी जा रिया हुं...... रात को जागरण थी......अब नींद निकालुंगा..... ताकि मुझे भी सपने मे विजय माल्य की स्वनीली दुनिया थोडी देर के लिये खुस  कर सके.......
    तो भियां जय रामजी की।

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