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    Saturday, January 28, 2017

    रानापुर में पार्षद के पावर और तहसीदार के ड्रायवर के तेवर ने संजय को किया बेघर

    चाय से ज्यादा केटली गर्म कहावत तो सब ने सुनी लेकिन ये कहावत रानापुर क्षेत्र के वो पार्षद और तहसीलदार के ड्रायवर पर चरितार्थ हो  रही है, जिन्होंने  अपने राजनीतिक और  प्रशाषनिक रूतबे से  पुलिस के घुटने पीडित पक्ष की ओर झुकने की बजाय अपनी और झुका लिए । परिणाम यह हुआ की संजय के भाई को 151 के तहत थाने में बंद कर दिए जाने पर जमानत करवानी पडी। 

    इस झुठे मामले से बचने के लिए संजय ने पुलिस अधीक्षक की जनसुनवाई से लेकर जहां उसे न्याय मिले वहां भटकता रहा लेकिन उसे न्याय नही मिला। राजनितीक दबाव और तहसीलदार की धौंस से पुलिस भी उनके सामने नतमस्तक हो गई और संजय के खिलाफ झुठी रिपोर्ट दर्ज कर ली गई। पंद्रह दिनों तक संजय इधर उधर भटकता रहा लेकिन चाय से ज्यादा केटली गर्म पार्षद और तहसीलदार के ड्रायवर ने संजय के नही मिलने पर उसके भाई को निशाना बनाया और उसे गिरफतार करवाया।
     

    महीलाकर्मी पर ड्रायवर मेहरबान

    रानापुर की ब्लाॅक काॅलोनी में सरकारी क्वाटर में नगर पालिका के कम्रचारी नियमों को तांक में रख निवास कर पुरी काॅलोनी में अपना रोब झाड रहे है। इस ही काॅलोनी में संजय भी अपनी मां के साथ यहीं निवास कर रहा था। लेकिन नगर पालिका की महिला कर्मचारियों को संजय और उसके परिवार का रहना नागवार था। इसी को लेकर महिला होने का फायदा उठाते हुए नगर पालिका कर्मचारी संजय के परिवार के साथ आए दिन विवाद करती रहती है। बताते है कि नगर पालिका महिला कर्मचारियों का पहचान वाला एक तो पार्षद है तो दुसरा तहसीलदार का ड्रायवर। 
    अब होना क्या था राजनिती और प्रशासन दोनों इनकी मुटठी में। तहसीलदार के ड्रायवर ने तहसीलदार साहब को कानों में कुछ ऐसा कहा कि साहब ने सुनते ही अपना रूतबा झाड दिया और जैसे ही संजय द्वारा दिए गए आवेदन के बारे में पता चला। तो रातोरात सुनियोजित तरीके से बागड में आग लगा दी गई और पुरा मामला संजय के माथे मढ दिया। तहसीलदार के ड्रायवर और पार्षद ने अपना प्रशासनिक और नेतागिरी को पुर जोर लगा दिया। अब होना क्या था पुलिस ने कार्रवाई करते हुए संजय के भाई को थाने में बंद कर दिया और 151 के तहत जेल जाने की नौबत ला दी। 151 के तहत पलक झपकते ही जमानत हो जाती है लेकिन संजय को अपने भाई की जमानत करवाने में पसीने आ गए। प्रशासनिक रूतबें में अंधे हुए तहसीदार साहब ने संजय की भी जमानत न हो इसके लिए पुरजोर लगा दिया लेकिन अनुविभागीय अधिकारी ने तहसीलदार साहब की एक न सुनी और नियमानुसार संजय को जमानत दे दी। 
    आखिर खाली हो गया मकान 
    जिस मकान को खाली करवाने के लिए पार्षद  और तहसीलदार का ड्रायवर ने सपना देखा था आखिर वह पुरा हो गया। बार बार पुलिस की कार्रवाई, लडाई झगडे से बचने और कहीं दुसरा केस न हो उससे बचने के लिए संजय ने मजबुर मकान खाली कर दिया। आखिरकार ये साबित हो गया। प्रशासन पीडित का नही प्रताडित करने वालों के पक्ष में झुकता है। 

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