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    Sunday, January 29, 2017

    आदिवासियो को क्यो अपमानित कर रहे है भावसार....../ एससी/एसटी ’एक्ट’ ’1989’ तहत करवाई जाएगी एफआईआर



     झाबुआ जिला  आदिवासी बाहुल्य जिला है जहां 90 प्रतिशत आदिवासी समाज यानी मुलमालिक की जनसँख्या है। लेकिन फिर भी भाजपा जिलाध्यक्ष आदिवासियों का अपमान पर अपमान किए जा रहे । जिसका जय आदिवासी युवा संगठन पुरजोर विरोध करती है। जयस प्रभारी महेश  भाबर ने बताया कि जब से आदिवासी समाज में आदिवासी संगठनों ने (जेसे जयस)के द्वारा समाज में गरीब-पिछड़े बेसहारा व्यक्तियों की आवाज उठाते हुए संवैधानिक अधिकारों के लिए एकजुट होकर आवाज उठानें लगे तब से अमानवतवादी असामाजिक तत्व की विचारधारा के  लोग जेसे दौलत भावसार (जिला अध्यक्ष बीजेपी झाबुआ) ने पहले आदिवासियों को नक्सलवादी कहकर अपमानित किया और संगठनों को विभीषण कहा और अब आदिवासियों को नक्सलवादी मानते हुए आदिवासी है तो आदिवासी रहो कहते हुए जाति सूचक शब्दों से शर्मसार कर दिया !  पहले भी भावसार द्वारा आदिवासियों को नक्लवादी कह कर अपमानित किया था। जिला जयस द्वारा पुरजोर विरोध किया था। अगर भाजपा आदिवासियों की हितैशी नही है तो आदिवासियों के नाम पर राजनिती क्यों करती है। बार बार आदिवासियों को भाजपा जिलाध्यक्ष क्यों अपमानित कर रहे है। इस अपमान की प्रदेष स्तर तक षिकायत हो चुकी है। क्या भाजपा प्रदेष संगठन ने आदिवासियों को अपमानित करने के लिए दौलत भावसार को भाजपा जिलाध्यक्ष बनाया है। अगर भावसार इसी ही तरह आदिवासियों का अपमान करता रहा तो जयस उग्र आंदोलन करेगा। इस प्रकार की हरकतों से भाजपा जिलाध्यक्ष अपने आप को क्या साबित करना चाह रहे है । 
     जिले में संवैधानिक हक एवं अधिकारों की 5 वीं अनुसूची लागु है , पैसा एक्ट 1996 लागू है ! जिसके तहत गैर-आदिवासी द्वारा प्रतिबंधित क्षेत्रों में  किसी भी गतिविधियों और इस प्रकार के बयानबाजी करना पूर्णतः प्रतिबंधित है।

    ये गैर-आदिवासी समाज के व्यक्ति इस संवैधानिक कानूनों को नकारते हुए इस प्रकार के मनघड़त बयानबाजी से बाज क्यों नहीं आ रहे । इनको शर्म आनी चाहिए की मै जनता का प्रतिनिधि हूँ और मुझे इस प्रकार के शब्दों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। इसलिए आपको इस प्रकार की बातें शोभा नहीं देती ! 
    जयस इस बयानबाजी को लेकर आंदोलन करने के साथ साथ भावसार के  स्थिफे की मांग करेगी। इस प्रकार के बयान पहले भी दे चुके है ! हम ऐसे बोलने बेतुके बयान देनें  वाले व्यक्ति को जनता का प्रतिनिधि क्यों मानें और क्यों बनायें ! 
    ऐसे बयान बाजी देनें वालों और आदिवासी समाज को अपमानित करनें वालों के खिलाफ आदिवासी समाज के तमाम संगठनों के माध्यम से  ’अनुसूचित जाति,जनजाति’ ’एक्ट’ ’1989’  के तहत एफआईआर दर्ज करवानें की मांग करेंगे। उक्त जानकारी जय आदिवासी युवाषिक्त प्रभारी महेष भाबर ने दी। 

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