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    Thursday, February 2, 2017

    40 हजार में आंगवाडी कार्यकर्ता की नियुक्ती.................. / पत्र बना बाजार में चर्चा की विषय


    कही-अनकही 
    भियां सबकों मेरा नमस्कार........... सब कैसा क्या चल रिया है, सब ठिक ठाक तो है ना....... मगर भियां हमारें यहां सब ठिक ठाक नही चल रिया है... बस राम नाम जपना पराया माल अपना चल रिया है... आप सोच रिये होंगे..... क्या बकवास कर रिया है.... तो मैं आता हुुं मुददे पर.... भियां महिला बाल विकास विभाग द्वारा आंगवाडी में  कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं की भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए..... जिसमें पात्रों अपात्रों दोनों ने इस पद को पाने के लिए आवेदन कर किये..... लेकिन भियां नौकरी तो उसे ही मिल री थी जो पात्र थी......।
    मगर भियां अपात्र प्रार्थी अचानक कैसे पात्र हो गई ये समझ में नही आ रिया है.... इस बात को समझने के लिए भियां मैं रानापुर और झाबुआ की कई प्रार्थियों मिलता रिया... वो बता रिये थे की साहब और मेडम (परियोजना अधिकारी) हमसे 40 हजार रूपए मांग रिये है, जो 40 हजार रूपए दे रिये है..... उसे साहब और मेडम दोनों तत्काल नियुक्ति दे रिये.... चाहे वो अपात्र क्यों न हो.... और अगर कोई रूपए देने में असक्ष हो रिया होता है तो दुसरे से साठगांठ कर दावे आपत्तीयां लगवा रिये है....।
    भियां सब सेटिंग हो जाने के बाद..... साहब और मेडम ने दावे आपत्तीयों के लिए सबकों मंगलवार 31 तारीख को 11 बजे सब को पत्र भेज बुला डाला... लेकिन उनकी दावे आप्पतीयां सुनने वाला कोई नी रिया..... भियां 3 बजे तक महिलाएं भूखी प्यासी जिला पंचायत कार्यालय के सामने बैठी री...। काफी देर बाद अधिकारी और दावे आपत्तीयां सुनने वाली टीम भी आ गई। जिला पंचायत सीईओ, महिला बाल विकास अधिकारी, परियोजना अधिकारी और अन्य कर्मचारियों से जब इस परेशानी एवं बात के लिए संपर्क साधा तो कोई कुछ कहने को तैयार नही हो रिया था....।
    भियां एक बात दिल से के रिया हुं की जब दावे आपत्ती सुनने वाली टीम को देखा तो ऐसा लग रिया था कि अब तो प्रार्थियों को न्याय मिलेगा.... लेकिन भियां उस टीम ने भी देख के अनदेखा कर दिया....। भियां टीम के प्रभारी के केबिन में सब दावे आपत्तीयां सुनी गई.... और इन दावे आपत्तीयों से भी साफ हो रिया था कि जो हो रिया है वो गलत हो रिया है लेकिन फिर भी वो सही हो गिया। भियां टीम के कप्तान ने एक बार प्रार्थी और अधिकारी से ये भी किया... भगवान से तो डरों, इतनी गलतियों कैसे, इतनी अनियमित्ता मैं देख रहा हुं, पुरे आवेदनों को में निरस्त करवा दुंगा...। ऐसी बात सुन ऐसा लग रिया था कि न्यायकर्ता सही न्याय करेगा... मैं ये भूल गिया था कानुन की आंखों पर भी पटटी बंधी है....।
    अब क्या था राम नाम जपना पराया माल अपना की तर्ज पर टीम ने भी सारी अनियमित्ताएं देखकर भी अनदेखी कर दी। अगर इस नियुक्तियों की सुक्ष्मता से जांच की जाए तो भियां इस भर्ती के काफी फर्जीवाडा सामने आ सकता है। मगर भियां जब उपर से लेकन नीचे तक का तंत्र राम नाम जपना पराया माल अपना करने में लगा हो तो कुछ नही हो रिया।

     अब मैं जा रिया , पर जाते जाते एक बात और बता दुं ..... मैं जो केता  हु वो प्रमाण के साथ केता हूं........  .......मगर  जब मैने परियोजना अधिकारी झाबुआ और रानापुर इस गढबड झाले के बारे में पुछा तो वे साफ इन  आरोपों को साफ नकार रिये थे..... जा रिया.... जय रामजी की....    

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