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    Friday, February 10, 2017

    बारिया ने उतारी भूरिया की लु........ भूरियाजी रहे सलाहकारों से सावधान.........

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                  अधजल गगरी छलकत जाए यानि अर्ध ज्ञान वालें सलाहकारों पर आंख मुंद कर भरोसा करना भी कभी कभी जग हंसाई का कारण बन जाता हैं क्योंकि अर्धज्ञान वालों की गगरी हमेशा ही छलकती रहती है। वो न आगे देखते है और न पिछे सिर्फ अपने अर्धज्ञान से ये साबित करना चाहते है कि उनके जैसा कोई नही। इसलिए कहा जाता हे कि सलाकार की सलाह पर अमल जरूर करें लेकिन उसके पहले थोडा बहुत अपने दिमाग का भी उपयोग कर लें। 
                  बुधवार को आयोजित हितग्राही सम्मेलन में अधजल गगरी छलकत जाए कहावत की तर्ज पर जो कुछ भी हुआ वह नेताओं की मर्यादाओं को लांघने वाला था। हालांकि वर्तमान समय से ऐसे दृश्य आम हो गए है। लेकिन बुधवार को झाबुआ और सिहोर में कांग्रेस भाजपा के बीच जो जुतम पैजार हुआ वो आज गली-मोहल्ले वालों के लिए चर्चा का विषय बन गया है। 
                   लोकसभा उपचुनाव जीतने के बाद कांतिलाल भूरिया को प्रदेश का नेता नही बल्कि राष्ट्रीय नेता ने रूप में उनकी छवि स्थापित हो चुकी है। अपनी छवि को बनाए रखने के लिए कहीं समय तो कही वाकचर्तुय का उपयोग करना उनके लिए आवश्यक है। 
                   बुधवार को नगर पालिका द्वारा आयोजित हितग्राही सम्मेलन में क्षेत्रीय सांसद कांतिलाल भूरिया को विशेष अतिथि के रूप् में आमंत्रित थे। निश्चित है कि नगर पालिका ने प्रोटोकाॅल का पालन करते हुए विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया। लेकिन भूरिया निर्धारित समय से 3 घंटे विलम्ब से पहुंचे और शायद यही कारण है कि प्रोटोकाॅल होना चुक गया। वैसे भी भाजपा और कांग्रेस में प्रोटोकाॅल का युद्ध छीडा हुआ है।
     जिस निमंत्रण की बात वे कर रहे थे उन निमंत्रणों को कार्यक्रम स्थल पर ही भूरियाजी को सौंपा गया। अधजल गगरी छलकत जाए कहावत की तर्ज पर सलाहकारों ने भूरियाजी का आलीराजपुर से झाबुआ लौटते समय दुरभाष पर आधी अधुरी बात बताई और भूरियाजी बिना पुरी बात जाने नगर पालिका अध्यक्ष धनसिंह बारिया से भीड गए। 
                    जिले के अनुभवी राजनितीज्ञ के रूप में कांतिलाल भूरिया को माना जाता है। लेकिन जिस प्रकार से वे हितग्राही सम्मेलन में नपा अध्यक्ष धनसिंह बारिया से भीड रहे थे। ऐसा लग रहा था सांसद भूरिया बिना तैयारी के साथ मंच पर मुखर हो रहे है। क्योंकि जिस कार्ड और समय की बात कर रहे थे उस कार्ड पर समय एक बजे से तीन बजे का था। जिसमें अलग अलग आयोजन होने थे। सुबह 11 बजे से आए लोगों को 3 बजे तक बैठाकर रखना कोई मामुली बात नही है। 
    बिना तैयारी से भीडे भूरिया धनसिंह से 
                    जैसे सांसद भूरिया मंच पर चढे और गर्म हो गए। यहीं से धनसिंह का नया रूप सामने आया उन्होने सीधे सीधे भूरियाजी की दुखती नस पर हाथ रखा और कह दिया की आम समय से साढे 3 घंटे आप लैट है, यानि आपको आना था 1 बजे और आप आ रहे है साढे 3 बजे। ऐसा कह कर भूरियाजी की बारियाजी ने लु.... उतार दी। हर बार सलाहकारों की सुन भूरियाजी जो करते आ रहे है..... इस बार बारियाजी के इस प्रहार से भूरियाजी को अंदर ही अंदर लगा होगा की कार्ड को लेकर मंचिय राजनिती को गरमाने वाले ने गडबड की  है और तीरछी नजर से जैसे ही भूरिया जी की नजर कार्ड पर लिखे समय पर पडी तो लग गया की दाव उल्टा पड रहा है। 
                      लेकिन मंझे हुए खिलाडी भूरियाजी ने समय को ताक में रख कर प्रोटोकाकाॅल और तीनों कार्डो की कहानी प्रारंभ कर दी। बारियाजी भी ताव में आ गए और आभार प्रदर्शन के दौरान मंच से खडे होकर भूरियाजी के आरोपों का जो करारा जवाब दिया। उसे सुन पुरे पांडाल में सन्नाटा छा गया और दो मिनीट में बारियाजी ने भूरियाजी के आरोपों की लु उतार दी। 
               हालांकि आम चर्चा यह है कि इस पूरे गरमहड की जिस राजनैतिक लाभ के लिए भूरियाजी से मामला जमवाया गया। वह सुबह में प्रींट मीडिया से लेकर इलेक्ट्रोनिक मीडिया तक में फुस हो गई। अब भूरियाजी के समर्थक या सलाहकार कहते फिर रहे है कि वह तो प्रोटोकाॅल बात है समय को लेकर बात थोडी बिगडी। 

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