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    Monday, February 13, 2017

    भारतीय संस्कृति में वेलेंटाईन डे मनाना सबसे बडा नैतिक पतन / वासना, कामांधता, विकृति, अश्लीलता एवं अनैतिकता को जन्म देता है वेलेंटाईन डे’

    स  का दुष््रप्रभाव आज देश के युवा वर्ग पर सबसे अधिक दिखाई देता है । युवावर्ग इस दिवस को अपने अलग ही अंदाज में मना कर अपनी पूरातन संस्कृति से विमुख हो रहे है  । नगर के साहित्यकार एवं समाजसेवा मे अग्रणी, कवि एवं हिन्दुधर्म के विद्वान पण्डित गणेश प्रसाद उपाध्याय ने  वेलेंटाईन दिवस को लेकर चर्चा में बताया कि हमारी संस्कृति में अपने पूर्वजों ने मकरसंक्रांति, होली, गुढीपाडवा, गणेशोत्सव तथा दीपावलीके समान विशेषतापूर्ण त्योहार किस प्रकार मनाए जाते हैं, यह सिखाया है। किंतु हम 1 जनवरी को नववर्षारंभ, प्रेमिकाओं का दिन ‘वेलेंटाईन डे’ ‘मदर्स-डे’, ‘चॉकलेट डे’ इस प्रकार के अनेक विकृत ‘डे’ मनाते हैं । इन विभिन्न ‘डे’द्वारा वासना, कामांधता, विकृति, अश्लीलता एवं अनैतिकताका दर्शन होता है । ये सभी सुख क्षणिक हैं । इस प्रकार का अधर्माचरण करने से चरित्र का हनन होता है, भोगवाद विलासवाद  फैलता है, कामांधता  बढती है तथा अनाचारोंकी मात्रा बढती है ।
    पण्डित उपाध्याय के अनुसार युवक-युवतियां एकत्रित होकर 14 फरवरी को प्रेमिकाओं का दिन मनाते हैं । इस दिन वे एक-दूसरे को भेंटवस्तु तथा फूल अथवा ‘पार्टी’ देकर प्रेम व्यक्त करते हैं । वैलेंटाईन डे मनाना, पश्चिमी संस्कृति की अनैतिकता का अनुसरण व हिन्दू संस्कृति का अवमूल्यन है । आर्थिक लाभ हेतु प्रसार माध्यम ,शुभकामना पत्र-निर्माता इसका प्रसार करते हैं । इससे हिन्दुओं के एक दिन के राष्ट्रांतरण एवं धर्मांतरण को प्रोत्साहन मिलता है । उनका कहना है कि यदि आपने प्रेमिकाओ का दिन 26 वें वर्ष में मनाया होगा, तो आपके बालक 16 वें वर्ष में ही वह मनाएंगे । यदि हममें अनैतिकता की मात्रा 40 प्रतिशत होती है, तो बालका ेंमें वह 70 प्रतिशत होती हुई दिखाई देगी । ध्यान में रखें कि आपके बालक आपकी अपेक्षा सभी बातो ंमें आगे बढ रहे हैं । यदि आप धर्माचरण कर रहे हैं, तो आपके बालक भी आपसे आगे बढकर धर्माचरण करेंगे । यदि आप अनैतिकता का आचरण करेंगे, तो भविष्य की पीढी भी अनैतिक होगी ।
    श्री उपाध्याय का कहना है कि क्रांतिकारियो ंने देश को स्वतंत्रता प्राप्त होने के लिए अत्यंत परिश्रम किए । क्रांतिकारी देश के लिए फांसी पर चढ गए, अपने घरों का त्याग किया, उस समय छोटे-छोटे बालक भी पथ पर उतरे । क्या उन्होंने यह त्याग इस हेतु ही किया था कि हम अनैतिकता का आचरण करें ? हमें यह बात ध्यानमें रखनी चाहिए कि ब्रिटिशों ने जब देश में अनैतिकता फैलाना प्रारंभ किया, उस समय हमारी संस्कृति पर होने वाले तीव्र अन्याय का भान होकर लडाई करनेके लिए क्रांतिकारी उनके विरोध में रस्ते पर उतरे । कुछ क्रांतिकारियों के प्राणत्याग करने के पश्चात ही भारत को स्वतंत्रता प्राप्त हुई है । भारतीय संस्कृति विश्व की एकमात्र महान संस्कृति होने के कारण उसकी रक्षा करने के लिए ही हमारे पूर्वजों ने त्योहार मनाना आरंभ किया तथा उसमें भी ब्रिटिशों द्वारा अडचनें उत्पन्न करने के कारण क्रांतिकारियो ंने एकत्रित होकर आंदोलन किया । क्रांतिकारियों ने भारत देश स्वतंत्र करन ेके पीछे विशिष्ट उद्देश्य रखा था । हम हमारे देशमें प्राचीन कालावधि से जो भी त्योहार-उत्सव मनाते आए हैं, वे उसी पद्धति से मनाए जाने चाहिए । त्योहार के दिन परिवार के सर्व सदस्य एकत्रित होने के पश्चात देश तथा धर्म के संदर्भ में बातचीत होती थी । उनमें से ही देशप्रेम जागृत होकर पारिवारिक संबंध स्थापित किए जाते थे । क्रांतिकारियों को इस बातका पता था कि हमारी संस्कृति विश्व की एकमात्र महान संस्कृति है । उसका रक्षण करने हेतु हमारे पूर्वज त्योहार मनाते थे, साथ ही धर्माचरण भी करते थे । ब्रिटिशोंद्वारा उसमें अडचनें उत्पन्न करना आरंभ करते ही क्रांतिकारियोंने एकत्रित होकर  ब्रिटिशो ंके विरोधमें आंदोलन किया ।
    14 फरवरी को हिंदु प्रेमी-प्रेमिका माता-पिता का विस्मरण कर उनके मनके विरूद्ध आचरण करते हैं । उस क्षणिक सुखके लिए आत्महत्या तक के लिए भी प्रवृत्त होते हैं । क्या प्रेमिका का दिन यही आदर्श सिखाता है ? इस प्रश्न का निर्लज्ज लोग यहां’ ऐसा ही उत्तर देते हैं । यदि आप वास्तवमें हिंदुस्थान में जन्मे हैं अथवा आपके माता-पिता ने आपके बचपन में आप पर अच्छे संस्कार किए हैं तथा आपको चरित्रहीन होने से दूर रहना है, तो 14 फरवरी, यह दिन मनाना छोड दें तथा उसे मनाने वालों का प्रबोधन कर उन्हें इससे दूर करें, तो ही आपका जन्म सार्थक होगा । श्री उपाध्याय का कहना है हिन्दुओं की विवाह संस्कृति संयमी व नैतिक प्रेम जीवन सिखाती है । इसीलिए भविष्य में राष्ट्र-धर्मप्रेमियों द्वारा स्थापित होनेवाले धर्माधिष्ठित हिन्दू राष्ट्र में यह भोगवादी डे प्रथा नहीं रहेगी !


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