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    Friday, February 17, 2017

    प्रशासन की अनूठी पहल.......... निः शुल्क शिक्षा प्राप्त कर छात्र लेगें प्रतियोगिता परीक्षा में भाग

    प्रतियोगिता के इस दौर में कोई भी पिछे रहना नही चाहता है ... सभी एक दुसरे को पिछे करने में लगे हुए है... ऐसे में गरीब तबके के विद्यार्थी मंहगी कोचिंगों में पढ नही पाते है.... और  प्रतिस्पर्धा की इस दौड में वे पिछे रह जाते है..... जिसे देखते हुए प्रतियोगीता परीक्षाओं में चयनित होकर उंचे ओहदे पर बैठ अधिकारी अब.... प्रतिस्पर्धा के इस दौर में प्रतिदिन एक घंटा बच्चों को निःशुल्क शिक्षा देंगें..... कि कैसे प्रतियोगी परीक्षाओं में कामयाबी हासिल की जाती है.....।
    ग्रामीण क्षेत्रों में आदिवासी छात्रों के सामने हमेशा समस्या बनी रहती है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कैसे की जाए... और उन्हें मार्ग दर्शित कौन करेगा .... ताकि इन परीक्षाओं में उनका  चयन हो सके...  ग्रामीण बच्चों के इस  दर्द को समझते हुवे प्रभारी कलेक्टर अनुराग चौधरी  ने  इस समस्या को हल करने के लिए प्रशासन की और  एक नया प्रयोग किया... इस प्रयोग के अंतर्गत आदिवासी बच्चों जो प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे है उन्हे निःशुल्क रूप से कोचिंग उपलब्ध करवाई जाएगी.... इसके लिए प्रभारी कलेक्टर और आदिवासी विकास विभाग सहायक आयुक्त शकुन्तला डामोर  के सहयोग से गुरूवार को बुनियादी शाला में निःशुल्क कोचिंग क्लासेस का शुभारंभ किया गया। 

    शुभारंभ के पश्चात प्रभारी कलेक्टर ने छात्रों की क्लासेस लेते हुए उन्हे प्रतियोगी परीक्षाओं को किस प्रकार  से तैयारी की जाए.... इस संबंध में विस्तार से समझाते हुए उन्हे विभिन्न विषयों की जानकारी प्रदान की। अब इन क्लासेस में प्रत्येक दिन एक अधिकारी जो संबंधित विषय का ज्ञाता हो उन्हे वे एक घंण्टा निःशुल्क शिक्षा देंगे और प्रत्येक दिन कौन-कौन अधिकारी किस विषय की जानकारी देगा उसकी विषय वार लिस्ट भी तैयार कर ली गई है।
    प्रतिस्पर्धा के इस दौर में प्रतियोगीता परीक्षा को लेकर जो नया प्रयोग किया गया है वो वाकई तारिफें काबिल हैं.... अभी तो क्लासेस की शुरूआत ही हुई है लेकिन अभी पहले दिन से क्लासेस में बडी संख्या में छात्र-छ़ात्राएं उपस्थित हुए। 
    सहायक आयुक्त आदिवासी विकास शकुंतला डामोर ने बताया कि वर्तमान में ग्रामीण आदिवासी बच्चे भी प्रतियोगी परीक्षाओं की ओर आकर्षित हो रहे हैं....ऐसे में प्रभारी कलेक्टर का यह नया प्रयोग इन ग्रामीण आदिवासी बच्चों के लिए मील का पत्थर साबित होगा....... और बड़ी संख्या में आदिवासी बच्चे प्रतियोगी परीक्षा में चयनित होंगे.....।

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