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    Thursday, February 23, 2017

    Exclusive...उच्च श्रेणी शिक्षक की तानाशाही से अध्यापकों में आक्रोश......


    पारा से अंकित चौहान की रिपोट...... 
              अध्यापकों के छठवें वेतनमान का गणना पत्रक 15 अक्टूबर 2016 को शासन द्वारा जारी कर दिया गया था जिसको झाबुआ जिले की समस्त संकुल केंद्रों द्वारा छठे वेतनमान का निर्धारण कर अध्यापकों को आदेश एवं तालिका जारी कर दी गई.... किंतु रामा विकासखंड में पारा क्षेत्र के संकुल केंद्र शासकीय बालक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पारा में अध्यापकों का वेतन निर्धारण तो कर दिया गया..... किंतु आदेश जारी होने के चार माह बीत जाने के बाद भी अध्यापकों को वेतन तालिका तथा व्यक्तिगत आदेश की कॉपी किसी भी अध्यापक को नहीं दी गई एवं वेतन का निर्धारण भी गलत किया गया....  जिसके चलते नाराज होकर संकुल के एक सहायक अध्यापक द्वारा क्रमशः संकुल प्राचार्य ,संकुल प्रभारी प्राचार्य तथा संकुल के लेखाप्रभारी को निरंतर दिनांक 17 अक्टूबर, 28 दिसंबर 2016 , 16 जनवरी एवं 8 फरवरी 2017 को लगातार चार आवेदन लिखित में निवेदन कर वेतन तालिका एवं आदेश तथा वेतन निर्धारण सुधार हेतु संबंधित जवाबदारों को विनय व आग्रह  किया गया... . 
               किंतु अध्यापक से पदोन्नत होकर बने वरिष्ठ अध्यापक संकुल के प्रभारी प्राचार्य अबरार खान एवं वेतन बिल आदि कार्य कर रहे  उच्चश्रेणी शिक्षक वीरसिंह भूरिया तथा संकुल प्राचार्य मोहनसिंह चौहान तीनों जवाबदारो द्वारा वेतन निर्धारण में भी की गई त्रुटियों में कोई सुधार भी नहीं किया गया...  न हीं व्यक्तिगत आदेश् निर्धारण तालिका दी गई राज्य अध्यापक संघ के जिला महासचिव दिनेश चौहान ,पूर्व जिला प्रवक्ता मकनसिंग पंचाया ब्लॉक प्रतिनिधी  भूरसिंह ढकिया ने बताया कि अध्यापकों को गुमराह किया जा कर कार्यालय में सीधे मुंह बात नहीं की जाती है.... इसी संबंध में बार-बार आवेदन निवेदन करने पर संकुल प्राचार्य अबरार खान द्वारा स्पष्ट कहा जाता है कि वेतन निर्धारण सुधार नहीं करेंगे एवं यह भी कहा गया कि मुझे संकुल प्राचार्य तथा वीरसिंह भूरिया तीनों को हटवा दो यह कह कर अध्यापकों को डराया धमकाया जाता है 
                इसी प्रकार एक सहायक अध्यापक द्वारा वेतन लेखा का कार्य कर रहे उच्च श्रेणी शिक्षक वीरसिंह भूरिया से भी संपर्क किया तो उन्होंने तेश में आ कर जवाब दिया व बोला कि मैं नहीं जानता मुझसे बात मत करो व मुझसे मत कहा करो और यह भी कहते हैं कि मैं अध्यापकों के वेतन बिल नहीं डालूंगा। ऐसा  बोलकर कार्य करने की इतीश्री कर लेते हैं। 
                नकारात्मक जवाब देकर वेतन लेखा के पद पर बैठ कर रोप झाड़ते रहते हैं जिसमें अध्यापकों को अपमानजनक भाषा बोल कर हमेशा प्रताड़ित करते हुए अभद्रता का व्यवहार करते हैं जिससे अध्यापक संवर्ग हमेशा परेशान रहता है जो कि उनके स्वाभिमान को ठेस पहुंचाती है जबकि अपने हक के लिए प्रत्येक कर्मचारी को लोकतंत्र में अधिकार प्राप्त है वही वेतन के सही निर्धारण की सुनवाई संकुल में बैठे जवाबदारो द्वारा नहीं किए जाने के कारण एक अध्यापक द्वारा पुनः मुख्य कार्यपालन अधिकारी महोदय को देने हेतु योग्य माध्यम संकुल केंद्र बालक पर दिया गया। जिसे भी संकुल के जवाब प्रेषित करने से मना कर दिया। जिससे स्वयं अध्यापक द्वारा जाकर जनपद रामा में जमा करना पड़ा इन की तानाशाही वह हठधर्मिता अपनी मनमानी के चलते अध्यापकों को परेशान कर उनका शोषण किया जा रहा है.... 
            जो कि इस प्रकार इन की दिनचर्या की आदत बनी हुई है अध्यापकों के वेतन में की गई त्रुटियों को सुधारने एवम अपनी मांगों के संबंध में संगठन के द्वारा भी संपर्क कर सुधरवाने का प्रयास किया गया किंतु इनकी मनमानी के चलते कोई सुधार नहीं किया गया इसी प्रकार बालक संकुल पारा के लगभग 20 अध्यापकों को पिछले 2 वर्षों से प्रान नंबर एवं कीट एन.एस.डी.एल. हेतु आवेदनों की कार्यवाही सही नहीं की जा कर उनके अंशदान कटोत्रा में प्रत्येक अध्यापक को 80 हजार से एकलख तक का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है उन्हें आज दिनांक तक प्रान किट प्राप्त नहीं हुआ है। जो कि राज्य अध्यापक संघ के सदस्यों द्वारा आयुक्त सतपुड़ा भवन भोपाल से त्रुटि पूर्ण आवेदन लाकर कन्या संकुल पारा में लेखा शाखा के मुकेश राठौर के सहयोग से पुनः नवीन आवेदन ऑनलाइन किए जा कर उनके समस्त अभिलेख संगठन के माध्यम से आयुक्त सतपुड़ा भवन भोपाल में जमा किए गए इन की लापरवाही के कारण दूसरे संकुल तथा संगठन का सहयोग लेना पड़ा।                 राज्य अध्यापक संघ के जिला अध्यक्ष मनीष पवार जिला, महासचिव दिनेश चौहान, पूर्व जिला प्रवक्ता मकन सिंह पंचाया, जिला कोषाध्यक्ष फिरोज खान, जिला प्रचार मंत्री अब्दुल हमीद खान, रामा ईकाई ब्लॉक अध्यक्ष दिनेशटांक, ब्लाक प्रतिनिधी भूरसिंह ढाकिया, राजेंद्र परमार, उड़न सिंह सेंगर ,रतनसिंग रावत ,जय शंकर गौतम, अरुण बर्वे,बलराम क्षेत्रे महिला प्रतिनिधि सुश्री चन्दा परमार, श्रीमती अनीता वर्मा व् श्रीमती सुनीता रावत ने मांग की है कि बालक पारा द्वारा वेतन निर्धारण की त्रुटियों को नहीं सुधरा गया तथा व्यक्तिगत आदेश एवं तालिका नहीं दी गई तो अध्यापक आंदोलन करने एवं न्यायालय में जाने को मजबूर होंगे जिसकी समस्त जवाबदारी संबंधित जवाब दारो की रहेगी।

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