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    Saturday, March 11, 2017

    भियां शांतिलाल..... भाई साहब से बच के रियो......


    लो भियां मैं फिर आ गिया.... कुछ कही-अनकही बातें लेकर.... भियां अब वो दिन नी रिये... जब एकलव्य अंगुठा काट कर द्रोणाचार्य को गुरू दक्षिणा में अपना अंगुठा भेंट कर दे..... अब वो दिन आ गिये ...  जब गुरू को शिष्य से लाभ न हो तो गुरू खुद ही शिष्य की कबर खोदने में लग जाता है...। भियां में बात कर रिया हुं हमारे क्षेत्रीय विधायक शांतिलाल की.... जो मित्र मंडल को अपना गुरू मान कर काम कर रिया है.... और वो ही मित्र मंडल उसकी छवि धुमिल करने में कोई कसर नही छोड रिया है....। 
    भियां नमानी नर्मदे यात्रा के बाद... सीएम साहब से सामने क्षेत्रीय विधायक का कद और बढ गिया है.... सीएम साहब जहां भी जा रिये है... वहां विधायक शातिलाल का नाम लेने से नही छुक रिये है... ऐसे में भियां शांतिलाल को अपना रास्ता साफ नजर आ रिया है... मगर वो नही जान रिया है कि उसकी राह में उनके अपने ही मित्र मंडल के भाई साहब.... जिसे वो अपना गुरू मान रिये है वो पर्दे के पिछे रे कर काटें बिछा रिये हैं...। 
    बात ये समझ नी आ री है..... कि विधायक साहब आपके भाई को तो छात्रावास के बच्चे संभालने में फुर्सत नी मिल री है.... उस पर शिक्षकों से अवैध वसुली, दारू सप्लाई और स्कूलों और आंगवाडियों में सप्लाई करने का आरोप भाई साहब के प्यादे लगा रिये हैै.... प्यादे गली मोहल्ले में ये भी बात कर रिये है कि.... सीएम साहब के सामने आपकी छवि अच्छी नी री है.... नमामी नर्मदा यात्रा तो आपकों कसम दिलवाकर निकाली गई की.... आंप नशा न करें .....। इस तरह की बातें इन दिनों नगर में चर्चा का विषय बनी हुई है.... कि आखिर विधायक..... भाई साहब के साथ होने के बाद भी... भाई साहब के प्यादें इस तरह की बातें क्यों फैला रिये है...।  
    भियां इन बातों से लग रिया है कि विधायक साहब से एकलव्य की तरह अपना अंगुठा नही कटवाया.... और भाई साहब के कहे अनुसार उनकी आशाओं को पुरा नी किया.... भाई साहब के प्यादे विधायक के भाई पर लान्चन तो लगा रिये है... मगर ये नी जा रिये की जनता सब देख री हैं.... की किसके साथ माफिया, सप्लायर घुम रिये है.... इन दिनों जिले का सबसे बडा शराब माफिया और अपराधी दिन रात भाई साहब के साथ हर जगह देखा जा रिया है...  ये भी जनता को दिख रिया है। ऐसे में छवि विधायक और उसके भाई की नही... भाई साहब की धुमिल हो री है....। 
    भियां विधायक साहब जल्द ही मित्र मंडल से अपनी दुरी बना लियो.... नही तो ऐसा लग रिया है कि इस बार भाई साहब विधायक का दावेदार तुम्हे नही... पर्दे के पिछे रेह कर.... किसी और को दावेदार बनाने की तैयारी कर रिये है...। क्योंकि एकलव्य की तरह आपने अपना अंगुठा नही कटवाया....। 
    तो भियां अब मैं जा रिया हुं.... मगर जाते जाते ये बता रिया हुं कि विधायक साहब आपके पढे लिखे होने से कुछ तो फायदा हुआ...... नही तो जिस तरह नगर पालिका खौखली हो गई.... उसी तरह हमारा विधान सभा क्षेत्र खोखला हो जाता...  अब जा रिया.... जय रामजी की....। 

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