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    Sunday, March 19, 2017

    नारी घृणा और अपमान के योग्य नहीं बल्कि सच्ची श्रद्धा और सम्मान की पात्र हैं


     श्री सत्यसाई बाबा ने कहा था कि  नारी एक शक्ति है। शास्त्रों में उसे भगवान शिव की शक्ति अथवा शिवभक्ति कहा गया है। आज की नारी पुरुषों से किसी मामले में पीछे नहीं है। एक समय था जब नारी को अबला कहकर पुकारा जाता था और संन्यासी लोग उसे नर्क का द्वार कहकर तथा अभिमानी गृहस्थ पुरुष उसे अपने पैरों की जूती् कहकर ठुकराया करते थे लेकिन अब समय बदल गया है। आज नारी न तो अबला है और न ही उसे पैरों की जूती कहा जा सकता है। आज की नारी अपने पैरों के ऊपर खड़ी हुई है, स्वावलम्बिनी है। वह किसी भी प्रकार से पुरुष की आश्रित नहीं है। बल्कि कभी परिचारिका बनकर और कभी कार्यक्षेत्र की सहयोगिनी बनकर वह पुरुष वर्ग की मदद ही करती रहती है।
    यदि नारी छलित या पवित्र होती तो भारतवासी मन्दिरों में दुर्गा सन्तोषी वैष्णों आदि पूज्य देवियों की इतनी आराधना क्यों करते । मन्दिरों की देवियां भी तो आखिरकार नारियां ही हैं। वे भी शिव शक्तियां हैं। वास्तव में महिलाएँ अथवा नारियां घृणा और अपमान के योग्य नहीं बल्कि सच्ची श्रद्धा और सम्मान की पात्र हैं। आज युग ने फिर से नई करवट ली है और स्त्रियों के संबंध में लोगों की धारणाएँ एवं मान्यताएँ बदली हैं। महिलाओं के कार्यक्षेत्र में वृद्धि हुई है। वह जीवन के हर क्षेत्र में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं। उक्त उदगार श्री सत्यसाई सेवेा समिति की बाल विकास कन्वीनर श्रीमती ज्योति सोनी ने  आज रविवार  को विवेकानंद कालोनी में श्री उमापति महादेव मंदिर में समिति द्वारा  प्रति माह की 19 तारीख को मनाये जाने वाले महिला दिवस के अवसर पर उपस्थित महिलाओं को संबोधित करते हुए कहीं ।
    श्री सत्यसाई संगठन के प्रांतीय निर्देशानुसार समिति द्वारा उमापति महादेव मंदिर की सामुहिक सफाई एवं स्वच्छता का कार्य महिला दिवस के अवसर पर किया गया तथा सामुहिक नाम संकीर्तन एवं महिलाओं के भजन का भी आयोजन किया गया । उपस्थित महिलाओं ने सर्वधर्म नाम संकीर्तन के साथ ही पारपंरिक धार्मिक भजनों का करीब एक घण्टे तक कार्यक्रम आयोजित किया । इस अवसर पर श्रीमती विद्याव्यास, राधा सोलंकी, गीता शाह,कुवरबेन परमार, गौरीबाई, माया पालिवाल, रानी परमार, राधा राठौर, नर्मदा पण्डिया, उर्मीला राठौर, शारदा शर्मा, अंगुरबाला व्यास, शिवकुमारी सोनी, ज्योति सोनी, कुमारी पूजा जोशी ने सहभागिता की । महामंगल आरती शिवकुमारी सोनी ने उतारी एवं महाप्रसादी के वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ । 

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