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    Monday, March 20, 2017

    तीन महिने हो गिये कातिया.... पहले भाबर... फिर भूरिया और शर्मा... अब कातिया किसको लगाएगा चूना...


              लो भियां मैं फिर आ गिया... इस बार काफी समय बाद अपना मिलना हो रिया है.... भियां आज जल्दी उठ गिया था... तो घुमने निकल पडा..... घुमते घुमते माता के मंदिर आ गिया... मंदिर पर भियां श्रद्धालुओं की काफी भीड थी.... श्रद्धालु बडी श्रद्धा से माता की पूजा अर्चना कर रिये थे... मैनें भी श्रद्धा पूर्वक सर झुकाया... और आगे निकल गिया......।
              भियां रास्ते में चलते चलते श्रद्धालुओं की श्रद्धा देख एक बात याद आ गई.... कातिया ने किया था .... तीन माह में मां तुम्हे सबक सिखाएगी... तीन माह के अंदर तुम निपट जाओगे... कातिया तीन माह बाद बहुत कुछ होने की बात कर रिया था... तो भियां कातिया 3 महिने से ज्यादा दिन हो गिये... एक बात बता दुं कातिया... मां कभी अपने बेटे का बुरा नही चाहती है... मां की हम दिल से पूजा अर्चना करते है.... तुम्हारी तरह दिखावा नही करते.... तुम तो गरीबों के मुंह से निवाला छिन... माता के नाम पर कालेधन को सफेद करने के लिए कार्यक्रम आयोजित करते हो... भियां कातिया तीन महिने हो गिये... अब ये साबित हो गिया... सच्चा कौन और झुठा कौन...?
             भियां समाजसेवी बन आने वाले दिनों में धर्म की आड में कातिया जो गौरखधंधे चला रिया है... उसे छिपाने के लिए कार्यक्रम के  आयोजन की तैयारी कर रिया है... और कातिया की तीरमदारी करने चापलुस सोशल मीडिया में इस कार्यक्रम को प्रदेश व देश स्तर आयोजन बताने में लग गिये है....। 
             भियां ये मैं नी के रिया... ये कातिया को अच्छी तरह से जानने वाली तीकडी के री है... कि अगर कातिया के 10 से 15 साल के इतिहास को उठाकर देख लियो... की....  कातिया न किसी का हुआ है और न किसी का होगा...   इतिहास देखे तो कातिया उसी के पलडे में बैठ रिया है... जिसमें दमखम हो.... उसके लिए क्या दोस्त... क्या दुश्मन... तो भियां मेरे भी रहा न गया... मैने भी तीकडी से पूछ लिया.... भाई कैसे... तो तीकडी ने दबी जुबां से किया... चंद साल पेले की बात करें तो भियां कातिया के फकीरी के दिन चल रिये थे..... तो कातिया ने थांदला के भाबर के चरण वंदन कर  सफलता की सीढी चढने लगा... लेकिन जेसे ही भाबर पर भूरिया ने चढाई की तो भूरिया को मजबुत होता देख.... कातिया ने चुहों की तरह भाबर का जहाज छोड... भूरिया के जहाज का कप्तान बन गिया... लेकिन वक्त ने एक बार फिर भाबर के पास से भागे... इस दोगले समाजसेवी का छोला ओढ कातिला की परीक्षा ली और  लोकसभा उपचुनाव आया तो प्रदेश और देश में सत्ता के डर अभी तक भूरिया के जहाज की कप्तानी कर रहे कातिया धीरे धीरे उतरने लगा... ।
           लेकिन भियां यहां कातिया ने होशियारी दिखाई और भूरिया के साथ ही जिले के उगते सूरज शर्मा बंधु का जहाज भी थाम लिया.... ताकि जब भूरिया का जहाज डुबे  तो शर्मा बंधु के जहाज पर चढ कर सवारी कर ली जाए..... भियां जब तक भूरिया समझ पाते.... कप्तानी छोड कातिया छुटटी पर चला गिया..... लेकिन इस बीच कातिया शर्मा बंधुआे की जहाज की काप्तानी का प्रयास करता रिया.... लेकिन  जब यहां पर उसे सफलता नही मिली... तो तिकडी बताती है कि कुछ माह पहले इसने शर्मा बंधुओं के जहाज पर भी सवारी करना छोड दी......।
            तिकडी से मैंने पूछा भियां आखिर शर्मा बंधुओं के जहाज की सवारी कातिया ने क्यो छोडी? तो तिकडी ने बताया कि जब जिला पंचायत का चुनाव था तब कातिया ने शर्मा बंधुओं को जबान दी थी कि जिला पंचायत अध्यक्ष उनकी मर्जी से ही बैठेगा.... लेकिन कातिया ने अंदर ही अंदर अपनी जुबान से पल्टी मार दिया और कातिया का राज खुल गिया......। तो शर्मा बंधुओं ने बडा बेआबरू कर कातिया को जहाज से उतार दिया...। 
    भियां तीकडी की ये बात सुनकर हमे भी लगा... कि कातिया की कहानी में दम है.... पहले भाभर फिर भूरिया फिर शर्मा और अब किसे लगाएगा चुना........।
    तो भियां अब में जा रिया... लेकिन एक बात और कातिया के दलालों को बता दुं भीड में तो सब शेर होते है... तुम्हारी गीदड भपकियों से मैं नी डर रिया... भियां छुपने की जगह ढुड लियो... कोई भी दिन भारी पड गिया.... तो दुसरे परेशान होंगे... न घर बचेगा  न बार ... जा रिया जय रामजी की....। 
     ?

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