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    Sunday, March 19, 2017

    देश का भविष्य ....चाय की केटली में - - - जानिए कैसे एक क्लिक में - -



    पेटलावद से शान ठाकुर । प्रशासन की अंनदेखी और लापरवाही के चलते नौनिहाल मासूम बच्चें जिनकी उम्र अभी शिक्षा ग्रहण करनें की है वें आज शिक्षा दिशा सें वंचित होकर मजूदरी करनें को विवंश है जहां एक  और प्रशासन पूरें जौर शौर सें विज्ञापनों कें जरीयें बाल मजदूरी पर प्रतिबंध लगानें कें दांवेंकर रहा है। लेकीन हकीकत तो कुछ और ही बया करती है। जिले में आम तौर देखा जा सकता है। की छोटे छोटे बच्चें की तरह बाल मजदूरी कर रहे जो पढाई से काफी दूर है। 
    कई होटलें और ढाबें है जहां पर 12 सें 15 वर्ष की उम्र का बच्चा उस दुकान पर बर्तन धोते झाडू फेरतें हुए आसानी से दिखाई पडते है......  उसके बावजूद अधिकारी इन सब बातों को नजर अदांज कर देते है..... सबसे बडी बात यह है की शासकीय कार्यालय में भी छोटा बच्चा ही चाय लेकर पंहुचता है और अधिकारी उसी बच्चें की खिल्ली उडातें हुए चाय की चुस्की ले लेते है..........परन्तु इस बात की और गौर नही करतें की ये छोटा बच्चा कोन सी मजबूरी में मजदूरी कर रहा है....... यदि गरीब नही होता तो आज यें किसी स्कूल में पढाई कर रहा होता परन्तु गरीबी की भुख प्यास बर्तन धोनें और झाडू फेरनें पर भी मजबूर कर देती है.........

    होटलो, ढाबो से हटकर भी बाल मजदूरी खुले आम सडको पर की जाती है.. जब शादियो मे दुल्हा अपनी बारात लेकर आता है, तब उस बारात को रास्ता दिखाने और उसकी शोभा बढाने हेतू बच्चे ही लाईट हाथो मे लिए चलते है जिनकी संख्या करीब 20 से 25  की होती जो सडको पर बारात के साथ साथ चलते है जो नजारा सब के सामने होता है। क्या प्रशासन इन बातो से अनभिग्य है? या प्रशासन इस और कोई कार्यवाही ही नही करना चाहता है। 


          हर बच्चा पढाई करना चाहता है लेकीन उसकी गरीबी उसे होटलो एक दुकानो पर काम करने को मजबूर कर देती है, आखिर ये शिलशिला कब तक चलता रहेगा क्या हमारे यशस्वी मुख्यमंत्री को ये नही पता की देश का भविष्य सडको पर चाय की केटली लेकर घुमने को मजबूर है, एक तरफ तो उनका कहना है कोई बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे...... और यहा तो बच्चो का शोषण पे शोषण किया जा रहा है....... 
    सिर्फ विज्ञापनो पर ही बाल श्रमिक प्रतिबध दिखाई दे रहा है जमीनी हकीकत इन सब बातो से हटकर है जिससे साफ जाहिर होता है की देश का भविष्य डिजीटल इंडिया की और नही डिजीटल इंडिया से दूर हो रहा है। क्या ऐसे बनेगा डिजीटल इंडिया? 
     इससे तो यही प्रतीत होता है कि देश का भविष्य चाय की केटली में बंद है।

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