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    Sunday, April 2, 2017

    पढने के लिए नही...... मंत्रीजी के कार्यक्रम में भीड बडाने के लिए होती है बेटियां





















     बेटी बचाओं बेटी पढाओं की बातें शासन प्रशासन करता आ रहा है। लेकिन धरातल पर बेटियों की यहां कोई सुध लेने वाला ही नही है। एक ओर तो प्रदेश के मुखिया शिवराजसिंह चैहान मामा बन कर बच्चियों के भविष्य सवारने की बात कर रहे है। वहीं दुसरी ओर नियमों को ताक में रख जिला प्रशासन पढाई करने के लिए होस्टलों में रहने वाली बेटियों को मंत्रियों के कार्यक्रम में भीड बडाने के लिए कर रहे है और वह भी तब जब इन बच्चियों की परीक्षा चल रही है। 
    किसी का पेपर दो दिन बाद है तो किसी का कल....लेकिन मंत्रीजी के सामने झांकीबाजी दिखाने के लिए प्रशासन को न तो इनी परीक्षा की पडी और न ही इन लडकियों के भविष्य की.... इतना ही नही मंत्रीजी ने एक टुक तक नही पूछा बेटियों परीक्षा के समय परीक्षा की तैयारी करने की बजाया तुम यहां क्या कर रही हो? कार्यक्रम को देख कर ऐसा लग रहा था कि मंत्रीजी को बेटियों से नही.... कार्यक्रम में भीड से मतलब था..... बच्चियों का भविष्य जाये भाड में....।
    झाबुआ में एलिम्कों एवं जिला प्रशासन द्वारा निःशक्तजनों का सामुहीक विवाह के साथ 256 लाख रूपए के कृत्रिम अंगों एवं ट्राईसाइकिलों आदि के वितरण करने के लिए काॅलेग ग्राउंड में प्रशासन द्वारा मेगा कैम्प का आयोजन किया गया। इस केम्प में मुख्य अतिथि के रूप में केन्द्रीय न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावरचंद गेहलोद मुख्य अतिथि के रूप में.... तो सांसद कातिलाल भूरिया और जिले के तीनों विधायकों के साथ कलेक्टर और  प्रशासनिक अधिकारी भी उपस्थित थे... जिनके द्वारा कार्यक्रम में भीड बढाने के लिए कक्षा 6 टी से 11 वीं तक की होस्टलों में रह कर पढने वाली छात्राओं का उपयोग किया। सुबह से ही इन बच्चियों को कार्यक्रम में भीड बडाने के साथ साथ मंत्रीजी के स्वागत और उनके मनोरंजन के लिए रंगारंग कार्यक्रमों के लिए बुला लिया गया। 
    कार्यक्रम में शामिल इन बच्चियों की प्रशासनिक अमलें ने तनिक भी सुध नही ली की आने वाले दिनों में इन छात्राओं की परीक्षा है। ऐसे में कार्यक्रम में ये बच्चियों शामिल होगी..... तो ये परीक्षा की तैयारी कैसे करेंगी..... सिर्फ अपनी वाहवाही लुटने के लिए प्रशासनिक अमले द्वारा इन बच्चियों का उपयोग कार्यक्रम में भीड बढाने के लिए किया गया। परीक्षा की तैयारी के लिए बच्चियां विरोध करें भी तो कैसे... उन्हें तो वरिष्ठ अधिकारी आदेश मिला है... अगर नही गए तो आगे क्या होगा.... क्या... पता.... उन्हे बस यही डर था.... इसलिए वो बिना विरोध किए कार्यक्रम में शामिल हो गई। सवाल सिर्फ यही उठता है कि निःशक्तजनों के कार्यक्रम में स्कूली छात्राओं की क्या आवश्यकता थी। सवाल तो कई थे जब संबंधित अधिकारी से इस संबंध में चर्चा करना चाहा गया तो केमरे के सामने उन्होने इन सवालों का जवाब देना उचित नही समझा। 


































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