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    Monday, April 24, 2017

    पल्टी मार अलकेश कब पल्टे भरोसा नी....वर्ग के विशेष सामने घुटने टेक हुआ नतमस्तक

               लो भियां में फिर आ गिया कुछ कहीं अनकही के साथ... भियां दुसरों के कंधों पर बंदुक रख कर तो कोई भी चला सकता है.... खुद बंदुक चलाने के लिए बडा जीगर होना जरूरी है... भियां मैं बात कर रिया हुं जिले के शराब माफिया अलकेश की। जो राम नाम जपना पराया माल अपना तर्ज पर दुसरों के कंधे पर बंदुक रख कर अपने हित साध रिया है। पिछले काफी समय से सुनता आ रिया हुं दो वर्ग विशेष  की लडाई के बारे में... भियां ये वर्गो की लडाई नही.... भेड की खाल में बैठे शराब माफिया द्वारा फैलाई जा रही भ्रांति मात्र है।
                 भियां कांग्रेस ने शराब तस्करी को लेकर खोले मोर्चे में जिले के तीने माफियाओं का नाम बार बार आ रिया है... जिले के बडे शराब माफिया अलेकश, उसका साथी कमलेश और अलकेश का साला मुकेश के बारे में हाल ही में युवक कांग्रेस ने कलेक्टर को आवेदन देकर जिले में हो रही अवैध शराब की तस्करी के बारे में अवगत कराया...। भियां भेड की खाल में बैठे ये शराब माफिया शुरू से ही दुसरों के कंधों पर बंदुक रख चलाते आए है... और इस वर्ष जब इस इनकी चालबाजी में कोई नही आया तो.... वर्ग विशेष ( कलाल ) का थुका चाट रिये है। 
            चार दिन की चांदनी फिर अंधेरी रात कहावत की तर्ज पर इन शराब माफियाओं ने खुब अपने पार्टनरों को मामु बनाया लेकिन अब इनके जाल में कोई नी फंस रिया है.... तो इन माफियाओं ने स्वयं घुटने टेक झाबुआ के लिए ..... वर्ग विशेष (कलाल समाज) के कुछ लोगों को अपना पार्टनर बनाया... ताकि ये अपनी साख बचा सके। अब भियां आप ही बताओं... जिस समाज की ये छवि बार बार धुमिल कर रिये थे.... उनका ही थुका हुआ अब क्यों चाट रिये है... इतने ही स्वाभिमानी है तो वर्ग विशेष  का सहारा क्यो ले रिये है। ये हो गिया दुध का दुध और पानी का पानी.... अब बताओ भियां ये क्या ये माफिया इन लोगों का मामु नही बनाऐंगे क्या?
                    चलों भियां सुत्रों ने जो इस माफिया के दोगले पन पर बात बिताई... वो मैं आप को बिता  रिया हुं... भियां 10 साल पेले भियां अलकेश 1 से 2 पेटी शराब ले जाकर अपने क्षेत्र में बेचता था... धीरे धीरे... 2 से 4, 4 से 8 ऐसे ये शराब लेता और बेचता गिया... फिर गाडी भर कर शराब ले जाने लगा... और ठेकेदारों का ऐजेन्ट बन गिया... फिर ठेकेदारों ने अलग अलग नाम से गोटियां डाली जिसमें इसका नाम भी शामिल था... तो इसके नाम से एक ठेका खुल गिया... तो ठेकेदारों ने इसे अपना पार्टनर बना लिया... तो भियां इसने उन्हे भी नही छोड... जिसका खाया... उसकी ही बजा डाली... और धीरे धीरे अलग-अलग लोगों को अपना पार्टनर बना कर उनके कंधों पर बंदुक रख कर चलाता गिया और आबकारी से साठगांठ कर गुजरात में अवैध शराब भेजता गिया। धीरे धीरे गुजरात में कई स्थानों पर इसने अवैध शराब के अडडे बना लिए... और अपने पार्टनरों को मामु बनाते गिया.... इस बार इसने सोमग्रुप  को अपनी जालसाजी में फंसाना चाहा लेकिन वो नही फंस पाया... अकेले  तो ये कुछ नही कर सकता इसलिए इसने वर्ग विशेष  का सहारा लिया और उसके सामने घुटने टेक... अपनी छवि धुमिल होने से बचा ली।
                भियां इस साल जिले में अलग अलग ठेकेदारों के ठेके हुए है.... ऐसे में अपने गौरख धंधे की लाईन चालु करने लिए तरह तरह के प्रयत्न कर रिये है.... वहीं जिले में अलग अलग ठेकेदार होने की वजह से छोटे तबके केेेे शराब बेचने वाले भी इनकी जालसाजी में नही फंस रिये है.... ऐसे में खाकी का सहारा लेकर इन छोटे तबके के शराब विक्रेताओं की शराब पकडवा रिये है... वही नोटों के आगे नतमस्तक  खाकी इनके इशारों पर नाच री हैं । 
    अब में जा रिया.... जय राम जी की ........... । 

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