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    Tuesday, April 25, 2017

    महंत मार खाते रहे... और हिन्दुत्व के नाम पर ठेकेदारी करने वाले सोते रहे ....























    झाबुआ। रसुखदारों के खौफ और पुलिस की मेहरबानी के चलते भक्त और भगवान के बीच दुरी बन गई हैं... तो बात बात पर पुलिस थाने का घेराव करने और धर्म की रक्षा के लिए जान देने वाले कछुवे की तरह मुंह अंदर कर तमाशबीन बने हुए हैं। तो हिन्दु समाज का प्रतिनिधित्व करने वाले साधु महात्मा पुलिस की नजरों में चोर उच्छके और फर्जी बन चुके है। ऐसे में सवाल यह है कि आखिर यह सब क्यों हो रहा है?
     तो चौराहों पर चल रही चर्चा अनुसार पारा के नवापाडा में रोड के किनारे हनुमानजी मा मंदिर है। विगत कुछ सालों से जब से यहां पर साधु संतों का निवास हुआ..... मंदिर की किमती जमीन पर पारा के कोई धार्मात्म कहें जाने वाले प्रकाश की नजर गढी जो यहां पर अपने समाज की दादावाडी बनाने का प्रयास करने लगा... जब यहां पर निवासरत साधु ने मंदिर की जमीन पर दादावाडी बनाने का विरोध किया... तो प्रकाश ने अपना कमाल दिखाया और अपने प्यादे सेकु को आगे किया और स्थिति यहां तक ला दी कि सेकु ने प्रकाश से संरक्षण पाकर अपने परिवार के साथ जाकर मंदिर की कुटिया में निवास करने वाले संत गुरूदास पर प्राण घातक हमला कर दिया... हमले से बचे महंत ने पुलिस से गुहार लगाई। लेकिन प्रकाश और सेकु से प्रभावित पारा पुलिस ने महंत की एक न सुनी.... बतातें है की मामले को लेकर पुलिस के आलाधिकारी पारा पहुंचे तो उन्होने महंत की सुनने की बजाया प्रभावियों का पक्ष लेते हुए... हिन्दु समाज का प्रतिनिधित्व करने वाले संत को ही फर्जी बताते हुए चोर उच्छका करार दे दिया और प्राण घातक हमला करने वाले पुलिस की नजरों में सम्मानिय बन गए.... पुलिस ने कार्रवाई करने की बजाय महज अदम चेक काट कर महंत गरूडदास को थमा दिया। 
    आखिर क्यों चुप हैं कथित समाजसेवी
    धर्म और समाज के नाम पर अकसर बवाल करने वाले कथित लोग इन दिनों चुपचाप है... उनकी चुप्पी भी नगम में चर्चा का विषय बन चुकी है कि आखिर महंत पर जानलेवा हमला...... पुलिस द्वारा सार्वजनिक रूप से महंत का अपमान.... मंदिर जाने वालें भक्तों को प्रतिदिन मंदिर नही जाने के लिए धमकाना..... मंदिर का कुंआ दादागिरी से बंद कर देते के साथ ही रूआबदार दबंगों द्वारा फेसबुक और वाटसऐप कर महंत के खिलाफ जिस प्रकार से टिप्पणी की जा रही है... उसके बाद भी अपने आप को हिन्दु धर्म का रक्षक बताने वाले चुपचाप तमाशा देखे ये समझ से परे है?
    आखिर क्यों भगाना चाहते हैं महंत को?
    गलियारों की चर्चा हैं कि मंदिर की जमीन पर कुछ व्यक्ति दादावाडी खोलने का प्रयास कर रहे हैं और महंत इसका विरोध कर रहे है कि मंदिर की भूमि हिन्दु समाज की है... चुकि दादावाडी खोलने वाले प्रभावियों में आते है और पुलिस से लेकर प्रशासन तक इन प्रभावियों से प्रभावित हैं.... इस कारण वे महंत को यहां से निपटा कर अपने रास्ते के कांटों को साफ करना चाहते हैं और इसके लिए उन्होने अपने अंध भक्त से महंत पर न सिर्फ हमला करवा रहे हैं... बल्कि उसे जान से माने का प्रयास भी कर रहे हैं.... अब सवाल यह है कि क्या समाज का प्रतिक इन संतो ंके लिए समाज जागेगा या सोता हुआ तमाशा देखते रहेगा। 


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