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    Friday, May 26, 2017

    इंदौर में भारत के पहले अनूठे केफे भड़ास का शुभारंभ....... भड़ास विश्व का पहला ऐसा केफे है जहां गुस्से को व्यक्त करने के लिए तोड़फोड़ के साथ ही सकुन के पल बीताने के लिए आपका पसंदीदा माहौल भी उपलब्ध है।

     विदेशो की तर्ज पर इंदौर में आज के समय की जरुरत के अनुरुप केफे भड़ास का शुभारंभ हुआ, 27-ए, चन्द्रनगर, सिडीकेट बैंक के पास, बर्फानीधाम रोड, पर सुसज्जित दो मंजिला भवन में आक्रोश व्यक्त करने के अनेको तरिको के साथ केफे भड़ास शहर वासियों के लिए एक नई सौगात है। शहर के प्रतिष्ठित लोगो पत्रकारों व युवाओं की उपस्थिती में आरंभ किए गए केफे भड़ास में आक्रोश को व्यक्त करने के लिए तोड़फोड़ करने की पूरी आजादी है। 

    इंदौर में भड़ास अपनी तरह का एक अनोखा डेस्टीनेशन है जहां आप जितना चाहे और जितनी तीव्रता से चाहे अपना गुस्सा व्यक्त कर सकते हैं। यदि आप ऑफिस के काम पर या बॉस पर गुस्सा है तो कम्प्यूटर व ऑफिस फर्नीचर को तहस नहस करके अपना गुस्सा व्यक्त कर सकते है। यदि घर परिवार पर या खाने पर गुस्सा है तो घरेलु सामान व बरतनो को तोड़कर अपना गुस्सा निकाल सकते हैं। प्रेम में धोखा हुआ है तो उपहारों को तोड़े और व्यक्ति विशेष पर गुस्सा निकालने के लिए उसके फोटो पर बाक्सिंग के पंच मारे और चाहे तो जमकर अपशब्दों का प्रयोग करे या जोर से रो कर मन को शान्त कर ले। यह सब आप एकदम अकेले कर सकते है जहां आपको कोई देख नहीं रहा है। 

    विदेशो में इस तरह के एंगर रुम अक्सर मिल जाते है लेकिन एक अनूठी बात जो भड़ास में है वह शायद आपको विश्व में कहीं नहीं मिलेगी। यदि आप तोड़फोड़ से थक कर मनपसंद माहौल में शान्ति से बैठना चाहते है या आप बीना कुछ तोडे़ सिर्फ सकुन के कुछ पल बिताना चाहते है तो वह सुविधा आपको सिर्फ भड़ास पर मिलेगी। भड़ास में खुबसूरत फूल और पौधों के बीच झरने की कल-कल में बैठना है या अपनी पसंद को कोई संगीत वाद्य स्वयं बजाकर स्वर लहरियों में खो जाना चाहते है यह आपकी मर्जी है। रंगों से खेलते हुए मनचाही पेन्टीग बनाए अथवा किताबों की दुनिया में खो जाए। र्स्पोटर्स एरिया में जिम का आनंद ले अथवा बचपन के खेल कंचे, लट्टू, चोपड़ इत्यादि का मजा ले सकते है। मिलेट्री एरिया में जाकर स्वयं एक फौजी बन जाए और यदि सिर्फ ध्यान और योगा करना चाहे तो वह भी कर सकते है इतनी सारी सुविधाओं के साथ इंदौर वासियों के लिए भड़ास एक अकल्पनीय जगह है। 

    भड़ास के अतुल मलिकराम ने बताया कि हमारी भारतीय संस्कृति में हम गुस्से को व्यक्त करना उचित नहीं मानते है और व्यक्ति हर छोटे-बड़े गुस्से को मन में दबाकर रख लेता है कभी रिश्तों का कभी नौकरी का व कभी समाज के भय से आक्रोश व्यक्त नहीं करते है। मैंने जब विदेशो में एंगर रुम देखे तो मुझे लगा कि इसकी जरुरत तो हमारे देश में भी है और इसी विचार ने भड़ास को आकार दिया। भड़ास में हमने एंगर रुम से अलग एक और सुविधा जोड़ दी है कि आप अपने पसंदीदा माहौल में सकुन के पल बिताए और यह निश्चित रुप से आपको तनाव से दूर कर देगा।


    इसके साथ ही हमने यहां आने वालों की सुरक्षा व प्राइवेसी पर भी पूरा ध्यान दिया है। आप किस पर कितना गुस्सा निकाल रहे है क्या तोड़ रहे है यह सिर्फ आप तक ही सीमित रहेगा। तोड़फोड़ करने के लिए सुरक्षा का भी पूरा ध्यान भड़ास में रखा गया है। ट्रेक सूट, चश्मा, हेलमेट, ग्लव्ज से लेस होकर पूरी ताकत से मन में दबे गुस्से को निकाले आपको चोट लगने की कोई संभावना नहीं हैं।

    युवाओं में इस केफे के लिए बहुत उत्साह है और ये सभी भड़ास में आकर एक नया अनुभव लेना चाहते है। लेकिन इस केफे में आने के लिए उम्र की कोई सीमा नहीं है। गुस्से को व्यक्त करने की कोई उम्र नहीं होती है और तोड़फोड़ के अलावा मनपसंद माहौल में सकुन के कुछ पल बिताने की इच्छा तो हर एक के मन में रहती है।

    आप यदि एक बार यहां आते है तो आपको जो अनुभव होगा वह शब्दों से परे है। इसके साथ ही विभिन्न सुविधाओं के शुल्क वस्तुओं के दाम तथा विशेष छुट की जानकारी आप केफे भड़ास पर आकर ले सकते है। यदि आपको लगता है कि सिर्फ गुस्सा निकालने से काम नहीं हो रहा है तो आपके लिए परामर्शदाता भी उपलब्ध हो सकते है जो आपकी डिमांड पर आएगे। प्रोफेशनल मनोवैज्ञानिक थिरेपिस्ट व काउन्सलर आपकी जरुरत के अनुसार मार्गदर्शन के लिए उपलब्ध हो सकेंगे।

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