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    Monday, May 1, 2017

    एक सलाम जिला प्रशासन के नाम....


    कहते है प्रतिभा सुविधाओं की मोहताज नही होती। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है आदिवासी झाबुआ जिले के 55 होनहार विद्यार्थियों ने। जिन्होने सुविधा और संसाधनों के अभाव में अपनी मेहनत से जेईई जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा पास की। झाबुआ जिले के गुदड़ी के लालों की इस सफलता पर मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने उन्हे ट्वीट कर बधाई दी है। आदिवासी भौली जिला झाबुआ में जिला प्रशासन ने ठेठ गांव खेड़ो  से इन प्रतिभाओं को खोज निकाला।  ऐसे छात्र जिन्होंने सुविधाओं के अभाव में जेईई  परीक्षा में सफलता हासिल उनसे  वॉइस ऑफ झाबुआ की टीम ने चर्चा की तो काफी कुछ जानने  मिला।

    पिता को याद कर बिलख पड़ा यह रोहित है जिसे मां ने मजदूरी कर आज इस काबिल बनाया की उसने अपनी मेहनत से जेईई जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा पहले की प्रयास में पास कर ली। सुविधाओं और संसाधनों की कमी के बावजुद घर पर करीब 5 से 6 घंटे पढ़ाई कर रोहित ने जेईई की परीक्षा क्रेक की है। अब वह शिक्षकों के मार्गदर्शन में आगे पढ़कर अपनी मां का सपना पुरा करना चाहता है।    
                    
     घर पर बिजली नही होती थी, माता-पिता खेत पर काम करते थे और घर के काम में भी हाथ बंटाना पड़ता था। लिहाजा घर से दूर होस्टल में रहकर पढ़ाई करने का फैसला किया। यह कहानी है काली परमार की जो अपने माता-पिता और गांव का नाम रोशन करना चाहती है। निर्धनता के बावजुद काली आज शिक्षकों के प्रशिक्षण और अपनी मेहनत से अपना एक बेहतर भविष्य गढ़ना चाहती है।                     
    रोहित और काली की ही तरह महेश नलवाया भी जेईई की परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले छात्रों में शामिल है। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक  नही है लिहाजा लंबा सफर तय कर वह झाबुआ पहुंचता है। महेश के माता-पिता खेती करते है और भाई गुजरात में मजदूरी करता है। जईई परीक्षा पास करने के बाद महेश खुश है और आगे पढ़ना चाहता है।                     


    जेईई की परीक्षा पास करने वाले 55 विद्यार्थियों के लिये जिला प्रशासन की मेहनत काबिले तारिफ है। जिला प्रशासन कक्षा 8वीं से ही प्रतिभावान छात्रों को चिन्हित कर उन पर मेहनत करना शुरू कर देता है। विशेष कोचिंग के साथ ई क्लासेस भी विद्यार्थियां को कॉम्पिटेटिव परिक्षाओं की तैयारी के लिये उपलब्ध करवाई जाती है।                     
    जिला प्रशासन को मेरा सलाम ....... 
     आदिवासी झाबुआ जिले के लिट्रेसी रेट देश में निचे से तीसरे पायदान पर है। यहां के विद्यार्थि गणित और विज्ञान विषय में कम रूचि दिखाते है। ऐसे में जिले के 55 विद्यार्थियों के जेईई की परीक्षा पास किये जाने के बाद जिला प्रशासन उत्साहित है और चयनित विद्यार्थियों को बेहतर प्रशिक्षण के लिये निवास सुविधा के साथ इंदौर और अन्य स्थानों से बेहतर शिक्षकों की व्यवस्था किये जाने का दावा कर रहा है।  इस सफलता के लिए जिला कलेक्टर आशीष सक्सेना, जिला पंचायत सीईओ अनुराग चौधरी, सहायक  आयुक्त शकुंतला डामोर, डीपीसी ज्ञानेंद्र ओझा और शिक्षकों  टीम के अथक प्रयासों से ये सफलता हासिल की जिसके लिए मै पुरे  जिला प्रशासन को सलाम करता हु........ 

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