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    Wednesday, June 7, 2017

    बाप बडा न भैया.. सबसे बडा रूपया..... लाख शिकायत करों या आंदोलन.... रूपये बिक गई खाकी


    अभी वक्त नही हुआ प्रशासन के जागने का... अभी तो वो सोया हुआ है... लाख शिकायतें करों या फिर आंदोलन.... क्योंकि यहां न बाप बडा न भैया सबसे बडा रूपया है... और इस रूपए में खाकी बिक चुकी है... तभी तो प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चैहान के निर्देशों के बाद भी प्रशासन सोया हुआ है....। क्यों यहां बाप बडा न भैया... सबसे बडा रूपया है भियां।
    अवैध शराब तस्करी का केन्द्र बना झाबुआ जिले में खाकी शराब माफियाओं के आगे नतमस्तक है। तभी तो मंचों से खाकी के आलाअफसर निंदा सुनने के बाद भी माफियाओं को संरक्षण दे रही है। मैं बात कर रहा है गत् दिनों आयोजित कृषि मेले की.... जिसमें मंच से आबकारी और पुलिस विभाग को फटकार लगाते हुए क्षेत्रीय सांसद कातिलाल भूरिया ने कहा था आबकारी और पुलिस विभाग शराब माफियाओं पर कार्रवाई नही कर रहे है। अवैध शराब के ट्रकों के ट्रकों गुजरात और जिले में खाली हो रहे है और माफिया का कुछ भी नही हो रहा है। क्षेत्रीय सांसद ने शराब माफियाओं के बारे में बहुत कुछ  कहा ... आगे क्या बताउ संबंधित अधिकारी भी वहां मौजुद सुन रहे थे... मंच से भरी सभा में इतने लोगों के सामने इनती बात कहने के बाद भी आलाधिकारियों के कानों में जुं तक नही रैंगी। रैंगेगी भी सभी का पैकेज जो निर्धारित है। कई बार सभाओं में कांतिलाल भूरिया ने जिले में हो रही अवैध शराब तस्करी के मामले को उठाया.... लेकिन खाकी ने कुछ भी नही किया... नाम भी लिए अलकेश और कमलेश.... फिर भी कुछ नही हुआ। क्योंकि  यहां बाप बडा न भैया.... सबसे बडा रूपया है भाई। तभी तो माफिया कहते है पुलिस और आबकारी अपनी जेब में है.... पैकेज जो देते हैं...तो  वो अपनी तीरमदारी करेंगे ही  । 
    औद्योगीक नगरी मेघनगर..... जहां रिहायसी इलाक़े  में देशी और विदेशी शराब की दुकानें हैं..... इन दुकानों का रिहायसी इलाके में होने को लेकर महिलाओं ने इन शराब की दुकान बंद करने के लिए आंदोलन भी किया.... आवेदन भी दिखा। लेकिन जो प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहन  की नही सुन रहे है वो इन महिलाओं की क्या सुनेंगे। इन रिहायसी इलाके में स्थित शराब की दुकान से अवैध रूप से शराब ले जाते हुए रंगे हाथ.... पुलिस ने पकडा... लेकिन यहां भी हेराफेरी होने को थी... पेटलावद का टीपी परमीट तैयार था। लेकिन नागरिकों के दबाव की वजह से ये हेराफेरी नही हो पाई। मेघनगर पुलिस भी यही चाहती थी। अब आबकारी विभाग को भी सबंधित दुकान संचालक के खिलाफ कार्रवाई करनी थी.... लेकिन आबकारी विभाग ने उस ओर देखा तक नही..... क्योंकि इन माफियाओं को सबसे ज्यादा संरक्षण तो आबकारी विभाग ही दे रहा है। तभी तो जब कार्रवाई की बारी आती है तो आबकारी टीपी परमीट का हवाला देता है। क्षेत्रीय सांसद कातिलाल भूरिया ने तो यह भी कहा था कि आबकारी और पुलिस विभाग दोनो ंमिल कर जिले में अवैध शराब लाने से लेकर गुजरात राज्य में पहुंचाने तक शराब माफियाओं को सहयोग देती हैं। 
    इसलिए न तो शराब माफियाओं पर कार्रवाई होगी.... और न ही अवैध शराब पकडी जायेगी। क्यों इन आलाअफरों के लिए न बाप बडा न भैया सबसे बडा रूपया है। 


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