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    Tuesday, June 13, 2017

    . शानदार, जबर्जस्त, जिन्दाबाद कलेक्टर एवं सीईओ साहब.......अब प्रदेश ही नही देश में भी जिले का नाम रोशन करेंगे हमारे छात्र


    आदिवासी बाहुल्य जिला झाबुआ जो की अकसर साक्षरता के मामले में फिसडी रहा हैं..... जो जिले में कलंक के रूप में साबित हो रहा था... लेकिन यहां पदस्थ अधिकारियों ने इस कलंक को मिटाने के लिए कमर कस ली और आखिरकार वर्तमान में पदस्थ कलेक्टर आशीष सक्सेना और जिला पंचायत सीईओ अनुराग चौधरी ने गरीब आदिवासी बच्चों को एक नई दिशा प्रदान की और इसका परिणाम यह हुआ की जेईई जैसी कठिन परीक्षा में पहली बार झाबुआ जिले के पचपन आदिवासी बच्चों का इसमें चयन हुआ।

    इन 55 बच्चों को नई दिशा देने के लिए कलेक्टर आशीष सक्सेना और सीईओ अनुराग चौधरी ने सतत् इन बच्चों को मार्गदर्शित किया और जिले बेस्ट शिक्षकों से इन्हे कोचिंक करवाई गई। जिले ही नही वरन् आगे की तैयारी के लिए इन बच्चों को इंदौर भी भेजा गया। और आखिकार जेईई मेन्स में जिले आठ बच्चों का चयन हुआ। माता पिता तो ठिन इन बच्चों को भी इस परीक्षा के बारे में जानकारी नही थी। लेकिन दोनों ही अधिकारियों ने आदिवासी बच्चों को एक नई दिशा प्रदान की। वहीं आदिवासी विकास विभाग सहायक आयुक्त श्रीमती शकुन्तला डामोर द्वारा भी इन बच्चों को लिए कडी मेहनत की गई। 
    देवीगढ का इंद्रा
    जिले के सुदुर अंचल देवीगढ में रहने वाला इंद्रा जिसके माता पिता खेती के साथ साथ पलायत कर मजदुरी के लिए अन्यत्र जाते है का जेईई में जिले से प्रथम स्थान पर चयन हुआ। लगभग 12 घंटे की मेहन करने वाला इन्द्रा का चयत पिछले साल भी हुआ था... लेकिन प्रिपेटरी में होने के कारण इन्द्रा नही गया और  उसने तय कर लिया की उसका सीधे प्रवेश  होगा तो ही वो जायेगा और आखिरकार उसने इस बार कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ के मार्गदर्शन में एक बार फिर जेईई की परीक्षा दी और प्रथम स्थान प्राप्त किया। माॅडल स्कूल अगराल में पढने वाला इन्द्रा को नही पता था की जेईई क्या है... लेकिन गणित में उसके अच्छे नम्बरे देख आदिवासी विकास विभाग सहाकय आयुक्त ने उसे गणित विषय लेने के लिए प्रेरित किया और उसके बाद कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ ने उसका हौसला बढाया..... तो उसने भी मेहनत में कई कसर बाकि नही रखी और आखिरकार वह प्रथम पायदान पर चुना गया। 
    नौगांवा का रमसु

    सजेली का रहने वाले रमस के माता पिता भी खेती करते है और खेती के अलावा आय का अन्य साधन नही होने की वजह से मजदुरी के लिए भी जाना पडता था। ऐसे में रमसु अपने माता पिता को खेती में हाथ बटाने के साथ साथ अन्य काम भी करता रहता था। रमसु का जेईई की इस परीक्षा में 2906 रेंक मिली है.... रमसु इस परीक्षा के लिए घंटों पढाई करता था उसका सपना था कि वह अच्छा पढ लिख कर जिले का नाम रोशन कर सके और उसके माता पिता को मजदुरी न करना पडे। 

    झाबुआ का आशीष वर्मा 
    आशीष वमा्र झाबुआ के उत्कृष्ट स्कूल का छात्र है और आशीष के पिता पेशे से इलेक्ट्रीशीयन का काम करते है वहीं माता गृहणी है... आर्थिक कारणों की वजह से आशीष फार्म भरना नही चाहता था.... कोचिंग और अन्य सुविधाओं में काफी खर्च होने का सोच इस परीक्षा में भाग लेने का नही सोच रहा था लेकिन पिता ने उसका हौसला बढाया और फार्म भी उनके द्वारा ही भरा गया। वहीं प्रशासन के हौसले और पिता के विश्वास की वजह से आशीष की मेहनत रंग लाई और उसने 5010 रैंक बनाई। 
    आदिवासी बाहुल्य जिले में जेईई में चयनित हुए सात छात्र एवं एक छात्रा े यह साफ कर दिया की यही मार्गदर्शन मिले तो गांव के बच्चे भी हुनरमंद साबित हो सकते है। अभी तक जेईई परीक्षा का सपना तक नही देखने वाले ये आदिवासी बच्चें आने वाले दिनों में झाबुआ का नाम रोशन करेंगे और इसका पूरा श्रेय जिला पंचायत सीईओ अनुराग चौधरी, कलेक्टर आशीष सक्सेना और आदिवासी विकास विभाग सहायक आयुक्त शकुन्ताला डामोर  को जिन्होने इस बच्चों के लिए कोचिंग क्लासेस प्रारंभ की और स्वयं ने जाकर इन बच्चों को मार्गदर्शित किया और पहली परीक्षा में पचपन बच्चों का चयन हुआ और मेन्स में आठ बच्चें चयनित हो गए.... प्रदेश के मुखिया शिवराजसिंह चैहान ने भी इन बच्चों को बधाई दी। 

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