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    Tuesday, June 13, 2017

    कलेक्टर साहब हमारी भी सुन लो....... हम भी कृषि क्षेत्र में शिक्षा लेना चाहते है......


    झाबुआ। जिले में कृषि शिक्षा की नितांत आवश्यकता है। झाबुआ जिला आदिवासी बाहुल्य जिला है यहां अधिकांश ग्रामीण खेती पर निर्भर है। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा का स्तर अच्छा नही होने की वजह से छा़त्रों को अच्छी शिक्षा नही मिल पाती है। ऐसे में उन्हे अच्छी शिक्षा के लिए अन्यत्र जाना पडता है। खेती पर निर्भर होने की वजह से ग्रामीण बच्चें अन्यत्र शिक्षा लेने में असक्षम होते है। वहीं कृषि क्षेत्र में शिक्षा 12 वीं के पश्चात यहां नही मिल पाती है। ऐसे में छात्रों की शिक्षा अधुरी रह जाती है। इस तारतम्यता में कृषि शिक्षा प्राप्त करने के लिए जिले के एग्रीकल्चर संकाय के छात्रों द्वारा कलेक्टर आशीष सक्सेना को जिले में महाविद्यालय खोलने के लिए ज्ञापन सौंपा। 
    ज्ञापन में बताया कि षिक्षा सत्र 2017 -18 अतिशीघ्र प्रारंभ होने जा रहा है, शिक्षा ही मानव विकास का आधार है... शिक्षा को बढावा देने के लिए शासन की कई योजनाएॅ भी क्रियान्वित है बावजूद इसके भी शिक्षा स्तर जिले में निम्न स्तर का है विशेष ग्रामीण क्षेत्र का।
    झाबुआ  जिला कृषि प्रधान क्षेत्र है, क्षेत्र मेें कृषि संकाय से संबंधित विषयों को पढाने के लिए अध्यापकों की संख्या बहुत ही कम है... इससे कृषि विषय की अध्ययन की गुणवता पर बहुत बुरा असर पड रहा है। शासन प्रशासन को यह विदित होवे कि कृषि विषय में एवं कृषि महावि़द्यालय नही होने के कारण प्रति वर्ष लगभग 400 से 500 आदिवासी विद्यार्थियों को मजबूरन विषय बदलकर स्थानीय महाविद्यालय में अन्य विषयों में प्रवेश जिनका उन विद्याथियों को बेसिक ज्ञान नही होने कारण भी लेना पड रहा है।, जो कि मानव विकास का सबसे बडा धब्बा है। होनहार विद्यार्थी जो जिले का भविष्य है, इससे यह स्पष्ट हो जाता कि आदिवासी व अन्य विद्यार्थियों के साथ जानबूझ कर खिलवाड किया जा रहा है। 
    कृषि संकाय में अध्ययनरत छात्र एवं उनके अभिभावक बैचेन एवं असमंजस में है। उनकी पीडा एवं दर्द क्षेत्र क ेलिए बडे दुःख का विषय है उनका भविष्य अंधकार मे है। वह ये जानना चाह रहा हे कि अब वे आगे क्या करे..? कृषि विषय में उच्च विषय में एक और बहुत मंहॅगा है दूसरा राज्य के महाविद्यालय अति दूर स्थित है। जहाॅ वे अध्यन के लिए समय पर कभी नही पहॅच पाएॅगे। अतः विधार्थी एवं माता पिता एवं शुभचिंतक माननीय शासन प्रशासन से प्रार्थना करता है झाबुआ जिले में कृषि महाविधालय इसी सत्र 2017-18 में खोला जाकर झाबुआ, एवं निकटतम राज्यों के कृषि में इच्छुक अध्ययनरत छात्रों को लाभान्वित करें। 
    झाबुआ एवं अलिराजपूर, दाहोद, बांसवाडा, रतलाम, धार इत्यादि क्षेत्र मिश्रित एवं पारंम्पारिक खेती के लिए बहुत प्रसिद्व था। विविधता के लिए जाना माना क्षेत्र था। यह क्षेत्र में मानव स्वास्थ्य की उत्तम वस्तुएॅ एवं खाद्वायन उपलब्ध है जिन्हे संजोए रखना एवं इस धरोहर को बनाए रखना स्वच्छ पर्यावरण की माॅग है व आवष्यकता भी है।  इन्दौर कृषि महाविद्यालय को आदिवासी क्षेत्र ने बहुत कुछ सिखाया एवं समझाया है।  इस अवसर पर अनिता डामोर, सीमा डामोर, हिना डामोर, जया भूरिया, रेशमा भाबोर, प्रीयंका परमार, सुष्मिता डामोर, ममता मचार अंजली भाबोर, लवलीन  भूरिया, अविनाश डाबी, स्नेहा गणावा, मोनिका डामोर, प्रसन्ना डामोर, आराधना डामोर, कलसिंग अनिल मेडा, रोहित डामोर आदि उपस्थित थे। 
    वहीं छात्रों की मांगों को सुन कलेक्टर अंाशीष सक्सेना ने उन्हे आश्वासन दिया की काॅलेज की बात वरिष्ठों तक पहुंचाएंगंे। थांदला, पेटलावद और झाबुआ में एग्रीकल्चर संकाय के छात्रों के लिए निःशुल्क कोचिंग क्लास जल्द ही चालु कर दी जायेगी। जिससे छात्र आगे की तैयारी कर सके।


    1 comment:

    1. झाबुआ,रतलाम व धार जैसे आदिवासी बहुल जिलो मे कृषि विषय से सम्बन्धित छात्र- छात्राओ के भविष्य की ज़म्मेदारी स्कूल मे पढ़ाने वाले शिक्षकों पर ही निर्भर है लेकिन इन जिलों मे कृषि विषय के छात्रों की संख्या बहुत ही अधिक है व यह संख्या प्रतिवर्ष बढ़ती ही जा रही है!ऐसी स्थिति मे स्चूलौ मे well quaalify शिक्षकों की भी संख्या मे भी वर्द्धि करने की अत्यंत आवश्यकता है !..कृषि विषय कॊ 12 वी के बाद पढ़ना बहुत ही कठिन काम हो जाता है !

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