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    Friday, July 14, 2017

    खुशी की खोज की हकदार है पुलिस.......... माता पिता क्यो उलझा रहे है फ़िल्म


    भियां सुबे से जोरदार बारिश हो री थी.... तो घर से निकलने का मन ही नी कर रिया था.... लेकिन अपनी परिपाटी में से एक दोस्त का फोन आ गिया.... कि भाई कहां हो..... सब लोग अडडे पर आ गिये... तुम घर में घुस कर क्या कर रिये हो ..... भियां दोस्त की बात सुन मैं भी अडडे पर चल दिया..... अडडे पर बैठ भियां चाय की चुस्कियां ले ही रिया था कि दो दोस्त और आ गिये..... और कहने लगे आजकल तुम दिख नी रिये हो.... तो मैंने किया भियां रोज तो घुम रिया हुं.... कोई मिस्टर इंडिया तो नी हुं की तुमकों दिखुुंगा नी... ।

    तो भियां दोस्त केने लगे कल तुम पुुलिस की प्रेसवार्ता में क्यों नी आए.... मालुम है कई महिनों के बाद खुशी मिल गई है.... हमने सुना है पुलिस बिना वजह की खुशी को खोज निकालने की वाहवाही लुट री है....। तो मैने किया भियां प्रेसवार्ता की तो मुझे कोई जानकारी नी मिली.... अगर मिलती तो मैं जरूर नाश्ता पानी करने जाता... पर ऐसा लग रिया है कि पुलिस ने मेरे नम्बर ब्लेंक लिस्ट में डाल दिए है..... खैर अब बात खुशी की है तो एक बार के दुं.... केने वाले कुछ भी के.... हकिकत तो ये है की पुलिस ने बडी मशक्कत के बाद खुशी को खोज निकाला है....। 
    दोस्त केने लगे तो फिर ये बात क्यों चल री है की खुशी को उसके पिता ने खोजा ..... तो मैंने किया... भियां खुशी का घर मेरे घर से चंद कदमों की दुरी पर है.... जिस दिन खुशी गुम हुई थी... उस दिन से में सतत् पुलिस के साथ जुड कर रे रिया थां...... की खुशी मिल जाए.... भियां पुलिस का नी गई.... पुलिस को पता चला इंदौर गई तो पुलिस इंदौर गई.... खुशी परिजनों के यहां होगी.... तो पुलिस परिजनों के यहां गई..... भियां जिस दिन से खुशी गुम हुई थी उस दिन से मोहल्ले वाले उसे खोज रिये थे... पुरा मोहल्ला इकटठा होकर पुलिस कप्तान महेशचंद जैन से गुम खुशी को ढुडने के लिए गुहार लगाने भी गिया था.... पुलिस कप्तान ने जल्द ही खुशी को खोज लाने का आश्वासन देने के साथ..... जो भी खुशी को खोज लाएगा उसे ईनाम देने की घोषणा भी की थी..... काफी मशक्कत के बाद आखिरकार पुलिस ने खुशी को खोज निकाला....। भियां इसके लिए तो पुलिस कप्तान महेशचंद जैन,  पुलिस उप कप्तान श्रीमती रचना भदौरिया और उनकी टीम का साधुवाद करना चाहिए की उन्होने एक मासुम सी बेटी को बिकने से बचा लिया....। 
    मैने दोस्तो को किया.... भियां जो सोशल मीडिया पर जो आ रिया है.... बो बिल्कुल गलत है..... अभी भी असली हकिकत तो किसी को भी पता नी चली है.... खैर खुशी अब अपने घर खुशी खुशी रे री है। 
    भियां दोस्तों ने एक सवाल और दाग दिया.... तो पुलिस को खुशी मिली कैसे.... तो मैने किया.... भियां तुमकों मालुम नी कानुन के हाथ कितने लंबे होते है.... पुलिस को मुखबिर की सुचना.... और फिर पुलिस ने मुखबिर से कह उसका फोटो मंगवाया.... पुलिस ने खुशी के दोनों फोटो का मिलना किया.... तो गुम हुई खुशी गुजरात में ही है इसका पुलिस को पता लग गिया.... पुलिस ने उसके पिता को किराया भाडा देकर खुशी को देखने भेजा.... तो उसके पिता ने भी पुष्टि कर दी की वो खुशी ही है.... फिर पुलिस की टीम गुजरात गई और खुशी को झाबुआ लेकर आई....। तो भियां अब आप लोगों को समझ में आ गिया होगा की खुशी को आखिर कौन लाया....। 
    भियां अब मैं चलता हुं.... मगर जाते जाते एक  ओर बात बिता दुं..... पैसों कें लिए कौन क्या नही कह देता है.... ऐसा ही कुछ इस कुटुम्ब का हाल है.... पैसों के लिए कुछ भी कह देते है... इसलिए इनकी झुठी बातों में न आओं..... असल में पुलिस ही खुशी को लेकर आई है.... अब जा रिया जय राम जी की.....। 

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