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    Monday, August 28, 2017

    5 रूपए में रोटी बेचने वाला चला नर्सिंग काॅलेज खोलने..... गरीबों के मुंह का निवाला छिनन ....... अब करेगा छात्रों का भविष्य धुमिल



    झाबुआ जिला एक आदिवासी बाहुल्य जिला है... यहां उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए गरीब आदिवासी बच्चों को अन्यत्र पढने के लिए जाना पढता है। ऐसे में अपनी गरीबी के चलते इन छात्रों को बडे शहरों में शिक्षा ले पाना मुश्किल हो रहा था। ऐसे में आदिवासी छात्रों को जो उचित शिक्षा मिलनी चाहिए थी वो नही मिल पाती हैं। जिसे देखते हुए एक छोटी सी संस्थान शारदा विद्या मंदिर चलाने वाले ओम शर्मा ने शिक्षा के क्षेत्र में आगे आते हुए जिले में पहला सीबीएससी स्कूल खोल डाला.... आधुनिकता के इस दौर में गरीब आदिवासी बच्चों को शिक्षा के लिए इधर उधर भटकता देख इस संस्थान के सदस्यों ने उच्च शिक्षा अपने जिले में चालु करने के लिए अपने अपने माध्यमों से उच्च शिक्षा चालु करने का प्रयास किया और इसी प्रयास की वजह से संस्थान के सदस्यों को हर तरफ से सफलता हासिल हुई। जिसके चलते जिले में पहली बार इस संस्थान के सदस्यों द्वारा नर्सिग , डीएड और बीएड काॅलेज खोले गए। जिसके चलते ग्रामीण छात्रों को जिले में ही इस तरह की उच्च शिक्षा मिलने लगी। इस संस्था के माध्यम से कई ऐसे छात्र जो अपनी फिस नही भर पा रहे उन्हे भी सहयोग प्रदान किया जा रहा है।
    लेकिन इन दिन  शिक्षा का व्यवसायिकरण भी बढता जा रहा है....कुछ रसुखदार लोग इस तरह की संस्थाएं इस लिए खोलते है जहां  शिक्षा देने की बजाय शिक्षा के नाम पर गाढी कमाई की जा सके। शिक्षा के व्यवसायिकरण के दौर में एक 5 रूपए में रोटी बेचने वाले गबलु की नजर शिक्षा के क्षेत्र में पढ गई और वो शिक्षा के नाम पर कमाने के चक्कर में जिले में नर्सिंग काॅलेज खोलने के लिए इधर उधर हाथ मारने लगा। इसी दौरान गबलु को नर्सिग काॅलेज खोलने की अनुमति मिल गई। 
    अंदर खानों की खबर रखने वाले बताते है कि गबलु के मंत्री शाह से अच्छे संबंध है इन संबंधों की वजह से मंत्रीजी के साथ मिलकर गबलु ने पीडीएस में खुब माल कमाया.... इसी दौरान गबलु की नजर शहर के मध्य स्थित शासकीय भूमि पर पढ गई.... तो गबलु से मंत्रीजी के सहयोग और तात्कालीन एसपी से सांठगाठ कर उस जमीन पर 5 रूपए में रोटी सब्जी देने के नाम पर घुमटी तान दी। मगर जब गबलु के मनसुबे पुरे नही हुए 5 रूपए में रोटी देना बंद कर दिया। 5 रूपए में रोटी देना भी एक बहाना था.... मामला तो बस पीडीएस से कमाना था.... ।
    अब गबलु को शिक्षा के क्षेत्र में अच्छी कमाई दिखाई देने लगी...  और मंत्रीजी के सहयोग से उसे नर्सिग काॅलेज की मान्यता भी मिल गई थी... लेकिन गबलु के लिए पूर्ण रूप से नर्सिंग काॅलेज क्रियान्वित करना समझ से परे था... क्योंकि गबलु को तो सिधे सिधे गरीबों के मुंह का निवाला छिनने की आदत थी.... ऐसे में एक और समस्या उसके सामने खडी हो गई माॅ त्रिपुरा नर्सिग काॅलेज जहां उचित शिक्षा के साथ साथ .... संस्था द्वारा शिक्षा को लेकर छात्रों को हर तरह से मार्गदर्शित किया जाता है.... ऐसे में इस प्रतिस्पर्धा के दौर में उक्त काॅलेज गबलु के लिए गले की हडडी बन गई... इस हडडी को निकलने के लिए गबलु ने मंत्री से लेकर अधिकारी तक को उक्त संस्थान को निपटाने के लिए शिकायतें करना चालु कर दी और बन गए आरटीआई कार्यकर्ता .... अब गबलु को त तराजु का ज्ञान था... अब नर्सिग और डीएएड, बीएड के किस किस किस युनिवसिटी के पास कौन कौन सी मान्यता होती है.... कौन सी मान्यता प्राप्त संस्था को पात्रता दी जाती है का ज्ञान तो था ही नही.... तो पढ गए उक्त संस्थान और संस्थापक के पिछे.... शिकायतों पर शिकायते इसको जांच करने के लिए भेजा.... उसको जांच करने के लिए भेजा लेकिन आखिर में क्या हुआ.... उक्त काॅलेज इन सारी शिकायतों से बाहर आ गया। जल्द ही उक्त संस्थाओं को क्लिन चीट मिल जायेगी तो फिर क्या होगा। 
    छात्रों को गुमराह करने की की जा रही है कोशिश
    उक्त संस्थान पर आरोप प्रत्यारोप लगाकर उसकी छवि धुमिल करने की कोशिश की जा रही है। कुछ ऐसे लोग जो शिक्षा को व्यवसाय समझते है वो इस तरह का कृत्य करते नजर आ रहे है। ताकि छात्र-छात्राओं को गुमराह किया जा सके।

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