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    Sunday, September 17, 2017

    रसुखदार व्यापारी टोली का मुखिया .......समाज सेवा के नाम पर करवा रिया नाबालिकों से मुर्रम की चोरी.....


    लो भियां मैं फिर आ गिया..... कुछ कही-अनकही के साथ...... भियां आजकल समाजसेवा दुकानदारी बन गी है.... जिसे देखों समाजसेवा का छोला ओढ लोगों का खुन चुसने में लगा है.... ऐसा ही कुछ रसुखदार व्यापारियों की टोली और उनका मुखिया कर रिया है.... मंचों पर खडे रह का हाथों में माईक लिए.... लोगों को ये ज्ञान तो बांट रिये है.... लेकिन खुद पर अमल नी कर रिये है.....भियां ये फोटो छाप टोली...... नगर में आग में घी डालने का काम कर री है या फिर यूं कहें महिलाओं की तरह इधर की बात उधर और उधर की बात इधर करने में कोई छुक नी करती है.... ये टोली मंचों पर तो बडी बडी बाते हांकती है.... लेकिन धरातल पर फुंस्स सी नजर आ री है...। 
    भियां सेवा के नाम पर ये रसुखदार व्यापारियों की टोली.... काजु बादाम खा रिये है और छिल्के समाज को दे रिये है.... इस टोली ने समाज का नही.... हमेशा अपना ही हित देखा है.... नही तो आज छोटे तबके के व्यापारियों को बैठने के लिए उचित जगह..... उनकी समस्या.... गुमाश्ता कानुन.... और लोगों को शव वाहन..... मिल जाता.... भीतरघातियों की तरह नपा चुनाव में भी इन्होने कुछ कसर नही छोडी....ये इतने बडे नेता बन गए... की प्रत्याशियों को नम्बर देने लग गिये..... और खुद को समाजसेवी दिखा कर प्रशासन में अलग अलग संस्था के नाम पर माल कमा रिये है....
    भियां समाजसेवी का छोला ओढे ये टोली और इनका मुखिया मंचों से जो ज्ञान बांट रिये है.... उनमें से एक ज्ञान की बात हमें भी पता चल गी.... जो मैं आपकों बिता रिया हुं .... भियां प्रशासन ने छोटे तालाब के सौन्र्यीकरण के लिए मुर्रम डलवाया था... उसे इस टोली के मुखिया ने नाबालिक बच्चों कों मजदुरी के नाम पर इकटठा कर...... उनसे रास्तें में पडी मुर्रम..... चोरी करवाकर... उसे अपने निजी स्थान पर डलवा दी..... और उस चोरी की मुर्रम से अपनी निजी जगह को समतल करवाया..... भियां बात मुर्रम की नही.... बात नाबालिक को मुर्रम चोरी करवाने की है..... जो टोली मंचों पर बाल मजदुरी... चोरी नही करने आदि का ज्ञान बांट री है...... वो इस तरह से कई काले कारनामें समाजसेवा के नाम पर कर री.... भियां दिवंगत आदिवासी नेता के कार्यक्रम में भी 7 लाख का ़ित्रपाल 8 लाख में इस मुखिया ने लगाया था और बात ईमानदारी की कर रिया है।  
    भियां अब मैं चलता हुं... लेकिन जाते जाते एक ओर बात बिता दुं.... ये रसुखदार व्यापारियों की टोली जो अपने किए कामों का डंका बजा री है.... उसने तो... अंतिम शययागाह के लिए भी कुछ नी किया.... सारा पैसा  किसने दिया ये सब जान रिये है.... अब लोगों को उल्लु बनाना इनकी आदत बन गी है.... और इस आदत की वजह से.... अपने गरीमामय पद की छवि भी धुमिल कर रिये है.... अब मैं जा रिया.... जय रामजी की। 


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