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    Thursday, January 4, 2018

    न तो काला हुं... और न काले कारनामें कर बदनाम होता हुं....... दे दिया हाथ में प्याज तो छिलके निकाल रिया हुं..... बैठा...... बैठा......


    भियां राम राम..... बार बार नए साल का अब नमस्कार नी करूंगा..... दे दी सब लोगों ने एक दुसरे को खुब बधाईयां....  मैने भी सबको दे दी... खत्म हुआ दौर बधाईयों का......मैं तो कर रिया हुुं. दौर शुरू..... सिधे सीधे बुराईयों का... भियां बुरा मत मानना सबको येई लग रिया है की मैं बुराईयां करने जा रिया हुं.... बुरा तो उन काले मन वाले काले लोगों को लगेगा जो खुद तो काले है और कारनामें भी काले करते है..... और बता रिये है अपने आप को वाषिंग पावडर नीरमा से धुला... सफेदझक.... दुध की तरह... मैं तो साफ के रिये हुं भियां.... न तो मैं काला हुं ......और न मेरा मन काला है.... और न तो मेरे कारनारमें काले है...... मैं तो बैठा बिठाईयेला था...... पर बुराई झेलने के आदि लोगों ने फुर्सत मैं बैठेला देख... पकडा दिया मुझे प्याज... छिलके निकालने को..... अब भलेई छिलके निकालने में आंखों में आंखु आए या पडोसियों को प्याज की गंध सहन न हो... अब जो आदत सी लगा दी.... प्याज छिलने की तो अब निकाल रिया हुं छिलके......। 
    मुझे नी पता था कि एक बाप सामान्य समाज का है..... तो उसका बेटा पिछडे वर्ग का कैसे हो गिया...... भियां ये तो वो नुमाईदें जाने जिन्होने ऐसे काले लोगों के कारनारमें में सहयोग किया........ अब ये ही काले लोग काले धंधों के बाजार के बेताज बादषाह बन गिये। कभी मजहबी इबादत के दौर में भियां लोग कानुन व समाज विरोधी काम करते... शहर से बाहर पकडाए तो...... कभी शहर में भी पकडाए... फिर भी शर्म नाम की चीज नी है... लोक लाज रख दी ताक में.... मिल गया.... थोडा सा जनादेष तो बन गए...... चुहें को चिन्दी मीलने वाली तर्ज पर बजाज जी...... और जाना शुरू कर दिया मसाज करने और उसके बहाने देहीक सुख पाने स्पा में... भियां झुठ नी बोल रिया हुं...... ये सब तो फुर्सत में बैठेला देख काले कारनामें बाज... प्याज पकडा गए..... तो छिलके निकालते निकालते नजर आ रिया हैं कि ये तो सब हमाम में..... इसमें अब बुरा लगने वाली बात ही नी है... और लगे तो लगे.... ये तो प्याज की परतों में दिख रिया है.... अब भले जिला बदर की कार्रवाई साम.... दाम... दंड... भेद रूकी पडी हो... या सैंकडों बहारियों के राषन कार्ड व निवासी प्रमाण पत्र.... ये तो प्याज का अगला छिलका निकालने पर पता लगेगा..... भियां मैं भी फुंर्सत में नी हुं..... मुझें और भी प्याज के छिलके निकालना है..... जा रिया मैं तो अब....... जय राम जी की। 

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