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    Monday, January 22, 2018

    खेती से हुआ लाभ.... तो छोड दिया टेलरिंग का काम..... बालु की तरह आप भी बनाये खेती को लाभ का धंधा........


    झाबुआ। राणापुर में किराये की दुकान लेकर सिलाई का व्यावसाय करने वाले बालूसिंह को उद्यानिकी फसले ऐसी रास आई कि उन्होने सिलाई का धंधा छोडकर खेती को ही अपना व्यावसाय बना लिया है। ग्राम समोई ब्लाक राणापुर में रहने वाले बालुसिंह पिता नाथूसिंह ने अब उद्यानिकी फसलो के उत्पादन का प्रशिक्षण लेकर विकास की रफतार पकड ली है। वैज्ञानिक तकनीको और शासकीय अनुदान का उपयोग कर वे क्षैत्र के अच्छे किसानो की श्रैणी में आ गये है। तकीनीकी ज्ञान की कमी एवं संसाधन सीमित होने से वह कड़ी मेहनत के बाद भी अपनी आय में वृद्धि नहीं कर पा रहे थे। किन्तु जब बालूसिंह ने किसान भ्रमण कार्यक्रम के दौरान अन्य किसानो की फसले देखी एवं वैज्ञानिक तकनिकों और उद्यानिकी विभाग से प्राप्त 55 हजार रूपये शासकीय अनुदान का लाभ लिया तो वह विकास की अग्रिम पंक्ति में आ गये। खरीफ फसल से 4-5 हजार वार्षिक कमाने वाले बालूसिह पिता नाथुसिंह खेती में वैज्ञानिक तकनिकी एवं ड्रीप सिंचाई का उपयोग कर कम पानी होने के बाद भी एक एकड खेत से 75 हजार वार्षिक कमा रहे है। बालूसिह ने 2016 में अपने खेत में टमाटर की फसल लगाई एवं उद्यानिकी विभाग से ड्रींप सिंस्टम अनुदान योजना में ड्रीप लगाई। टमाटर से प्राप्त आमदनी के बाद बालूसिह ने खेती करने का ही प्लान बना लिया। अब वह अपने खेत में ही और अधिक उद्यानिकी फसले लगाकर आय अर्जित करना चाहते है जिससे परिवार का अच्छे से विकास हो सके।
      झाबुआ जिले के राणापुर ब्लाक के ग्राम समोई में रहने वाले कृषक  बालूसिह ने चर्चा के दौरान बताया कि उसके पास सिंचाई के लिये एक कुआ एवं  ट्यूबवेल है जिससे गेहूॅ चने की फसल की सिंचाई अच्छे से नहीं हो पाती थी। इस वजह से उसे परिवार के भरण पोषण के लिये राणापुर में सिलाई मशीन का काम करना पडता था। सिलाई कार्य से लाभ नहीं हुआ। फिर बालूसिंह को किसान भ्रमण कार्यक्रम के तहत पेटलावद एवं कुक्षी में उन्नत किसानो के खेत देखने का अवसर मिला और उन्होने खेती करने की तकनीको का भी ज्ञान प्राप्त किया और उद्यानिकी फसल उत्पादन की ठानी। उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों के सम्पर्क में आने के बाद षासन से ड्रीप सिंचाई सिस्टम एवं फल सब्जी उत्पादन का तकनीकी मार्गदर्शन प्राप्त किया। खेत में गोभी, बैंगन, टमाटर, मटर, प्याज, लहसुन इत्यादि फसल लगाई। इससे उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ हुई। ड्रीप इरीगेशन सिस्टम लगाने से पहले वह सिर्फ खरीफ की ही फसल कर पाते थे। वह अपने खेत में गेहूॅ चना बोते थे, लेकिन सिंचाई के लिए पानी की कमी की वजह से उत्पादन नहीं हो पाता था। ड्रीप लगाने से टमाटर की खेती से 75 हजार की आमदनी हुई उससे बालूसिंह ने आवागमन के लिए मोटर साईकिल खरीद ली एवं अपने दो बच्चो की शिक्षा भी अच्छे निजी स्कूल में करवा रहे है।


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