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    Monday, January 8, 2018

    सफलता की नई कहानी.......बैंक सखी बनकर सीमा पंचाल को मिली एक नई पंहचान


    झाबुआ। शासन द्वारा महिला सक्तिकरण के लिए किये जा रहे प्रयास  अब फलीभूत होकर सामने आने लगे है मध्यप्रदेश शासन द्वारा ग्रामीण क्षैत्र की महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में सार्थक सहयोग किया जा रहा है। ग्रामीण महिलाएॅ पलायन कर मजदूरी करने गृह कार्य करने के साथ ही स्वयं का स्वरोजगार स्थापित कर परिवार का भरण-पोषण कर रही है। और नये आत्म विश्वास के साथ विकास के नये आयाम तय कर रही है। 
    झाबुआ जिले के रामा ब्लाक के ग्राम खरडूबडी की सीमा पंचाल ने मध्यप्रदेश शासन की स्वरोजगार ऋण योजना एवं स्वरोजगार प्रशिक्षण का लाभ लेकर स्वयं का व्यावसाय प्रारंभ कर अपनी पहचान बैंक प्रतिनिधि के रूप में स्थापित कर ली है। कक्षा 8 वी तक पढी सीमा अपने क्षेत्र में बैंक अधिकारी के रूप में कार्य करती है। ग्रामीणो के बैंक संबंधी छोटे-छोटे लेन देन का काम करती है, जिससे हर ट्रांजिक्सन पर बैंक की तरफ से कमीशन मिल जाता है एवं ग्रामीणो को घर बैठे बैंक की सुविधा। चर्चा के दौरान सीमा ने बताया कि मध्यप्रदेश शासन की ऋण योजना एवं स्वरोजगार का प्रशिक्षण प्राप्त करने के पूर्व  वह घर के काम के साथ साथ किराना की दुकान एवं आटा चक्की के काम में परिवार का सहयोग करती थी। जिससे मासिक 4-5 हजार रूपये की आमदनी हो जाती थी। इतनी कम राशि से परिवार का भरण-पोषण संभव नहीं हो पाता था एवं कभी-कभी तो बच्चो के स्कूल की फीस भरने का संकट भी पेैदा हो जाता था।
    आजीविका मिशन के संपर्क में आने के बाद उसका चयन बैंक सखी के रूप में हुआ। बैंक सखी का काम आगे बढाने के लिए बैक से 1 लाख रूपये दिसम्बर 2016 में मुख्यमंत्री आर्थिक कल्याण योजना में ऋण लेकर बैंक का कार्य करने के लिये लेपटाॅप इन्टरनेट कनेक्शन एवं कियोस्क सेन्टर चलाने के लिये आवश्यक उपकरण खरीदे एवं कार्य प्रारंभ करने के लिए आर सेटी संस्थान बैक आॅफ बडौदा से प्रशिक्षण प्राप्त किया। सीमा बताती है कि उसने कभी यह नहीं सोचा था कि बैंक सखी के रूप में काम करने पर उसे इतना सम्मान मिलेगा और पैसा भी। पहले वह बडे अधिकारियों से बात करने में संकोच करती थी और घर से बाहर निकलना तो मानो असंभव सा प्रतीत होता था। बैंक सखी बनने के बाद आत्म विश्वास बढा और बडे अधिकारियों से संपर्क होने से काम और आसान हो गया। बैंक सखी के रूप में चयन होने के बाद दिल्ली जाने का अवसर भी मिला जो ग्रामीण महिला के लिए सिर्फ सपना ही रहता है। मैने कभी नहीं सोचा था कि सिर्फ 8 वी पास होने पर भी  मुझे इतना अच्छा व्यावसाय मिलेगा। सीमा बताती है कि उन्हे लेपटाप के बारे में बिल्कुल भी जानकारी नहीं थी और कम्प्यूटर  व लेपटाप की बटन पर हाथ रखने में भी डर लगता था। अब प्रशिक्षण के बाद वह पूरे आत्मविश्वास के साथ बैंक का काम कर रही है। बैंक संबंधी कार्य करके 10-12 हजार रूपये प्रतिमाह आय अर्जित हो जाती है। जिससे परिवार का भरण-पोषण बहुत अच्छे से हो पा रहा है एवं बच्चो की शिक्षा भी वह निजी स्कूलों में करवा पा रही है।

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