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    Wednesday, May 10, 2017

    चाय बेचते बेचते कैसे बन गिये छत्रु, वीनु और मन्नु शराब माफिया




    भियां सबको मेरा नमस्कार.... कैसा क्या चल रिया है.... भियां एक चाय बेचने वाला... देश का प्रधामंत्री बन.... देश की तस्वीर ही बदल रिया है... उसके 36 इंच के सीने के सामने अच्छे अच्छे फिके पढ गिये है... ऐसा ही एक चाय बेचने वाला भियां हमारी पेनी नजरों मे आ गिया... जो चाय बेचते बेचते... लोगों को जहर बेचने लग गिया....। 
    तो भियां आप सोच रिये होंगे ये कौन हैं ... तो इससे पहले में सुना ही देता हुंु जहर बेचने वाले छत्रु, वीनु और मन्नु की कहानी... भियां छोटे से गांव में छत्रु, वीनु और मन्नु रिया करते थे... तीनों आपस में सगे संबंधी थे.... वीनु और मन्नु पास ही के छोटे से शहर में सुबह दुध बेचते और दिन में चाय की दुकान लगाते... ऐसा ही हाल कुछ वीनु का भी था... जैसा की आप भियां हमारें यहां लुट, डकैती और चोरी होना आम बात है.... ये आस पास के गांव वालों से चोरी का सामान कम किमत पर खरीदते और बेचते थे... भियां चोरी का सामान खरीदना, लोगों को मामु बनाना इनके लिए आम बात थी... छत्रु ने शराब बेचना चालु की... अपने पिता के साथ पास की शराब दुकान से शराब लाता और बेचता था... धीरे धीरे एक से दो, दो से चार और पीकअप भर कर शराब आस पास के गांव एवं गुजरात से सटे गांवों में बेचने लग गिये... फिर गुजरात में पीकअपों के माध्यम से शराब बेचना चालु की... फिर ठेकों की गोटियां डली... जिस शराब वाले से छत्रु शराब  खरीदता था उसने इसके नाम से भी गोटी डाली तो एक जगह का शराब का ठेका इसके नाम से खुल गिया... वो कहते है न जिस थाली में खाया उस थाली में छेद किया उसी तर्ज पर अपने मालिक की पीठ में छत्रु से चुरा भोका.... फिर चला लोगों को मामु बनाने का सिलसिला छत्रु, वीनु और मन्नु ने कईयों को अपना पार्टनर बनाया.... और उन्हे धोखा देते रहे.... जिले के सबसे बडे शराब माफिया बन गिये... तीनों ने अपने अपने काम बांट लिए... छत्रु शराब की उपर स्तर पर डील करता हैं..... वीनु अधिकारियों और नेताओं को सेट करता है और मन्नु सारी अवैध शराब तस्करी की देख रेख करता है। तीनों ने सिर्फ दुसरों के बल पर काम करते है खुद से तो कुछ होने वाला नही है... सिर्फ पार्टनरों को मामु बनाने का काम किया।  तो भियां अब आप जान गए होगे की ये छत्रु, वीनु और मन्नु कौन है... जो चाय बेचते बेचते कैसे शराब माफिया बने। ऐसे चाय वालों पर लानत है जो लोगों को जहर बांट रिये है। 
    भियां लोगों को मामु बनाते बनाते अब ये तीनों अपने आप को सत्ता बदलने वाले समझने लग गिये है। वीनु जो चोरी का माल खरीद खरीद कर बडा हुआ वो अधिकारियों एवं नेताओं से दोस्ती होने की वजह से अपने आप को किसी पर भी गोली चला दी, किसी से भी विवाद कर लिया, भियां अति का अंत निश्चित होता है.... एक चींटी भी हाथी को मार सकती है... अहंकार में रावण भी मारा गिया.... जिस दिन किसी के हत्थे चढ गिये तो नानी याद आ जायेगी... अपनी गिरेबां में झांक कर देखों कितने रेले है। वीनु भाई दुसरों के घरों पर पत्थर मारने की बजाय ये देख लो अपना घर शीशे का का है। 
    तो भियां ये थी शराब माफियाओं की कहानी... जो चाय बेचते बेचते किस तरह से लोगों को मामु बनाकर लोगों को जहर बांट रिये है। तो भियां अब में चलता हुं जयरामजी की.....

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