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    Thursday, June 15, 2017

    यहां परोसा जा रहा है.... शराब..... शबाब...... और कबाब...... रात के अँधेरे में यहाँ होता क्या है भाई ......


    झाबुआ। जनता जाए भाड में... हमें क्या लेना देना....  इसी तर्ज पर  इन दिनों जिला प्रशासन और खाकी के नुमाईदे शराब दुकान संचालकों के सामने नतमस्तक नजर आ रहे है.......   अब बात कर लो किशनपुरी स्थित देशी विदेशी मदिरा दुकान की जहां आए दिन विवाद होते रहे है। यहां से गुजरने वाली महिलाओं और लडकियां पर शराबी फब्तियां कसते है। कभी उनके सिने को लेकर तो कभी उनके चेहरे को लेकर.... शराबियों की वजह से महिलाओं और लडकियों का निकलना यहां से दुश्वार हो गया है। प्रशासन को 3 बार यहां के रहवासियों ने शिकायती आवेदन प्रस्तुत किया। दुकान हटाने की मांग की और बताया कि इन शराब की दुकानों की वजह से उन्हे क्यों परेशानी हो रही है। आबकारी विभाग को भी इस संबंध में जानकारी है। चलो रहवासी तो छोटे तबके के लोग है.....  युवक कांग्रेस ने भी इन दुकानों को हटाने के लिए मांग की थी.....  लेकिन उनकी भी एक न सुनी.....।
    किशनपुरी स्थित विदेशी शराब की दुकान जहां शराब.... शबाब.... और कबाब.... तीनों परोसे जा रहे है। जिस बिल्डिंग में ये शराब कि दुकान संचालित हो रही हैं वो पहले से ही शराब  .....  शबाब। .....  और .... कबाब परोसने के लिए हमेशा से सुर्खियों में रही है और अब यहां शराब की दुकान संचालित होने के साथ साथ यहां बार भी चालु हो गया है। जिससे यहां शराब..... शबाब.... और कबाब आसानी से मिल जाता है। रहवासियों को कहना है कि यहां रात के अंधेरे और दिन के उजाले में काफी कुछ देखने को मिल सकता है। बार के नाम से लोग अंदर जाते है और होता कुछ और है। तभी तो प्रशासन को इतनी शिकायत करने के बाद भी प्रशासन और खाकी के रखवाले इस और ध्यान नही दे रहा है। रहवासियों का यह भी कहना है कि रात के अंधेरे में यहां से जीपों में भर भर कर शराब अन्यत्र ले जाई जा रही है। दुकान मालिक ने कुछ पटठे पाल रखे है अगर कोई रहवासी इन सब बातों के लिए विरोध करता है। ......  तो ये पटठे मारपीट करने को उतारू हो जाते है। इसकी पुलिस को शिकायत भी करते है तो पुलिस भी कुछ नही करती है। ऐसे में न तो प्रशासन उनके साथ है और न ही पुलिस आखिर रहवासी अपनी गुहार लगाने जाए तो किसके पास....। रहवासियों की सुनने के बाद कई दिनों तक जब इस शराब की दुकान की गहराई में गए तब यहाँ काफी कुछ देखने को मिला। तब पता चला आखिर रहवासी यहाँ से दुकान हटवाना क्यों चाहते है।  
    एक और जैन मंदिर तो दुसरी ओर भेलेनाथ मंदिर और  बीच में ये शराब की दुकान.... जहां शराब.... शबाब.... और कबाब.... परोसा जा रहा है। जिसकी पुरी जानकारी आबकारी और पुलिस विभाग को है लेकिन दोनों आंखें मुंदे हुए है। 
    शायद यहां से न तो प्रशानिक अधिकारियों और न ही खाकी के रखवालों की बहन.... मां..... बेटी.... या फिर किसी की बीवी निकली होगी... अगर निकली भी होगी तो बंद कांच के बडे वाहनों में ...... तो इन्हे कैसे यहां गंदी गंदी गालियां और फब्तियां सुनने को मिलेगी। 

    3 comments:

    1. किसी राजनीति से जुड़े व्यक्ति की ही शराब दुकान होगी !
      तभी तो शासन प्रशासन कोई भी कुछ बोल नही रहा है !वैसे भी झाबुआ जिला अनुसूचित क्षेत्र के साथ साथ अनुसूचित जिला भी है जहाँ गैर आदिवासी किसी भी प्रकार का व्यापार आदि नही कर सकते है व कोई भी शराब शबाब जैसे अनावश्यक व असामाजिक कार्यों कॊ नही कर सकते है !यह अनुसूचित क्षेत्रों मे पूर्णतः वर्जित व प्रतिबंधित है !

      इस पर शासन कॊ या ग्राम सभा कौ तुरंत कार्रवाई करना ही चाहिये !

      जय आदिवासी ....जय मूलनिवासी .......

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