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    Monday, November 27, 2017

    बंटी और बबली के चक्कर में....... एक बोतल में बिकने वाले नेताजी ...... मेले के नाम पर हो रिया है लाखों का खेल









    सबको मेरा नमस्कार...... लो भियां मैं फिर आ गिया कुछ कही-अनकही के साथ..... भियां जैसा की एक बोलत में बिकने वाले भाजपा नेता को कौन नी जान रिया है..... एक बोतल के लिए नेताजी...... झुठ को सच और सच को झुट बनने में नही चुक रिये है.... तो भियां बोतल तो बोतल होती है..... बोतल के लिए तो नेताजी ने अपनी पुरी पार्टी को गढडे में गिरा दिया.....। ये तो आप सब जान रिये है...... भियां पिछले कई दिनों से मैं देख रिया हुुं कि नेताजी के कार्यालय के चक्कर एक निजी संस्थान के बंटी और बबली लगा रिये है..... तभी मैं समझ गिया था नेताजी बोतल के चक्कर में फिर गोटी फिर करने में लग गिये है और निजी संस्थान वाले भी समझ गिये की नेताजी को बोतल ही लगेगी। 
    भियां घुमा फिर के नी सीधे बिता रिया हुं...... भियां नगर में दिसम्बर माह में अटल षिल्पी मेला और क्रिस्मस मेला आयोजित होने जा रिया है..... जिसे लेकर एसडीएम कार्यालय में 5 ठेकेदारों ने मेला लगाने के लिए आवेदन डाले..... मगर ये क्या हो गिया भियां.... बिना जाचें परखे..... अधिकारियों ने भी नेताजी की बोतल के लिए षिवहरें नाम के व्यक्ति को ठेका दे डाला। जो कई जगह धोखाधडी करके आ रिये है...... और फिर भी नेताजी बंटी और बबली के साथ मिल अपनी रोटियां सेकने में लगे हुए है। यहां तो अंधों में काना राजा कहावत बिल्कुल चरितार्थ हो री है। भियां इस लाखों के खेल में कई गरीबों के पेट पर नेताजी लात मार रिये है। लेकिन वो ये नी जान रिये है उनकी कुर्सी चंद दिनों की है..... उपर वाले भी सब जान रिये है। 
    गरीबों के पेट पर मारी लात
    भियां इस तरह के मेलो में छोटे तबके के व्यापारी अपनी दो वक्त की रोटी की जुगाड में आते रिये है..... भियां अगर नेताजी की बोतल के चक्कर में जिला प्रषासन इन छोटे तबके के व्यापारियों को ध्यान में न रखते हुए सीधे तौर पर इन गरीबों के पेट पर लात मार रिया है। जिस पूरी ज़मीन के लिये ये ठेकेदार महज 6 हजार रूपये प्रतिदिन के सरकार के राजस्व में जमा करते है, वही मुनाफाखोर ठेकेदार ऐसे नेताओं और भ्रष्ट सिस्टम की मदद से गरीबों से प्रतिदिन 1 हजार से 2 हजार रूपये तक का किराय वसूल रिये है। 
    तो भियां अब मैं जा रिया..... लेकिन जाते जाते एक और बात बिता दुं..... गरीबों के पेट पर लात मारना अच्छी बात नी है..... नेताजी को तो वैसे भी शाम ढलते ही दिख नी रिया है..... वो क्या गरीबों को देख पाएंेगे..... बोतल चक्कर में राम नाम जपना पराया माल अपना के चक्कर में लगे रहते है.... अब क्या कुं अंधों में काना राजा होगा तो ऐसा ही होगा.... अब जा रिया... जय राम जी की। 

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