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    Friday, December 29, 2017

    नपा विकास के 100 दिन के..... चार लोग चला रिये है नपा.. एक सीमी सपोला.... एक गौमांस विक्रेता.... एक सटोरिया और एक भांजगडिया....!


    भियां नमस्कार....
    वो केते है ना.... अब पछताए क्या होत.... जब चीडिया चुग गई खेत.... भियां इसका मतलब तो आप समझ गिये होंगे... नगर विकास में नपा के 100 दिन से उपर हो गिये है... और नपा इतना विकास कर रही है... की अब मतदाता के साथ साथ ..... वो भी के रिये है जिन्होने भीतरघात किया था.....। ..... की वो ही अच्छे थे... जिन्हे हम चोर के रिये थे... वो काम तो कर रिये थे..... मगर अब तो चोर से बडे चोर .... लुटेरे नपा में बैठ गिये है....। जो मतदाताओं की जेब पर डाका डाल रिये है। 
    परिषद बने 100 दिन उपर हो गिये.... इन 100 दिनों में भियां.... चुनाव के समय कांग्रेस ने जो विकास का ऐजेन्डा मतदाताओं के सामने पेश किया था... वो गिया भाड में.... परिषद बनते ही सबसे पहले कांग्रेस के कददावर नेता के बेटे को ही कांग्रेस परिषद ने दरकिनार कर दिया... जिसने नपा चूनाव जीत के लिए सारे दावपेंच खेले... अब तो वो भी नपा का नाम भी नी ले रिया है...।
    अब बोले तो भियां पुरा खेल चार पार्षद ही खेल रिये है.... यानी नपा को चार लोग ही चला रिये है.... एक सीमी सपोला.... एक गौमांस विक्रेता.... एक सटोरिया और एक भांजगडिया.... जिन्होने नगर के विकास करने वाली के दोनों शराबी बेटों को अपने चंगुल में इस तरह फंसा लिया है कि अगर दोनों शराबी भाई न दिखे तो उन्हे लेने के लिए घर तक पहुंच जाते है। 
    भियां हम बात कर रिये है 100 दिनों के विकास की.... इन 100 दिनों में मतदाताओं का तो नही.... इनका जरूर विकास हुआ है... जो भुगतान रूका हुआ था... उस भुगतान में सांठगाठ कर चमचमाती गाडी ले ली.... रातों रात सडक बन गी..... छोटो से टेंन्ट का लाखों भुगतान हो गिया.... 23 दिसम्बर तक जिस मेले का नोटशीट में जिक्र नही था.... उसका रातों रात जिक्र हो गिया....। विकास तो इन्ही का हुआ है.... नगर का कहा हुआ है... जो काम पिछली परिषद में स्वीकृत थे वो ही काम हो रिये है.... और जिस काम में इन्हे कमाई मिल री है.... वो ही पहले कर रिये है...। कुछ दिनों पहले ही परिषद ने जनता को वादा किया था... की इतने दिनों में नगर स्वच्छ... और सुन्दर होगा... लेकिन जगह जगह पडा कचरा... बंद पडी नालियां.... और वार्डो में फैली गंदगी... इनके वादों को बयां कर री है। 
    तो भियां अब मैं चलता हुं.... लेकिन जाते जाते एक बात और बिता दुं.... पुरे नगर को एक सीमी सपोला... एक गौमांस विक्रेता....एक सटोरिया... और एक भांजगडियां चला रिये है.... जो नगर को लुटने में लग गिये है... ये चारों  किसी न सुनते है और न ही करते है... जहां गाढी कमाई होगी वहीं हाथ डाल रिये है... ऐसा लग रियो है कि बाकि के पार्षदों को जनता ने नही.... इन्होने जीताया है.... तभी तो.... ये चारों बाकि पार्षदों की चलने ही नी दे रिये है... सिर्फ अपनी चला रिये है... तो भियां अभी जाना मत पिक्चर अभी बाकि है... पुरी पिक्चर दुरदर्शन की तरह टुकडों में बिताता रूंगा.... अब जा रिया जय रामजी की। 

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