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    Monday, February 26, 2018

    माननीय उच्चतम न्यायालय की लोक सेवा आयोग कर रहा है अव्हेलना ...... लोक सेवा आयोग द्वारा जारी विज्ञापन को लेकर अजाक्स ने सौंपा ज्ञापन...... जारी विज्ञापन हो निरस्त करने की की मांग ......


    झाबुआ। चिकित्सा महाविद्यालयों में सीधी भर्ती में जारी विज्ञापन में हुई अनियमित्ता को लेकर आज सोमवार को अजाक्स संगठन एवं एसटी, एससी, ओबीसी कर्मचारी आदि ने मिलकर माननीय राज्यपाल महोदय, माननीय मुख्यमंत्री, माननीय प्रमुख सचिव भोपाल के नाम से कलेक्टर कार्यालय पहुंच एसडीएम को ज्ञापन सौंपा। 
    ज्ञापन में बताया कि शासकीय स्वशासी चिकित्सा महाविद्यालय विदिशा, रतलाम, खंडवा, शहडोल, शिवपुरी, दतिया, छिंदवाडा एवं रीवा द्वारा मप्र शासन चिकित्सा शिक्षा विभाग, मंत्रालय, भोपाल के ज्ञाप क्रमांक एफ 2-53/2017/1/55 दिनांक 12.01.2018 के अंर्तगत शा. स्वशासी चिकित्सा महाविद्यालय विदिशा, रतलाम, खंडवा, शहडोल, शिवपुरी, दतिया, छिंदवाडा एवं रीवा के अधीन सीधी भीर्ती हेतु जारी विज्ञापन में  प्राध्यापक के कुल 174 पद, सहाप्राध्यापक के 244 पद, सहा. प्राध्यापक के 404 पद एवं प्रदर्शक के 188 पद कुल प्रथम एवं द्वितीय श्रेणी के 1010 पदों का विज्ञापन जारी किया गया जो की भारत के संविधान की व्यवस्थाओं के अनुरूप नही है, न ही शासन की व्यवस्थाओं के अनुरूप है और न ही आरक्षण का पालन किया गया।
    उक्त पदों को अनुच्छेद 309 के तहत मप्र शासन द्वारा सृजित किया गया है और सभी पद अनुच्छेद 320 के अंतर्गत आते है जिन पर भर्ती केवल मप्र लोक सेवा आयोग के माध्यम से ही की जा सकती है। मप्र लोक सेवा आयोग का पत्र क्र./15528/पेड/2010/ अनुभाग-6 इंदौर दिनाक 23.08.2010 जो की प्रमुख सचिव  चिकित्सा शिक्षा विभाग को लिखा गया था। जिसमें कंडिका 10 (2) में उल्लेख किया गया है कि इस प्रकार के विज्ञापन सिर्फ मप्र लोक सेवा आयोग के माध्यम से ही प्रेषित किया जाये। जो की लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष महोदय द्वारा अनुमोदित था। साथ ही मप्र शासन, सामान्य प्रशासन विभाग मंत्रालय भोपाल का पत्र क्रमाक 1685/2522/10/ एक(1) भोपाल दिनांक 09.09.2010 में भी ऐसे विज्ञापनों पर आपत्ति ली गई है एवं विज्ञापन को लोक सेवा आयोग द्वारा जारी कराने के लिए लिखा गया था। उक्त विज्ञापन  में विकलांगों के लिए किसी प्रकार का आरक्षण का प्रावधान नही है एवं एससी, एसटी और ओबीसी के लिए पदों का आरक्षण मप्र लोक सेवा अधिनियम 1994 एवं नियम 1998 के अनुसार नही है साथ ही माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय अनुरूप नही है। 
    उक्त पदों का सृजन अनुच्छेद 309 के तहत राज्य स्तरीय है न की स्वशासी संस्था के माननीय उच्चतम न्यायालय के निर्णय के अनुसार सभी पदों को क्लबकर आरक्षण रोस्टर संधारित कर पदों का संवर्गवार एवं वेतनमान को एक केडर के अनुसार रोस्टर संधारित कर विज्ञापन जारी किया जाना चाहिए। 
    अतः अजाक्स एवं अन्य संगठन यह मांग करता है कि उक्त विज्ञापन जो की भारत के संविधान की व्यवस्थाओं के अनुरूप नही है एवं मप्र लोक सेवा अधिनियम 1994 एवं नियम 1998  का उल्लंघन है साथ ही माननीय उच्चतम न्यायलय के आदेश का स्पष्ट उल्लघन हैं अतः उक्त विज्ञापन को निरस्त करवाकर पुनः मप्र लोक सेवा आयोग द्वारा विज्ञापन जारी करने की संघ मांग करता है। ज्ञापन का वाचन अजाक्स जिलाध्यक्ष सोमसिंह भूरिया द्वारा किया गया। वहीं ज्ञापन सौपते समय शंभुसिंह डोडियार, बेनेडिक डामोर, कैलाश वसुनिया, कान्या मेडा, एमएल फुलपगारे, लक्ष्मणसिंह डिंडोर, महेश भाबर, हेलन वसुनिया, श्रीमती चंदा भंडारी, श्रीमती बघेल एवं एससी, एसटी और ओबीसी कर्मचारियों से संयुक्त रूप से मिल अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई। 

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