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    Monday, February 26, 2018

    भूमाफियाओ का शासकीय भूमि हड़पने का गंदा खेल......... माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश की हो रही अवमानना


    मेघनगर। नगर की हृदयस्थली कहा जाने वाला दशहरा मैदान इन दिनों भूमाफिया का शिकार होने जा रहा है समय रहते यदि शासन प्रशासन निष्पक्ष रुप से जांच नहीं की तो इसका दंश नगर के रहवासी सहित आसपास की भोली भाली जनता को सहना पड़ सकता है दरअसल 36 वर्ग फीट की नंबर 337 ,300 387 जिसमें भूमि का विक्रय करना बताया गया है उद्घोषणा में लिखा गया मेघनगर के पटवारी हल्का नंबर 45 स्थित भूमि सर्वे नंबर 485  भूमि का आवेदन पत्र के माध्यम से किए जाने हेतु आवेदन प्रस्तुत किया है मध्य प्रदेश भू राजस्व संहिता की धारा 1959 की धारा 110 के तहत 28 फरवरी तक अपनी आपत्ति प्रस्तुत करें।जिसमे मा.एस. डी. एम . द्वारा हस्ताक्षर किए गए हैं। ये बड़े आश्चर्य की बात है माननीय उच्च न्यायालय के आदेश के बाद भी  शासन दूसरी पार्टी विरुद्ध पार्टी के रूप में खड़ा हुआ है 1959 में उक्त जमीन आदिवासी विकास के नाम पर थी।1972-73 में फिर शासन ने शासन के नक्शे व कब्जे में जो खाली जमीन पड़ी हुई थी उसे मंडी निजुल में शामिल कर लिया मंडी निजुल लागू करते हुए ले ली थी। लेकिन आज की स्थिति देखने को देख, हुवे किस प्रकार का गन्दा खेल भू माफिया खेल रहे हैं बात विचारनीय है।

     *दशहरा मैदान में होते हैं कई धार्मिक आयोजन
    आज नगर में जहां कहीं पार्किंग की समस्या,  गार्डन की समस्या,खेल मैदान की समश्या, खुली हवा की समश्या व्यापत है ऐसे में हर मर्ज की दवा इस मैदान में सुविधा स्वरूप है। किसी ऐसे असहाय परिवार जोके अपने विवाह उत्सव किसी गार्डन में नहीं कर पाते वह भी नगर परिषद से कुछ शुल्क की रसीद कटवा कर दशहरा मैदान तक शानो-शौकत अपने सपने की हकीकत में बदल कर अपने बालक बालिका का विवाह उत्सव करते हैं। इसके साथ ही दशहरा मैदान पर शासकीय कार्यक्रम 26 जनवरी 15 अगस्त धार्मिक उत्सव भागवत कथा, नवरात्रि महोत्सव एवं होलिका दहन जैसे कई आयोजन होते हैं अब देखने की बात यह है माल मलाई चटा कर के भू माफियाओं की दबंगई शासन-प्रशासन के साथ चलती है या नगर के रहवासियों की आवाज बुलंद हो कर शासकीय जमीन के लिए लड़ाई लड़ती है ।

    *माननीय उच्च न्यायालय के आदेश की हो रही अवहेलना*
     माननीय उच्च  न्यायालय के द्वारा उक्त जमीन को प्रथम पक्षकार गुप्ता एवं द्वितीय पक्ष कार शासन ने दसहरा मैदान  भुखण्ड संबंधित मामले की सुनवाई करते हुए प्रथम पक्षकार से उक्त भूमि का टाइटल मांगा था ।माननीय उच्च न्यायालय द्वारा उक्त भूखंड का टाइटल प्रस्तुत करने की बात कही थी जिसका टाइटल आज दिनांक तक गुप्ता परिवार ने न्यायलय में पेश नही किया गया है साथी माननीय उच्च न्यायालय ने सुनवाई के लिए डबल रीवीजन में लगाई गई थी जो कि न्ययालय की डबल बेंच में विचाराधीन है । इसके उपरांत राजनीतिक प्रभाव एवं माल मलाई के दम पर इस परिवार ने दशहरा मैदान की शासकीय भूमि को अपने नाम करने का षड्यंत्र रचा है अब देखने की बात यह रहेगी । षड्यंत्र  का शिकार  जमीन होती है या फिर प्रजातंत्र के रखवाले एवं शासन निष्पक्ष जांच कर कर शासकीय भूमि को भू माफिया के चुंगल से सुरक्षित रख पाएगी हमारी नजरें आम जनता के पक्ष के साथ दशहरा मैदान पर रोज बनी हुई है एवं बनी रहेगी।

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