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    Wednesday, February 28, 2018

    भगोरिया स्पेशल कवरेज...’” एम.पी.टूरिजम और राज्य सरकार को भगोरिया का प्रचार कर आयोजन को बढ़ावा देना चाहिए “’


    इंदौर से राजेन्द्र के.गुप्ता 98270-70242
    इंदौर। मध्यप्रदेश के झाबुआ-अलिराजपुर जिले में मनाए जाने वाले “ भगोरिया “ का स्पेशल कवरेज...... पकी फसल काटने के बाद आदिवासियों का पर्व भगोरिया शुरू होता है जिसे आदिवासी होली तक धूमधाम से मनाते है ,इस बार भगोरिया 24 फरवरी से शुरू होकर 01 मार्च तक चलेगा ,जिसे दोनो जिलो के उन सभी गाँवो- शहरों में मनाया जाएगा जहाँ हाट बाजार लगते है ,आदिवासी अपने साधनो से भगोरिया का आनंद लेते है जिसे देखने विदेशी पर्यटक भी भारत आते है ,शासकीय अमला सुरक्षा व्यवस्था में जुटा रहता है ,एम.पी. टूरिजम और राज्य सरकार को भगोरिया का प्रचार कर आयोजन को बढ़ावा देना चाहिए ,क्योंकि आदिवासी भगोरिया से अपनी आदिकाल से चली आ रही परम्परा को जिंदा रखने की कोशिश कर रहे है जो लोकप्रिय भी है किन्तु ,आवागमन के साधनों की कमी से और प्रोत्साहन की कमी से आदिवासी ड्रेस और श्रगाँर लुप्त होता जा रहा है, पढ़े विस्तृत ख़बर/जानकारी  ...- राजेन्द्र के.गुप्ता की कलम से ...... लाईव...

    महिलाएँ निभा रही है परम्परा ,पुरुष जींस-टीशर्ट में 

    भगोरिया पर भी आधुनिकता का प्रभाव,आत्म सुरक्षा पर ज्यादा ध्यान 
    आदिवासियों की फिटनेस देख शहरवासी हुए आश्चर्य चकित , पकोड़ें यहा भी बहुत बिके 


    आदिवासियों का राष्ट्रीय पर्व भगोरिया साल में एक बार मनाया जाता है जिसे मनाने के लिए आदिवासी कई दिन पहले से तैयारी शुरु कर देते है । ड्रेस .गहने आदि बनवा कर भगोरिया में धूम मचाने की तैयारी मेले में आए आदिवासियों को देख कर अपने आप पता चल जाती है । इंदौर सराफा के व्यापारी सलिल माहेश्वरी और हुकुम सोनी ने बताया कि जानकारी के अनुसार सिर्फ तीन दिन में ही 800 किलों चाँदी और  गोटा चाँदी डेढ़ से दो माह में 2,500 हजार क़िलों बिक जाती है गोटा चाँदी नाम की ये धातु भी चाँदी जैसी ही दिखती है और झाबुआ. अलिराजपुर जिले में लगभग 6 से 7 करोड़ रूपयों के कपड़े बिक जाते है । आदिवासी महिलाओं की ख़ूबसूरती और फिटनेस देख कर शहर की महिलाओं को आश्चर्य चकित होते हुए देखा गया। हमारे फोटोग्राफरों के 6 केमरों को किसी भी उम्र का एक भी अनफिट और तोंद वाला आदिवासी नहीं मिला .  इससे आदिवासियों के द्वारा की जाने वाली मेहनत का अंदाजा लगाया जा सकता है । भगोरिया का कवरेज अंतरराष्ट्रीय मीडिया के पत्रकार और हम भी पहुँचे ।


              पाठकों के मन में भगोरिया को लेकर उत्सुकता रहती है इस खबर और चित्रों के माध्यम से हम पाठकों के लिए भगोरिया का लाईव चित्रण प्रस्तुत कर रहे है । भगोरिया को लेकर उत्सुकता इससे भी समझी जा सकती है कि इंदौर हाईकोर्ट के जस्टिस पी.के.जायसवाल और जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और कई इंदौरी भी सपरिवार भगोरिया देखने अलिराजपुर और झाबुआ पहुँचे । अब भी अपनी दुनिया में व्यस्त रहने वाले आदिवासियों पर भी आधुनिकता का प्रभाव देखने को मिला । मोबाईल का उपयोग करती आदिवासी महिलाएँ और पुरुष जींस-टी-शर्ट में नजर आए । वही आदिवासियों में शराब का चलन भगोरिया में भी देखने को मिला । कोलड्रिंक से प्यास बुझाती आदिवासी महिलाएँ भी नजर आई । खास बात ये देखने को मिली आदिवासी महिलाओं ने परम्परा को जिन्दा रखते हुए चटक रंग के आदिवासी स्टाईल के वस्त्र और आभूषण धारण कर रखे थे किंतु आदिवासी पुरुष लगभग पूरी तरह से आधुनिकता में ढाला नजर आया और जींस-टी-शर्ट . चश्मा पहने नजर आया ।
             कुछ बुजुर्ग आदिवासी बाँसुरी बजाते और ढोल की थाप पर नाचते नजर आए । 24/02/2018 से शुरू हुआ भगोरिया अलिराजपुर और झाबुआ जिले के हर उस नगर में मनाया जाता है जिस दिन वहा का हाट होता है । इसके लिए पुलिस , आबकारी विभाग के साथ प्रशासन का पूरा अमला व्यवस्था में जुटा रहता है । भगोरिया को देखने देश विदेश से पर्यटक आते है । आदिवासियों का प्रसिद्ध पेय ताड़ी  की खपत भी बड़ी मात्रा में होती है । गाँव और के क्षेत्र की निवासी आदिवासी महिलाएँ एक रंग के कपड़े के थान ख़रीद कर डिजाईनिंग साड़ी-लहंगा आदि सिलवाती है इसके पीछे आत्म सुरक्षा और आपसी पहचान मेले में आसानी से हो जाए कारण बताया गया है । पुलिस की सख़्ती भगोरिया पर भी देखने को मिली और दोपहर 2 बजे से पुलिस आदिवासियों को वापस रवाना करना शुरू कर देती है कारण पूछने पर पता चला जैसे जैसे भगोरिया शबाब पर चढ़ता है नशा भी सर चढ़ने लगता है विवादों से बचाने के लिए एसा किया जाता है , वर्ना आदिवासी के क्रोध को रोक पाना आसान नहीं होता है । इसका उदाहरण छकतला में देखने को मिला इस गाँव में गुजरात सीमा से क़रीब सौ क़दम पहले स्थित शराब दुकान पर महिलाएँ भी बड़ी मात्रा में शराब ख़रीदती दिखी । वही भगोरिया में भी प्याज, मिर्ची के पकोडे भारी मात्रा में बिकते दिखे ।
             छकतला में सरकारी की योजनाओं का प्रचार बाईक पर भोगले (स्पीकर का रूप) लगा कर अनोखे तरीक़े से किया जा रहा था । अधिकारियों को यहा अमला कम मिला हुआ है जबकि कार्य क्षेत्र का घनत्व अन्य जिलो के मुक़ाबले अधिक है । हालाँकि आबादी उतनी नहीं है पर जिन्हें संभालना है वो लोग उतने ही भारी है । व्यवस्था संभाल रहे अधिकारियों - कर्मचारियों को हर समय अलर्ट और तैयार रहना पड़ता है । जोबट क्षेत्र में पुलिस कर्मचारियों की हत्या तक हो चुकी है ।दिनांक 25. 02. 2018 को बड़वान्या भगोरिया में हुए विवाद मे 6 लोग घायल हो गए ।गाँव और एक क्षेत्र से आई आदिवासी महिलाएँ और बच्चे एक जैसी ड्रेस पहने नजर आए ,  कारण पूछने पर पता चला ये फेशन के साथ सुरक्षा के लिए किया जाता है । मेले में कही बिछुड़ जाए तो दूर से ही पता चल जाए की बिछडी महिला या बच्चा कहा है । आदिवासी महिलाओं की भीड़ भगोरिया मे लगे अस्थाई फोटो स्टूडियो पर और नाम आदि के टेटू बनाने वालों के बहुत देखी गई। भगोरिया में गन्ने बड़ी मात्रा में बिकते है । भगोरिया में आने के लिए आदिवासी महिलाएँ और पुरुष जीप , मेटाडोर और लोडिंग वाहनों का उपयोग कर रहे जिसे देख कर किसी बड़ी घटना का डर हमेशा बना रहता है । भगोरिया की शुरुआत फसल काटे जाने के साथ शुरू होता है और होली के जलने के साथ सम्पन्न हो जाएगा । लिखने को बहुत कुछ है पर भगोरिया के चित्र अपने आप भगोरिया की भव्यता बयान करते है । हमने भी छकतला और नानपुर भगोरिया में दाल-पनिया का लुत्फ उठाया , पाठक भी इस ख़बर को पढ़ कर और फोटो को देखे घर बैठे भगोरिया का लुत्फ उठाए...



    झाबुआ-आलीराजपुर जिले में भगोरिया पर्व कब कहा मनाया जाएगा -
    • 23 फरवरी-
    • कठ्ठीवाड़ा, वालपुर, उदयगढ़, भगोर, बेकल्दा, मांडली और कालीदेवी।
    • 24 फरवरी-
    • मेघनगर, रानापुर, नानपुर, उमराली, बामनिया, झकनावदा और बलेड़ी।
    • 25 फरवरी-
    • झाबुआ, छकतला, सोरवा, आमखूंट, झीरण, ढोलियावाड़, रायपुरिया, काकनवानी, कनवाड़ा और कुलवट।
    • 26 फरवरी-
    • आलीराजपुर, आजादनगर, पेटलावद, रंभापुर, मोहनकोट, कुंदनपुर, रजला, बडगुड़ा और मेड़वा।
    • 27 फरवरी-
    • बखतगढ़, आम्बुआ, अंधारवड़, पिटोल, खरड़ू, थांदला, तारखेड़ी और बरवेट।
    • 28 फरवरी-
    • बरझर, चांदपुर, बोरी, उमरकोट, माछलिया, करवड़, बोरायता, कल्याणपुरा, खट्टाली, मदरानी और ढेकल।
    • 1 मार्च -
    • फुलमाल, सोंडवा, जोबट, पारा, हरिनगर, सारंगी, समोई और चैनपुरा।

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