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    Tuesday, March 6, 2018

    साहब ने अंगुली पकडाई तो सर पर बैठ गिये दादा...... रमेश को पकडेगें और अलकेश को छोडेंगे..... रानापुर में तो हम चलायेगे क्रिकेट सटटा


    लो भियां मैं फिर आ गिया कुछ कही-अनकही के साथ.... भियां दादा के पदभार ग्रहण करते ही दादा ने रंग दिखाना चालु कर दिया.... दादा के चटरगुल्लों ने भी अपने काले कारनामें चालु कर .... जहां माल मिला उन्हें छोड दिया और जहां नही मिला..... वहां दादा के मार्फत कार्रवाई करवा दी.... भियां दादा को साहब ने अंगुली तो पकडाई..... लेकिन दादा तो साहब के सर पर बैठ गिये.... दादा जब यहां के दरोगा थे...... तो बनते ंऔर अपने ससुर के साथ मिल.... पिटोल होते हुए गुजरात में खुब अवैध शराब की तस्करी की.... तो सटोरियों और माफियाओं से भी खुब माल कमाया..... चटरगुल्लों ने भी दादा के नाम पर...... पिटोल जाकर अपनी गाडी पर लाल बत्ती लगा.... खुब अवैध वसुली की..... और आसपास के क्षेत्र में अवैध शराब तस्करी की। लेकिन ये क्या भियां..... उस समय दुसरों की नैया डुबोने के चक्कर में दादा.. बनते और ससुरजी की ही नैया डुब गी। 
    लंबे अरसे से लुप्त हुए दादा को हमदर्दी दिखाते हुए साहब ने अंगुली पड.... फिर से चलना सिखाने की कोशिश की.... लेकिन ये क्या भियां दादा को चुट मिलते ही दादा साहब के सर पर बैठ... फिर पुराना राग आलापने लग गिये.... भियां इन दिनों दादा की अलकेश से अच्छी दोस्ती हो गी है... अब एक बार फिर से अलकेश के साथ मिल दादा पिटोल बार्डर से अवैध शराब की तस्करी गुजरात में जमकर कर रिये है। जहां माल मिले वहां बने दादा दास.... तो दोस्ती का फर्ज निभाते हुए दादा रमेश राय को निपटाने में लग गिया.... जहां भी रमेश की शराब की गाडी देखे वहां दादा की टीम पकड ले गाडी...... और चटरगुल्ले भी हडडी के चक्कर में तुरंत सोशल मीडिया पर उनका बखान करने में लग जाते है। 
    भियां झाबुआ  से भी जीपसी में अवैध शराब भर कर आस पास के क्षेत्र में परोसी जा री है... लेकिन दादा को तो सिर्फ रमेश ही दिखाई दे रहा है... क्योंकि बार्डर के माफिया से जो दोस्ती होगी है.... अब दादा ने तो ठान लिया है रमेश को पकडेंगे और अलकेश को छोडेगे। 
    भियां गलियारों की चर्चा है की दादा इन दिनों रानापुर में अपने चटरगुल्ले के साथ मिल सटटे के कारोबार को फलिभुत करने में लग गिये है.... इस बार तो दादा के आशिर्वाद से चटरगुल्ले और साले ने मिल रानापुर में आईपीएल क्रिकेट सटटे की तैयारी कर ली है.....  इसलिए चटरगुल्ले दुसरे सटोरियों को दादा के प्रभाव और दबाव से निपटाने में लग गिये है.... सुना है झाबुआ में भी चटरगुल्लो ने दादा के मार्फत राजवाडा में सटटा और आईपीएल नही चलाने की धौंस दी है... अगर चलते है तो बीच चैराहे पर उनका जुलुस निकाने की बात कर रिये है। ये चटरगुल्ले सुबह से ही... दादा के आराम गाह के इर्दगीर्द नजर आ रिये है।
     तो भियां अब में जा रिया.... लेकिन जाते जाते एक बार और बिता दुं..... दादा जब दरोगा थे तब जो कालिख पुती थी... वो अभी भी नही धुली है..... माल कमाने के चक्कर में दादा एक बार फिर अपने पैर पर कुल्हाडी मार रिये है..... और चटरगुल्ले उसका फायदा उठा रिये है..... अब वो जमाना गिया.... अब तो सब शेर है.... कही ऐसा न हो..... हाल ही में मिली कुर्सी.... एक बार फिर चली जाए। अब जा रिया..... जय रामजी की। 

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