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    Thursday, March 8, 2018

    दिव्यांग मडीबाई के हौसलें इतने बुलंद है की .......... 12 गांव के लोगों को दे रही है बैंक सेवा का लाभ


    झाबुआ। शासन द्वारा महिला सक्तिकरण के लिए किये जा रहे प्रयास  अब फलीभूत होकर सामने आने लगे है मध्यप्रदेश शासन द्वारा ग्रामीण क्षैत्र की महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में सार्थक सहयोग किया जा रहा है। ग्रामीण महिलाएॅ पलायन कर मजदूरी करने गृह कार्य करने के साथ ही स्वयं का स्वरोजगार स्थापित कर परिवार का भरण-पोषण कर रही है। और नये आत्म विश्वास के साथ विकास के नये आयाम तय कर रही है। 
    झाबुआ जिले के रानापुर ब्लाक के ग्राम सारसवाट की दिव्यांग मडीबाई ने मध्यप्रदेश शासन की स्वरोजगार ऋण योजना एवं स्वरोजगार प्रशिक्षण का लाभ लेकर स्वयं का व्यावसाय प्रारंभ कर अपनी पहचान बैंक प्रतिनिधि के रूप में स्थापित की एवं दिव्यांग होने के बावजूद भी परिवार का आर्थिक सहारा बनी। बी.ए स्नातक तक पढी मडीबाई अपने क्षेत्र में बैंक अधिकारी के रूप में कार्य करती है। ग्रामीणो के बैंक संबंधी छोटे-छोटे लेन देन का काम करती है, जिससे हर ट्रांजिक्सन पर बैंक की तरफ से कमीशन मिल जाता है एवं ग्रामीणो को घर बैठे बैंक की सुविधा। चर्चा के दौरान मडीबाई ने बताया कि मध्यप्रदेश शासन की ऋण योजना एवं स्वरोजगार में प्रशिक्षण प्राप्त करने के पूर्व  उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत खराब थी। घर में बच्चों के कपडे व खाने-पीने के सामान के लिए भी उधार लेना पडता था। बी.ए.तक पढाई करने के बाद भी कोई शासकीय नौकरी नहीं मिली और नौकरी के लिए उसने प्रयास भी अधिक नहीं किये। जिसमें परिवार का भरण-पोषण अच्छे से संभव नहीं हो पाता था। 
    आजीविका मिशन के संपर्क में आने के बाद उसका चयन बैंक सखी के रूप में हुआ। बैंक सखी का काम आगे बढाने के लिए बैक से मुख्यमंत्री आर्थिक कल्याण योजना में ऋण लेकर बैंक का कार्य करने के लिये लेपटाॅप इन्टरनेट कनेक्शन एवं कियोस्क सेन्टर चलाने के लिये आवश्यक उपकरण खरीदे एवं कार्य प्रारंभ करने के लिए आर सेटी संस्थान बैक आॅफ बडौदा से प्रशिक्षण प्राप्त किया। मडीबाई बताती है कि उसने कभी यह नहीं सोचा था कि बैंक सखी के रूप में काम करने पर उसे इतना सम्मान मिलेगा और पैसा भी। पहले वह बडे अधिकारियों से बात करने में संकोच करती थी और घर से बाहर निकलना तो मानो असंभव सा प्रतीत होता था। बैंक सखी बनने के बाद आत्म विश्वास बढा और बडे अधिकारियों से संपर्क होने से काम और आसान हो गया। बैंक सखी के रूप में चयन होने के बाद वह पूरे आत्मविश्वास के साथ बैंक का काम कर रही है। बैंक संबंधी कार्य करके 10-12 हजार रूपये प्रतिमाह आय अर्जित हो जाती है। जिससे परिवार का भरण-पोषण बहुत अच्छे से हो पा रहा है।
    12 गांवो को दे रही बैंक सेवा
    मडीबाई वर्तमान में ग्राम पंचायत के एक भवन में बैठकर तीन बैंको नर्मदा झाबुआ बैंक, भारतीय स्टेट बैक, और बैक आॅफ बडौदा की 4 शाखाओं के लिए 12 गाॅवों के लोगो को बैंक सेवा दे रही है। उन्होने 50 स्वयं सहायताा समूह की महिलाओं को वित्तीय लेनदेन से जोडा। 10 गाॅवों के स्कूली विद्यार्थियों की छात्रवृति निकालने में भी सहयोग दे रही है। मडीबाई ग्रामीणो की पेंशन, प्रधानमंत्री आवास राशि, नरेगा की मजदूरी व अन्य भुगतान भी अपने केन्द्र से देती है। 

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