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    Saturday, March 10, 2018

    कभी सीने पर.... तो कभी जांघों को लेकर आने जाने वाली महिलाओं पर नशेडी कसते है फब्तियां..... पेटलावद शराब दुकान संचालक से परेशान रहवासी


    पेटलावद से राजेश  राठौर की रिपोर्ट......
    एक आम नागरिक इन दिनों जिला प्रशासन  के सामने सब बोना सा नजर आने लगा है।  अपने हितों के लिए जनता चाहे लाख शिकायत कर ले.. लेकिन जिला प्रशासन के कानों में जुं तक नही रैंगती...... पेटलावद क्षेत्र में भी कुछ ऐसा ही हो रहा है.....प्रशासन और आबकारी विभाग को रहवासियों द्वारा पेटलावद शराब दुकान संचालकों द्वारा की जा रही मनमानी को लेकर लाख शिकायत की जा रही है लेकिन उनकी सुनने वाला वहां कोई नही है। 

    नशेडियों द्वारा रात में गाली गलोज करना.... रास्ते से आने जाने वाली महिलाओं को फब्तियां कसना यहां आम बात सी हो गई हैं। हाल ही में प्रशासन ने महिलाओं के लिए वृहद कार्यक्रम का आयोजन कर महिलाओं के हितों की बात कही.....  वो भी सिर्फ शासकीय दस्तावेजों में इतिश्री करने के लिए। जो दस्तावेज मात्र फाईलों में बंद होकर धुल खाने के लिए रख दिए गए। लेकिन महिलाओं के हितों पर अमल नही किया जायेगा। अगर हम महिलाओं की बात करें तो पेटलावद षराब दुकान संचालक की मनमानी के चलते दुकान के पास ही उन्होने बैठक व्यवस्था की जुगाड कर ली। अब यहां पर बैठ कर शराब पीने वाले आए दिन यहां उत्पात मचाते नजर आते रहते है। रहवासियों का कहना है कि यहां से महिलाओं और युवतियों का निकलना दुश्वार सा हो गया है.... नशेडी कभी उनकी जांघों पर.... तो कभी उनके सिने को लेकर फब्तियां कसते सकते है। इस बात को लेकर उन्होने सभी को षिकायत की लेकिन किसी ने उनकी एक न सुनी। शराब दुकान के पास ही शासकीय आवास भी है। जहां षासकीय कर्मचारी अपने परिवार के साथ रह रहे है। रात में नशेडियों द्वारा गाली गलोज करने से उन्हे काफी परेशानी  होती हैं। इस समस्या से निजात पाने के लिए रहवासियों ने इस संबध में एसडीएम हर्षल पंचोली को शिकायत की। जिसके चलते एसडीएम ने पेटलावद श राब दुकान संचालक के खिलाफ बार बार हो रही शिकायत को देखते हुए एसडीएम स्वयं पेटलावद शराब दुकान पर पहुंचे और दुकान संचालक द्वारा की जा रही अनियमिता को लेकर दुकान बंद करने के निर्देष देने के साथ साथ नियमों का हवाला देते हुए बैठक व्यवस्था भी बंद करने के निर्देश  दिए। लेकिन नेताओं का आषिर्वाद प्राप्त दुकान संचालक ने एसडीएम के जाने के 10 मीनट बाद ही शराब की दुकान खोल दी। 

    गुरूवार को एक बार फिर एसडीएम षराब दुकान पहुंचे तो फिर से वही ढर्रा देख षिवला पिता नानजी कतीजा, बहादुर पिता दल्ला चारण, भेरू पिता विजया मकवाना और यशवंत पिता सवरू यादव दुकान के मैनेजर  के खिलाफ प्रकरण पंजीबद्ध कर उन्हे गिरफतार किया। इस चारों में तीन लोग तो षराब की दुकान पर बैठ षराब पीने वाले थे और एक दुकान का सेल्समेन था। चारो  आरोपियों पर धारा 107 /116  के तहत प्रकरण पंजीबद्व करने के साथ....... दस दस हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया 

    लेकिन हालात एक बार फिर वैसे कै वैसे हो गए.... एसडीएम के जाते ही दुकान संचालक द्वारा अंग्रेजी षराब की दुकान से बैठक व्यवस्था हटा कर देषी मदिरा की दुकान के वहां कर दी। फिर से वही ढर्रा चालु हो गया। पहले अंग्रेजी षराब की दुकान पर बैठ कर नषेडी उत्पात मचाते थे तो अब देषी मदिरा की दुकान पर बैठ। 
    जिलेे भर में आबकारी विभाग से फिर झाबुआ की एक ही षराब की दुकान ने बैठक व्यवस्था का लाईसेंस लिया है बाकि पुरे जिले षराब संचालकों द्वारा बैठक व्यवस्था बिना लाईसेंस लिए की जा रही है।
    अगर जिला प्रशासन चाहे तो रहवासियों को हो रही परेशानी को लेकर उचित कार्रवाई कर सकता है। लेकिन जिला प्रशासन द्वारा जनता के हितों को नही अपने हितों पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है। शराब दुकान संचालक की मनमानी से परेशान आम नागरिक  जाए तो किसके पास.... ऐसा लगता है की जनता को खुद इस समस्या से निजात पाने के लिए सडकों पर उतरना पडेगा।




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