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    Friday, April 6, 2018

    रहवासियो ने राजगढ नाके पर शराब दुकान लगाने पर जताया विरोध....... शराब माफिया का गुर्गा भी पहुंचा राय देने..... नही दिखाई दिया शराब ठेकेदार


    झाबुआ। रहवासी इलाका और पास ही में कृषि महाविद्यालय और कन्या छात्रावास होने को लेकर रहवासियों ने एकजुट हो कलेक्टर को राजगढ नाका स्थित शराब दुकान हटाने को लेकर ज्ञापन सौंपा था। इसी तारतम्यता में कलेक्टर ने एक टीम गठीत कर मौंके की जांच के लिए टीम को भेजा। लेकिन जैसे ही टीम वहां पहुंची तो बिचोलिया  भी वहां उपस्थित हो गए और अधिकारियों के समक्ष राय देने लेगा। लेकिन रहवासियों के आक्रोश के चलते बिचोलियें की नही चली। 
    मामले में शुक्रवार को दोपहर 12 बजे राजगढ़ नाके पर स्थित शराब दुकान को हटाने के लिये आसपास के रहवासियो ने धावा बोल दिया। जांचकत्र्ता टीम में एसडीएम केसी पर्ते, एसडीओपी आरसी भाकर, ओर सहायक जिला आबकारी अधिकारी राजेंन्द्र मोरी को शामिल किया गया है। पुरी टीम को जांच रिपोर्ट तीन दिवस में देने को कहा गया है। मौके पर पहुचकर प्रशासनिक अधिकारियों के द्वारा रहवासियो एवं व्यवसाय करने वालो की भी बात सुनी। उन्होने बताया कि वर्तमान में संचालित हो रही दुकान को लेकर आसपास के रहवासियो के द्वारा लिखित में कलेक्टर एवं सीएम हेल्पलाईन पर भी की गयी है। रहवासियो एवं दुकानदारो का कहना है कि यदि इस शराब की दुकान को यहा से नही हटाया गया तो वे अपने अपने दुकानो के सामने धरना दंेगे। पास ही में कृषि विज्ञान महाविद्यालय इन्दौर की छात्राएं पास ही बने हाॅस्टल मे छात्राये रहती है। इसके अलावा पैरामिलीट्री का प्रशिक्षण भी ले रही छात्राओ का हाॅस्टल भी पास है। अब देखना यह है की जाँच के बाद रहवासियों के पक्ष में निर्णय आता है या दुकान संचालक के..... 

    बिचोलिया भी पहुंचा शराब दुकान पर 
    जैसे ही टीम जांच करने राजगढ नाका स्थित शराब दुकान पहुंची.... वहां शराब दुकान ठेकेदार तो उपस्थित नही था। लेकिन कुछ समय बाद जिले शराब माफिया का गुर्गा जरूर पहुंच गया। जो बिचोलिये के रूप में अपना मत दे रहा था। अमला भी उसकी सुन रहा था, ंमगर जब रहवासियों का दबाव बना तो अधिकारी को बिचोलिये को चुप करवाना पडा।  
    सुत्रों के मुताबिक ये वही गुर्गा है जिसे कुछ माह पूर्व गुजरात में अवैध शराब तस्करी करते समय पकड लिया था। भला हो उस सत्ताधारी गुजरात के मंत्री का जिसने इस माफिया के गुर्गे को शराब तस्करी पकडे जाने पर .... अपनी नेता गिरी का रोब झाड बचा लिया था। पूर्व पुलिस अधीक्षक कृष्णावेणी देसावातु के समय इस गुर्गे और इसके आका को एसपी महोदया द्वारा नाको चने चबवा दिए थे। तब दादा भी फुल फार्म में थे। गलियारों की चर्चा है कि दादा ने भी खुब अवैध शराब तस्करी की। उस समय शराब माफिया और दादा के अवैध शराब तस्करी को लेकर संबंध बिगड गए थे। लेकिन अब दादा और शराब माफिया अलकेश की दोस्ती होने के बाद दादा भी इस शराब माफियाओं का पुरजोर सहयोग कर रहे है सुना है अभी नकली शराब तस्कारी की ओर माफिया और दादा का ज्यादा ध्यान है। 

    क्या नियमों का हो रहा है पालन 
     माफियाओं की माफिया गिरी को देख कर यह लगता है कि  जनता और रहवासियों की आवाज दब जायेगी। सुत्रों का कहना है जिला प्रशासन माफियाओं के अहसानों तले दब गया है तभी तो उच्चतम न्यायालय के आदेशानुसार शराब दुकान का संचालन हाइवे सडक से 500 मीटर की दुरी पर होना चाहिये। इसी के साथ ही रहवासी इलाके, सार्वजनिक स्थल, स्कूल, काॅलेज, अस्पताल,धार्मिक संस्थान से दुर होना चाहिये। लेकिन यहां नियमों का पालन नही किया गया। लेकिन रहवासियों ने इसकी शिकायत की लेकिन देखना यह है कि कहा तक नियमों का पालन होता है या फिर माफिया का रोब चलता है। 


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