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    Friday, April 6, 2018

    परम्परा में ही बेटियों का संरक्षण...... जिन ग्राम पंचायतो में पांच साल तक की बेटियों की संख्या बेटों के मुकाबले ज्यादा होगी उन्हें मिलेगा एक.एक लाख का पुरस्कार


    झाबुआ। लिंगानुपात सुधारने के मामले में झाबुआ जिला बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है, जिले के लगभग दो तिहाई गावों में दो वर्षो में 5 साल तक के बच्चों में बेटियों की संख्या बेटों के मुकाबले ज्यादा मिली है. जिले की कुल 375 ग्राम पंचायतो में से 227 में लड़किया लड़को की तुलना में  अधिक है. इन 227 ग्राम पंचायतों को सरकार की योजना के तहत एक दृएक  लाख रूपये का पुरस्कार दिया जायेगा।  पुरस्कार राशि का उपयोग बेटियों के कल्याण की योजनाओं में किया जाएगा। 2021 की जनगणना में इसके और बेहतर होने की संभावना है।  पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने एक योजना शुरू की थी।  इसके तहत जिन ग्राम पंचायतो में पांच साल तक की बेटियों की संख्या बेटों के मुकाबले ज्यादा होगी। उन्हें सम्मान स्वरूप एक.एक लाख का पुरस्कार दिया जाएगा। इसके तहत कलेक्टर आशीष सक्सेना ने इन गांवों का विवरण भोपाल भेजा है. 2016 और 2017 में 1 जनवरी से 31 दिसम्बर के बीच शुन्य से पांच साल तक के बच्चो की जानकारी ली गई।  ये जानकारी आंगनवाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं के बीच जुटाई गई. 
    परम्परा में ही बेटियों का संरक्षण
           झाबुआ जिले  के  आदिवासी समाज में  बेटे.बेटियों में अंतर नहीं किया जाता। कन्या भ्रूण हत्या के प्रकरण भी सुनने में नहीं आते।  वधु मूल्य लेने की परम्परा है इसलिए बेटी का जन्म अच्छा माना जाता है. 

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