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    Friday, April 13, 2018

    बेडियों में 25 साल से बंधा रिंकेश..... तरसता आजादी के लिए........ सिस्टम पर उठते सवाल..... शासन की सारी योजनाएं कागजों पर



    झाबुआ। एक खाट..... जंग लगी बेडियां और नीम का झाड....... इस पर ही बित गया है रिंकेश का बचपन और आ गई जवानी.... उसे देख लगता ही नही की... कभी इन बेडियों से उसे आजादी मिल भी पायेगी या नही..... मानवता भी जहां शर्मसार हो जाए..... और सिस्टम पर भी सवाल खडे हो जाए..... ऐसी ही कहानी ग्राम पंचायत बुधाशाला के पुंजार फलिए में रहने वाले वरदिया के पुत्र रिंकेश की..... जिसके जन्म के तीन सालों तक वह स्वस्थ था और मां बाप की आंखों का तारा था.... लेकिन तीन साल बाद अचानक रिंकेश का स्वास्थ्य बिगड गया और जिला ने गुजरात से लेकर इंदौर और राजस्थान तक कई जगह डाॅक्टरों के यहां रिंकेश का उपचार करवाया लेकिन रिंकेश ठिन नही हो पाया आखिरकार..... पिता ने अपने लाडले बेटे को नीम के पेड के नीचे बेडियों से बांध दिया..... ताकि उसका बेटा किसी को नुकसान न पहुंचा दे.... और तीन साल के रिंकेश का बेडियों से बंधा यह सफर पच्चीस का होने के बाद भी चल रहा है। 


    पूरी दिनचर्या निकल जाती है खाट और बेडियों से बंधें बंधे 
    रिंकेश की सुबह से लेकर रात तक.... पुरी दिनचर्या खाट पर ही होती है.... खाना... पीना... सोना और सब कुछ इसी खाट और बेडियों से बंधे रहकर ही रिंकेश को करना प्डती है। क्योंकि रिंकेश के माता पिता को भी यह डर है कि कहीं रिंकेश किसी को कुछकर नही दे और किसी को कुछ हो गया तो वे उसका हर्जाना कैसे देंगे और इसी डर से रिंकेश को बेडियों से बांध दिया गया। हंसते खेलते रिंकेश को अचानक क्या बिमारी हो गई.... कि उसका ईलाज नही नही हो पा रहा है.... रिकेश के पिता ने उसके ईलाज के लिए लाखों रूपए लगा दिए.... रूपए खत्म हो गए तो जमीन गिरवी रख दी.... फिर भी बात नही बनी तो रिकेंश के पिता ने उसके ईलाज के लिए जमीन ही बेच दी। लेकिन हाल वही के वही....। 

    सिस्टम पर उठते सवाल
    पिछले 25 वर्षो से बेडियों से बंधा रिंकेश..... जिस पुंजार फलिये में रहता है.... वहीं पास ही में आंगनवाडी भी है.... और स्कूल भी.... थोडी ही दुरी पर ग्राम पंचायत का भवन भी है.... जहां अकसर सरकारी अधिकारी और जनप्रतिनिधियों का आना जाना लगा रहता है.... ऐसे में बेडियों से बंधे रिंकेश की किसी पर नजर ही नही गई। गंव के सरपंच, मंत्री.... आंगवाडी कार्यकर्ता.... स्वास्थ्य कार्यकर्ता.... शिक्षक.... जिन को हर रोज शहर से पुंजार आना जाना लगा रहता है.... ंअधिकारी भी इस क्षेत्र का निरिक्षण करने के लिए आते जाते रहते है। लेकिन किसी ने भी रिंकेश की सुध तक नही ली। प्रदेश सरकार चाहे लाख योजनाओं पर अमल करने की बात कहे। मगर सारी योजनाएं कागजों पर धरी की धरी रह जाती है। ऐसे में वरदिया जैसे आम नागरिक शासन की ओर आस लगाए बैठे रहते है। 


    क्या कहते है जिम्मेदार-
    जब इस संबंध में ग्राम पंचायत बुधाशाला के पुंजार फालिये में रहने वाले वरदिया के पुत्र रिंकेश के बारे में एसडीएम केसी परते को अवगत करवाया गया तो उन्होने यह कह कर पल्ला झाड लिया कि आपके द्वारा इस संबंध में मुझे जानकारी मिली है। तहसीलदार को भेज दिया जायेगा जो भी संभव होगा उपचार करवायेंगे। 


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