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    Sunday, May 27, 2018

    कप्तान के रिया ........ताई का हाथ... संघ का साथ.... तो कौन भरे हुंकार.... चंद नोटो के खातिर चापलुस खबरनवीश रचते है अपनों पर ही षडयंत्र


    लो भियां मैं फिर आ गिया कुछ कही अनकही के साथ..... भियां देखा तो नी..... स्कूल में पढ जरूर लीया है....अंग्रेजों की फुट डालों और शासन करों की नीति को ..... अग्रेजों की इसी नीति ने भियां भारत पर सालों राज किया.... ये बडी लंबी बात है.... वो तो मैं अभी बिता नी सकता... मगर ऐसे ही भिया.... जिले के एक विभाग के कप्तान.... कलमकारों और और लोगों की आंखों पर समाजसेवा का पर्दा डाल.... फुट डालों और शासन करों निती अपना रिया है.... पर्यावरण प्रेमी का छोला ओढ ये कप्तान.... अपराधियों, माफियाओं, भागडियों, सटोरियों.... के लिए तो मानो मसीहा बन कर आ गिया हो....।
    भियां पिछली पद स्थापना की तरह इस कप्तान ने चापलुस किस्म के खबरनवीशों अपनी ओर कर लिया.... जो.... उठे तो..... बैठे तो... फोटो खिंचे.....इन चापलूसों  ने  सिर्फ संडास जाते समय कप्तान का फोटो नी खिंचा होगा .... 
    झुठ को सच..... और सच को झुठ बनाने में.... माहिर इस कप्तान के साथ मिल खबरनवीशों ने भी अपना जमीर बेच सच को झूट और झूट को सच  अपनी  कलम  से  बताना  चालू कर दिया  .... जब पर्यावरण प्रेम के नाम पर काले कारनामें उजागर होने लग गिये.... तो कप्तान ने पिछली पदस्थापना की तरह यहां भी खबरनवीशों के बीच फुट डाल दी..... जो चापलुस किस्म के खबरनवीश थे उन्होने दुसरें खबरनवीशों के कार्यकलापों पर नजर रखना चालु कर दिया... और लग गिये उन्हे फसाने को.... कप्तान के कहे अनुसार ये चापलुस खबरनवीश समय समय पर सच्चाई और कालेकारनामें उजागर करने वालों को बडी कार्रवाई होने.... जननी द्वारा कप्तान को यहां लाने.... सत्ताधारी नेताओं का हाथ होने.... और कई डराने वाली बात के ने लगे। कई खबरनवीशों को कई मामलों में फंसाने की कोशिश भी की। लेकिन ये चापलुस भुल गिये..... कि उनके भी घर शीशे के है.... ।
    भियां जब विरोध के स्वर गुंजने लगे.... तो माफियाओं, सटोरियों, अपराधियों और भाजगडियों का मसीहा..... ये कप्तान.... केने लग गिया.... ताई का हाथ.... संघ का साथ.... तो कोई मेरा कुछ नी बिगाड सकता.... भियां घुमा फिरा के नी सीधे सीधे बिता रिया हुं.... पिछली पद स्थापना के समय..... कप्तान के ताई के बेटे से अच्छे संबंध थे.... महाराष्ट्रªीयन होते हुए ताई...कप्तान के समाज की ही है.... तो संबंध इतने घनिष्ठ है.... कि ताई को अगर कप्तान कह दे..... उपर वाले वरिष्ठ परेशान कर रिये है... तो ताई उनकी क्लास ले.... ले... इसलिए ही तो कप्तान... काले कारनामें करना वालों का मसीहा बन गिया है.... अब भियां बात करे संघ(कामगारो का समुह) की.... तो भियां कप्तान के रिया है... कि संघ ही मुझे यहां लाया है.... भियां सुत्रों के मुताबिक ग्वालियर के सत्ताधारी एक बडे नेता... और इंदौरी संघ के बडे पदाधिकारियों से अच्छे संबंध होने के चलते... उपर तक कप्तान ने सेटिंग  जमा रखी है... अगर कप्तान के काले कारनामें  उजागर होते भी है तो... ये पदाधिकारी तुरंत तरफदारी में लग जाते है..... तभी तो जिले मे बडे पशुओं तस्करी और कटनी होने पर भी.... कोई कार्रवाई नही करते.... और तो और जो इसका विरोध करता है उस पर कार्रवाई करने लग जाते है..... भियां हाल ही में संघ (कामगारो का समुह) के एक राष्ट्रीय स्तर के पदाधिकारी कार्यकर्ताओं के यहां भोजन करने की बजाय.... कप्तान के साथ भोजन करने गिये थे। इसलिए भियां तभी तो कप्तान ताई का हाथ.... संघ का साथ... तो कौन भरे हुंकार... के रिये है। 
    तो भियां अब मैं जा रिया.... लेकिन जाते जाते एक बात और बिता दुं..... चाहे ताई का हाथ हो... या फिर संघ (कामगारो का समुह) साथ.... एक न एक दिन पाप का घडा जरूर फुंटता है.... भियां खबरनवीशो... अपनी बिरादरी वालों को गिराने की मत सोचो..... कप्तान तो आते जाते रिये है... हमें तो यहीं रेना है.... मै जान रिया हुं... मेरी कही-अनकही पढते ही तुम... सब फिर कप्तान से मिल.... मेरे और आवाज उठाने वाले खबरनवीशों के खिलाफ चंद नोटो के खातिर षडयंत्र रचना चालु कर दोगे.... और कप्तान के सामने के सामने क्या राग आलापोगे... मगर भियां जाते जाते ये के रिया हुं... तुम्हारे षडयंत्र में का हमें कोई डर नी है... पर ये बिता दुं मुझे और खबरनवीशों को कुछ हुआ... तो उसकी जिम्मेदारी सिर्फ और सिर्फ तुम्हारी होगी... फिर तुम्हारा क्या होगा.... ये तुम सोच भी नी रिये होगे...अब जा रिया.... जय राम जी की..... भारत माता की जय....। 

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