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    Monday, May 28, 2018

    आखिर कौन है ये इंदौरी पारस........ जो सहायक आयुक्त के साथ अपना फोटो दिखाकर कर जिले में कर रहा है ठगी .....


    झाबुआ। सावधान रहिए कहीं ऐसा न हो इंदौरी पारस नौकरी देने के नाम पर आप से भी ठगी कर....  कहीं रफुचक्कर न हो जाये.... और बाद में आपको पछताना न पढे। इसलिए पहले से सावधान हो जाईये.... कहीं वह अगला शिकार आपको न बना ले। 
    जिले में इंदौर से आया पारस नाम का युवक इन दिनों आदिवासी विभाग में पदस्थ सहायक आयुक्त गणेश भाबर को अपना रिश्तेदार बताकर नौकरी देने के नाम पर ठगी कर रहा है। इसलिए अगर कोई पारस नाम का युवक आपके दरवाजे पर दस्तक दे और नौकरी दिलवाने का कहते तो तुरंत पुलिस थाने पर फोन कर इस इंदौरी पारस की सुचना दे। ताकि इस ठगोरे पर लगाम कसी जा सके। 
    सहायक आयुक्त का बता रहा अपना रिश्तेदार
    जिले के आदिवासी विकास विभाग में सहायक आयुक्त के पद पर पदस्थ गणेश भाबर को इंदौर से आया पारस नाम का युवक अपना रिश्तेदार बताकर इन दिनों जिले में चतुर्थ श्रैणी के पद पर नियुक्त करने का झांसा दे कर कईयों से ठगी कर रहा है। ये इंदौरी पारस प्रत्येक व्यक्ति से नियुक्ति के नाम पर 40 हजार रूपए मांगता है.... और कहता है 25 हजार साहब के और 15 हजार मेरे। सुत्रों की माने तो कई लोगों को उपरी सेंटिंग के चलते नियुक्ति भी दिलवा चुका है।
    अब वह अपना अगला शिकार होस्टल अधीक्षकों को बना रहा है.... कहता है साहब तुमसे नाराज है... अगले तबादलों में तुम्हारा भी नाम है.... साहब से मेरी अच्छी है मैं तुम्हारा तबादला रूकवा दुंगा 40 हजार रूपए लगेगे 15 मेरे और 25 साहब के... अगर कोई अच्छा झांसे में आ गया तो और ज्यादा की भी ठगी हो सकती है। 
    सुत्रों की माने तो सेमलिया के एक अधीक्षक को इस इंदौरी पारस ने तबादले के नाम पर इतना प्रताडित कर दिया कि उससे 3 बार अलग अलग रूप में करीब 1 लाख 20 हजार रूपयों की ठगी कर ली। आखिर में उसका वहां से तबादला हो गया और दुसरे को 80 हजार रूपए लेकर होस्टल में पदस्थ करवा दिया। इस तरह से ये इंदौरी पारस शिक्षकों, अधीक्षको और कर्मचारियों को अपना ठगी का शिकार बना रहा है। 
    साहब का दिखाता फोटो
    अगर कोई इस इंदौरी पारस के झांसे में नही आता है तो ये पारस सहायक आयुक्त के साथ खिंचवाये फोटो दिखाता है और कहता है साहब से अपने घनिष्ठ संबंध है...ं मैं जो भी साहब से कहुंगा... वो तत्काल हो जायेगा... साहब के साथ खिंचवाये फोटो देख इस इंदौरी के झांसे कोई भी आ सकता है। अब ये फोटो असली है या नकली ये तो इंदौरी पारस ही बतायेगा। 
    प्लाट का है मामला
    गलियारों की चर्चा और सुत्रों की माने तो साहब का एक प्लाट है जो काफी समय से नही बिक रहा है। जिसे बिकावाने के लिए इंदौरी पारस जदोजहद में लगा हुआ है। इसी वजह से साहब और उनके कार्यालय में इंदौरी पारस का आना जाना लगा रहता हैं और घंटों कार्यालय में बैठा नजर आ सकता है। अब ये बात कितनी सच्ची है या झुठी ये तो जब पारस पर पुलिस की लगाम कसेगी तक पता चलेगा...। कहीं ऐसा तो नही ये इंदौरी पारस किसी षडयंत्र के चलते साहब की छवि धुमिल करना चाह रहा हो। 
    मैं नही पहचानता
    जब इस संबंध में सहायक आयुक्त गणेश भाबर से चर्चा की गई तो उन्होने बताया कि न तो पारस नाम का कोई व्यक्ति विभाग में पदस्थ है और न ही मैं उसे जानता हुं। अगर मेरा नाम लेकर ठगी कर रहा है तो मैं पता कर दिखवाता हुं।

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