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    Tuesday, May 29, 2018

    तुम मेरी राखो लाज हरी, अब छोड मोसे बिरसत नाही- भजनों पर झुम उठे श्रद्धालुजन। .. श्रीरामशरण के सप्तदिवसीय आयोजन में श्रद्धा एवं भक्ति की बहीं गंगा


    झाबुआ ।  परमपिता परमेश्वर   समर्थ- सर्वज्ञ एवं सर्वशक्तिमान  है, जो इस सृष्टि का संचालक होने के साथ संवाहक हैे । प्रभू की कृपा निरंतर रूपसे प्रत्येक जिवात्मा पर बरसती है, आवश्यकता है हमे उसका विश्वासपात्र बनने की । जिन प्राणियों में अविश्वास की भावना रहती है वे भ्रमित होकर इस कृपा से वंचित रह जाते हे । श्रीराम शरणम के स्वामी डा. विश्वामित्रजी की एलईडी से उक्त उपदेश हजारों की संख्या मे एकत्रित श्रद्धालुओं ने सप्त दिवसीय आयोजन के 5 वें दिन पैलेस गार्डन में आयोजित कार्यक्रम में श्रवण किये ।
    डा. विश्वामित्र ने कहा कि गृहस्थ जीवन में रहते हुए  मान मर्यादाओं एवं सम्मान, सेवा समर्पण,सहिष्णुता एवं सहभागिता की गहरी पैठ रहती है । वह परिवार ही नही समाज व राष्ट्र के लिये अमूल्य धरोहर बन जाती है । मंगलवार को 5 वें दिन रामशरणम के तहत स्थानीय समाज सेवी रणछोडलाल राठौर के सौजन्य से आयोजित इस कार्यक्रम में  प्रवचन के पूर्व 2000 से अधिक भक्तो ने अपनी उपस्थिति दर्ज करवा कर संगीत मय भजन कीर्तन मे श्रोताओं ने झुम कर नाच कर प्रभू के प्रति अपनी भक्ति भावना व्यक्त की । इस अवसर पर सतगुरू तेरे चरणों  की गर धुल मिल जाये  तथा प्यारे दर्शन दीजों आय, तुम बिन रही ना जाय, तुम मेरी राखो लाज हरी, अब छोड मोसे बिरसत नाही तथा मूरलीधर घनश्याम हरे, जय गिरीधर गोपेाल हरे, केशव माधव श्याम हरें जय प्रभू दीन दयाल हरें पर सभी श्रोता एवं महिला भक्त नृत्य करने लगें ।
    स्वामी सत्यानंद जी महाराज द्वारा रचित भक्ति प्रकाश में वर्णित अनुताप अश्रु प्रेम सन्देश, मतावाला जोगी, नंदनवन, तथा भरोसा ग्रंथ का संगीतमय सामूहिक पाठ किया गया । 

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