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    Tuesday, June 12, 2018

    कमीशन का बडा खेल..... जांच के बाद फिर ये कैसा किया सभागीय उपायुक्त ने आदेश जारी..... पारस कर रहा प्रत्येक छात्र के नाम पर 500 रूपए की वसुली


    झाबुआ। सांभागीय हो या जिला स्तरीय यहां जो भी अधिकारी आते है, अपनी ढपली और अपना राग आलापने लग जाते है। ऐसा लगता है झाबुआ जिला मानों नई नई तकनिकों और योजनाओं के परिक्षण केन्द्र बन गया हो।  इसका अच्छा उदाहरण है वर्ष 2014-15, 2015-16, 2016-17 की छात्रावास आश्रमों में क्रय की गई सामग्री के भौतिक सत्यापन एंव गुणवत्ता को जांच सभागीय उपायुक्त बीजी मेहता द्वारा की जा चुकी है।  लेकिन एक बार फिर वही जांच के आदेश सभागीय उपायुक्त द्वारा फिर से जारी करना कई सवालिया निशान खडे कर रहा है। 
    क्या है मामला 
    मामला है वर्ष 2014-15, 2015-16, 2016-17 छात्रावास आश्रमों जिला कार्यालय द्वारा छात्रावास पालक समिति एवं छात्रावासी छात्रों के खातों में कितनी कितनी राशि क्रय हेतु खातों जमा की गई एवं उक्त राशि से पालक समिति एवं छात्रों द्वारा कब कब सामग्री क्रय की गई। उस सामग्री के भौतिक सत्यापन एवं गुणवत्ता की जांच का मामला काफी सुर्खियों में रहने के साथ साथ विवादों के घेरे में रहा। जिसकी जांच तात्कालीन सभागीय उपायुक्त बीजी मेहता इंदौर द्वारा की जा चुकी है। जांच में दोषी छात्रावास अधीक्षकों को सजा के साथ साथ दंड भी आरोपित कर वसुला गया। जांच के दौर कई अधीक्षकों के इंक्रीमेंट आज भी रूके हुए है। तात्कालीन सभागीय उपायुक्त द्वारा पुरी जांच करने के बाद एक बार फिर सभागीय उपायुक्त गणेश भाबर द्वारा एक समिति का गठन कर उक्त मामले की जांच के लिए दिनांक 4.6.18 को जांच के आदेश जारी करना कई सवालिया निशान खडे कर रहे है। सुत्रों की माने तो अधीक्षकों पर छात्रों के खातों में आने वाली राशि को लेकर कमीशन के लिए दबाव बनाया जा रहा है। जिसकी वजह से इस तरह के आदेश जारी के जा रहे है। 
    कमीशन का है पुरा खेल
    जिले के अधीक्षकों के अनुसार गत सत्र में छात्रों के खाते में चदर एवं अन्य सामग्री क्रय के लिए शासन द्वारा राशि जमा की गई थी और छात्रों द्वारा उस राशि से चदर एवं अन्य सामग्री क्रय की गई। मगर अधीक्षकों से छात्रों द्वारा क्रय की गई सामग्री का कमीशन मांग की जा रही है और कमीशन के लिए अधीक्षकों को प्रताडित करने के लिए तरह तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे है। जांच के नाम पर कोई न कोई आदेश आए दिन जारी कर दिया जाते है। इस तरह ये उक्त आदेश भी अधीक्षकों से कमीशन के चक्कर में जारी किया गया है। इस पुरे कमीशन के खेल में पारस की मुख्य भूमिका है जो अपने बंदों को कमीशन के लिए छात्रावासों में सहायक आयुक्त के नाम पर भेज रहा है। 
    जल्द ही होगा आंदोलन 
    कमीशन के इस चक्कर में जांच के नाम पर अधीक्षकों को प्रताडित करना और आदेश जारी करने की वजह से अधीक्षकों में काफी आक्रोश है। गांव खेडों के अधीक्षकों को इतना प्रताडित कर दिया गया है कि अब वे जल्द ही अपने संगठन के माध्यम से धरना देने के साथ साथ आंदोलन भी करेंगे। अवकाश के दिनों में भी जांच करना न्याय संगत नही है। 
    पारस कर रहा है 500 रूपए की वसुली
    सुत्रों के अनुसार इन दिनों रामा, थांदला और पेटलावद में छात्रावास आश्रमों में नवीन प्रवेशी प्रत्येक छात्र के नाम पर इंदौरी पारस 500 रूपए वसुल कर रहा है। इस वसुली में कोई आनाकानी करता है तो इंदौरी पारस अधीक्षकों को साहब को शिकायत एवं जांच करवाने की धौंस देता है। सुत्रों की माने तो इस दबाव की वजह से पेटलावद और थांदला के अधीक्षकों ने राशि एकत्रित कर इंदौर पारस के हवाले कर दी है। सहायक आयुक्त को अपना खास बनाते वाला ये इंदौर पारस जल्द ही अधीक्षकों के आक्रोश का शिकार होने वाला है। आखिर इंदौर पारस और साहब के आपस में ऐसे क्या संबंध है ये समझ के परे है। अगर कलेक्टर कार्यालय के सीसी टीव्ही फुटेज खंगाले जो जरूर साहब और पारस के संबंधों का पता लगाया जा सकता है और अधीक्षकों को प्रताडना से छुटकारा। 
    इनका कहना है-
     जांच तो हो गई है, जांच यहां पेन्डिग नही है, लोक आयुक्त वाले मांगते है जानकारी वो रिकार्ड मांग रहे थे कुछ लोग बच गए थे बाकि सब तो रिकार्ड मैने उनको उपलब्ध करवा दिए थे। पत्राचार तो लोकआयुक्त से हो रहा है हमारे यहां से  हो रहा है। कमीशन के लिए कौन अधीक्षकों पर दबाव बना रहा है ये मुझे नही मालुम, पारस कौन है मै उसे नही जानता। 
     गणेश भाबर सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास विभाग झाबुआ

    सभागीय स्तर पर कार्रवाई की जा रही है तो वो ही इस संबंध में बता पाऐंगे। 
    आशीष सक्सेना कलेक्टर झाबुआ

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